Ghaziabad: गाजियाबाद में 800 दुकानों पर लटक रही सीलिंग की तलवार, नोटिस के बाद भी नहीं बनवाया लाइसेंस
गाजियाबाद में नगर निगम की सीमा के अंदर व्यवसाय चलाने के लिए लाइसेंस न लेने पर कार्रवाई की जाएगी. नगर निगम ने 800 लोगों को चिह्नित किया जिनपर कार्रवाई की जानी है.

UP News: गाजियाबाद नगर निगम (Ghaziabad Municipal Corporation) के अंतर्गत बिना लाइसेंस के चल रहे प्रतिष्ठानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. नगर निगम का कहना है कि जिसने 2022-2023 का लाइसेंस नहीं लिया है उनके खिलाफ सीलिंग और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल 4200 लोगों को नोटिस जारी किया गया था जिसमें से 800 ने अब तक लाइसेंस नहीं लिया है जिनपर कार्रवाई की तलवार लटक रही है.
हाई कोर्ट ने जारी किया है सख्त निर्देश
नगर निगम मुख्य टैक्स अधिकारी डॉक्टर संजीव सिन्हा ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार 1997 में एक शासनादेश जारी करते हुए कुल 39 मद तय किया था. कहा गया था कि इन 39 मदों के लाइसेंस प्रत्येक नगर निगम और नगर पालिकाओं में बनवाई जाए. उन्होंने कहा, 'तीन साल पहले जब मैंने यहां ज्वॉइन किया तो लाइसेंस की प्रक्रिया बहुत धीमी और ना के बराबर थी, मैंने नगर आयुक्त जी से कॉर्डिनेट करके उनके मार्गदर्शन में लाइसेंस बनवाना शुरू करवाया.' उन्होंने कहा कि बड़े दुकानदारों, होटल, रेस्तरां, क्लीनिक, हॉस्पिटलों औऱ नर्सिंग होम मालिकों ने इसका विरोध करते किया और हाईकोर्ट चले गए. जिसके बाद कोर्ट ने स्टे लगा दिया. वहीं, हाई कोर्ट ने सख्त आदेश जारी किया कि नगर निगम के अंदर संचालित नर्सिंग होम, हॉस्पिटल और क्लीनिक को नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा.
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लाइसेंस बनाने से इसलिए कतरा रहे दुकादार
संजीव सिन्हा ने बताया कि पिछले साल करीब 4200 लोगों को नोटिस जारी किया, उसमें 800 लोगों को छोड़कर सभी ने अपना लाइसेंस ले लिया है, 800 लोगों ने नोटिस जारी करने के बाद भी नहीं लिया. अगर आरसी के बावजूद वसूली नहीं होती तो सीलिंग की कार्रवाई भी की जा सकती है. वहीं व्यापारियों का कहना है कि दुकानदारों पर कई प्रकार के लाइसेंस का बोझ डाल दिया जाता है. अभी हम बहुत चीजों से जूझ रहे है. व्यापारियों के साथ बातचीत करनी चाहिए. हर दूसरे दिन एक लाइसेंस के लिए बोल दिया जाता है, कोरोना के बाद से हमें कोई राहत नहीं मिली है.
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Source: IOCL






















