राम मंदिर के CEO का कैसे हुआ चयन? विवाद के बीच ट्रस्ट ने बताई सच्चाई
अयोध्या राम मंदिर सीईओ की नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल रही खबरों का श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने खंडन किया है. ट्रस्ट ने उनकी नियुक्ति से जुड़े तथ्य साझा करते हुए अपना पक्ष रखा है.

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जितेंद्र मिश्रा के चयन को लेकर कुछ मीडिया में चल रही खबरों का खंडन किया है. ट्रस्ट ने इन तमाम खबरों को गलत बताया और दावा किया है कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने इंटरव्यू की प्रक्रिया में हिस्सा लिया था.
श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरी की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि न्यास राम मंदिर के पहले सीईओ की नियुक्ति से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना चाहता है ताकि गलत जानकारी को संबोधित किया जा सके.
राम मंदिर ट्रस्ट ने किया खबरों का खंडन
न्यास ने सीईओ की नियुक्ति से जुड़े तथ्य साझा करते हुए बताया कि 6 जुलाई 2026 को खोज समिति का गठन किया गया था. खोज समिति को कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे. तीन शहरों, दिल्ली एनसीआर, पुणे और संबलपुर, में एआई स्क्रीनिंग और मैनुअल विशेषज्ञता के जरिए बहु-स्तरीय मूल्यांकन किया गया.
इस मूल्यांकन के बाद 16 प्रत्याशियों को अंतिम रूप से चुना गया, जिन्होंने 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या में आमने-सामने की बातचीत में भाग लिया. एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र ने 11 अगस्त 2026 को पहली पाली में साक्षात्कार प्रक्रिया में भाग लिया था. खोज समिति ने 1 सितंबर 2026 को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें न्यास को प्रस्तुत कीं.
बयान में बताया गया कि 2 सितंबर 2026 को न्यास ने अनुशंसित शीर्ष तीन प्रत्याशियों, जितेंद्र मिश्र, संजय प्रताप सिंह विश्वास राव और श्रुति भारद्वाज के नाम मीडिया के समक्ष सार्वजनिक किए.
'जितेंद्र मिश्रा ने इंटरव्यू में हिस्सा लिया था'
न्यास ने कहा कि यह दावा कि जितेंद्र मिश्र 11-12 अगस्त को साक्षात्कार के दौर में शामिल नहीं थे, तथ्यात्मक रूप से गलत है. शीर्ष तीन अनुशंसित प्रत्याशियों में उनका शामिल होना उनकी भागीदारी, मूल्यांकन और योग्यता-आधारित चयन का दस्तावेजी प्रमाण है.
न्यास ने कहा कि चयन प्रक्रिया संस्थागत शासन और पारदर्शिता के सर्वोच्च मानकों के अनुसार आयोजित की गई थी. प्रत्येक चरण दस्तावेजी कृत था और सभी अंतिम उम्मीदवारों की पहचान अयोध्या में दर्ज की गई थी. न्यास ने दोहराया कि वह पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है और चयन प्रक्रिया के संबंध में किसी भी जांच के लिए तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करना जारी रखेगा.
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