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अंकिता भंडारी हत्याकांड फिर सियासत के केंद्र में, न्याय की लड़ाई या 2027 की राजनीतिक चाल?

Ankita Bhandari Murder Case: कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर है. पार्टी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है और यह आरोप लगा रही है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पूरी तरह निष्पक्ष जांच नहीं हुई.

उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है. अदालत के फैसले और राज्य सरकार की कार्रवाई के बाद भी यह मामला लगातार राजनीतिक बहस, आरोप-प्रत्यारोप और प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है. बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सब वास्तव में अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई है, या फिर कुछ राजनीतिक दल और चेहरे इस संवेदनशील प्रकरण को दोबारा हवा देकर अपने निजी और राजनीतिक हित साधने में जुटे हैं.

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में वनंत्रा रिजॉर्ट में काम करने वाली रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था. घटना के बाद धामी सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया. एसआईटी जांच पूरी होने के बाद वनंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई.

लंबी न्यायिक प्रक्रिया और सुनवाई के बाद मई 2025 में अदालत ने तीनों अभियुक्तों को हत्या का दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई. सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि कानून के तहत आरोपियों को जेल भेजा गया और किसी भी स्तर पर कोई ढील नहीं दी गई.

कांग्रेस ने लगातार घेरा

इसके बावजूद कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है. पार्टी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है और यह आरोप लगा रही है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पूरी तरह निष्पक्ष जांच नहीं हुई.

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कुछ बड़े और प्रभावशाली चेहरों की भूमिका को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं और जब तक हर सवाल का जवाब नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. कांग्रेस इसे महिला सुरक्षा और न्याय से जोड़कर जनता के बीच ले जा रही है.

बीजेपी का राजनीति करने का आरोप

वहीं भाजपा कांग्रेस के इन प्रदर्शनों को राजनीतिक स्टंट बता रही है. भाजपा नेताओं का कहना है कि जब एसआईटी जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई, अदालत ने दोष सिद्ध किया और तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, तो फिर इस मुद्दे को बार-बार उछालने का मकसद साफ तौर पर राजनीतिक है.

बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस के पास कोई ठोस जनहित का मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह अंकिता भंडारी को ढाल बनाकर 2027 के विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार करना चाहती है.

कांगेस तलाश रही अपनी जमीन 

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2017 में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस लगातार ऐसे मुद्दों की तलाश में है, जो भावनात्मक रूप से जनता से जुड़ सकें. महिला अपराध, सुरक्षा और न्याय जैसे विषय स्वाभाविक रूप से संवेदनशील हैं और इन्हें लेकर जनभावनाएं आसानी से भड़काई जा सकती हैं. ऐसे में अंकिता भंडारी हत्याकांड कांग्रेस के लिए एक प्रभावी सियासी हथियार बनता नजर आ रहा है.

हालांकि, इस सियासी घमासान के बीच यह सवाल भी अहम है कि क्या इस राजनीति से पीड़िता के परिवार को वास्तविक संतोष और न्याय मिल पा रहा है. सामाजिक संगठनों और आम लोगों का मानना है कि दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलना न्याय की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन किसी बेटी के नाम पर लगातार राजनीति होना दुर्भाग्यपूर्ण है.

अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में अंकिता भंडारी हत्याकांड न्याय और संवेदनशीलता का प्रतीक बनकर आगे बढ़ता है या फिर 2027 की सियासी बिसात का एक अहम मोहरा बनकर रह जाता है. जनता की नजरें अब राजनीति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर टिकी हैं.

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