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देहरादून में मानव रहित सिस्टम से खनन पर निगरानी, बिना रॉयल्टी के ऑटो जनरेट होगा चालान

उत्तराखंड सरकार के इस कदम से न केवल अवैध खनन गतिविधियों पर लगाम लगेगी, बल्कि पारदर्शी और संगठित खनन क्षेत्र का निर्माण भी होगा, जो राज्य के आर्थिक विकास में सहायक साबित होगा.

उत्तराखंड सरकार ने खनन गतिविधियों में पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अब राज्य में खनन कार्यों पर मानव रहित निगरानी तंत्र (Unmanned Monitoring System) के जरिए सख्त निगरानी रखी जाएगी. इसके तहत बिना रॉयल्टी अदा किए खनिजों का परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ स्वतः चालान जनरेट हो जाएगा. इस तकनीकी पहल से अवैध खनन पर लगाम कसने और राजस्व प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी.

खनन निदेशक राजपाल लेगा ने जानकारी दी कि इस नई प्रणाली को लागू करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है. प्रस्ताव के अनुसार, खनन क्षेत्रों में अत्याधुनिक सेंसर, कैमरे और डिजिटल रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाए जाएंगे. ये उपकरण वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और तुरंत संबंधित जानकारी सिस्टम में अपडेट कर देंगे. बिना वैध रॉयल्टी भुगतान वाले वाहनों की पहचान होते ही उनके खिलाफ चालान स्वतः जारी हो जाएगा.

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राजपाल लेगा ने बताया कि यह पहल विभाग में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देगी. साथ ही, इससे मैनुअल हस्तक्षेप कम होगा, जिससे भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा. उन्होंने कहा कि अक्सर अवैध खनन या बिना रॉयल्टी भुगतान के खनिजों का परिवहन राज्य सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाता है. नई तकनीक से ऐसी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा.

वर्तमान में उत्तराखंड वन विकास निगम (यूएफडीसी) को नदियों से खनन कार्यों की अनुमति 31 मई तक है, जबकि खनन विभाग को 30 जून तक खनन करने की मंजूरी मिली है. इस असमानता के कारण विभाग और कारोबारी वर्ग ने वन निगम के खनन कार्यों की अवधि बढ़ाने की मांग उठाई है. अधिकारियों का मानना है कि यदि वन निगम को भी 30 जून तक खनन की अनुमति मिल जाती है तो इससे समन्वय बना रहेगा और खनन कार्यों में बाधाएं दूर होंगी.

राजपाल लेगा ने बताया कि इस संबंध में भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है. यदि अनुमति मिलती है तो राज्य सरकार को खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी और मौसमी कारणों से कई बार खनन कार्य प्रभावित होते हैं. ऐसे में एक समान समयावधि तय करना आवश्यक है ताकि राजस्व का नुकसान न हो और खनन प्रक्रिया व्यवस्थित बनी रहे.

खनन विभाग का मानना है कि मानव रहित निगरानी प्रणाली से न केवल अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा, बल्कि राज्य के "डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन" और "ई-गवर्नेंस" के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी. तकनीक के इस्तेमाल से विभाग को वास्तविक समय में डेटा प्राप्त होगा, जिससे नीतिगत फैसले लेने में भी सहूलियत होगी.

इसके अलावा, चालान प्रणाली के ऑटोमेटिक होने से वाहन चालकों और खनन व्यवसायियों में अनुशासन बढ़ेगा. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी, जिससे कानूनी प्रक्रिया भी पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी.

खनन विभाग भविष्य में इस तकनीक को राज्य के अन्य खनन क्षेत्रों में भी विस्तारित करने की योजना बना रहा है. इसके तहत ड्रोन सर्वेक्षण, जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से युक्त विश्लेषण प्रणाली को भी जोड़ा जाएगा, ताकि खनन गतिविधियों की निगरानी को और अधिक मजबूत बनाया जा सके.

राजपाल लेगा ने कहा, "यह पहल उत्तराखंड के खनन क्षेत्र को तकनीक आधारित, पारदर्शी और अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. हम चाहते हैं कि हर खनन गतिविधि नियमों के दायरे में हो और राज्य को उसका उचित राजस्व प्राप्त हो."

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