भंडारे में ‘जय श्रीराम’ नारा लगवाकर मुसलमान को खाना खिलाना, भाईचारा नहीं, नफरत फैलाने की साजिश हैः मौलाना
Lucknow News In Hindi: मौलाना शहाबुद्दीन ने सिद्धार्थनगर की घटना को लेकर आरोप लगाया कि मुसलमान को भंडारे का खाना खिलाने से पहले ‘जय श्रीराम’ का नारा लगवाया गया. मौलाना ने इसे सांप्रदायिक बताया है.

लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सिद्धार्थनगर जिले में हुई एक घटना को लेकर सांप्रदायिकता फैलाने का गंभीर आरोप लगाया है. मौलाना ने कहा कि एक व्यक्ति ने भंडारे का खाना खिलाने के लिए मुसलमान को ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने को मजबूर किया, जो भाईचारे और कौमी एकता के खिलाफ है.
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा, “सिद्धार्थनगर के लवकुश ने एक मुसलमान को भंडारे का खाना खिलाया और यह कहते हुए कि तुम्हें ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाना होगा. खाना देने से पहले नारे लगवाए गए. यह भाईचारा नहीं है. यह कौमी एकता नहीं है. यह नफरत को बढ़ावा देना है.”
चढ़ावा चोरी मामले में जमात-ए-इस्लामी हिंद की एंट्री, उपाध्यक्ष बोले- राम मंदिर का निर्माण ही...
उन्होंने आगे कहा कि यह पूरे भारत के लोगों को दिखाने की कोशिश है कि मुसलमानों को किस तरीके से जलील करके भंडारा खिलाया जाता है और रुसवा किया जाता है. मौलाना ने इसे फिरकापरस्ती और सांप्रदायिक सोच बताया.
मुसलमानों को दी सलाह
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुसलमानों से अपील की कि वे इस तरह के आयोजनों में बिल्कुल न जाएं. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम मोहब्बत के पैमाने को तोड़ रहे हैं और सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रहे हैं.
बता दें कि हाल ही में सिद्धार्थनगर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक भंडारा कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर मुस्लिम व्यक्ति से जय श्रीराम का नारा लगवाने की बात सामने आई. मौलाना रजवी बरेलवी विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों के मंचों पर सक्रिय रहते हैं और अक्सर सांप्रदायिक मुद्दों पर बयान देते रहते हैं.
बरेलवी संप्रदाय के प्रमुख धार्मिक नेताओं में शुमार मौलाना रजवी का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
स्थानीय प्रशासन अलर्ट
मौलाना के बयान से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है. भाजपा और हिंदू संगठनों की ओर से इस बयान की निंदा होने की संभावना है. वहीं कुछ विपक्षी नेता और मुस्लिम संगठन इसे सही बता रहे हैं.
अखिलेश यादव का दावा- यूपी में समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने के लिए सरकार करा रही सर्वे

























