'अज्ञात स्रोत से अर्जित आय अपराध की कमाई नहीं', इलाहाबाद हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
Allahabad High Court ने केवल यह आरोप कि किसी व्यक्ति के पास अज्ञात स्रोत से अर्जित संपत्ति है, अपने आप यह साबित नहीं करता कि वह पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध से अर्जित आय है.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि आय के अज्ञात स्रोत से अर्जित संपत्ति को केवल इसी आधार पर ‘धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002’ (पीएमएलए) के तहत अनुसूचित अपराध से अर्जित आय नहीं माना जा सकता.
न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने यह टिप्पणी पीएमएलए के तहत दर्ज धनशोधन के एक मामले के आरोपी संजय कुमार उर्फ संजय धीमान को जमानत देते हुए की. अदालत ने अपने आदेश में कहा, किसी व्यक्ति के पास आय के अज्ञात स्रोत से अर्जित संपत्ति हो सकती है, लेकिन केवल इसी आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि वह संपत्ति अनुसूचित अपराध से अर्जित की गई है.
उच्च न्यायालय ने कहा कि जमानत पर विचार के इस चरण में अभियोजन पक्ष यह पर्याप्त रूप से प्रदर्शित नहीं कर सका कि अनुसूचित अपराध से प्राप्त किसी विशिष्ट आपराधिक आय की पहचान की गई है. अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और मामले की जांच पूरी हो चुकी है.
अज्ञात स्रोत से अर्जित आय अपराध की कमाई नहीं
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिमाचल प्रदेश में कथित अवैध खनन से संबंधित कई प्राथमिकी के आधार पर धनशोधन की कार्यवाही शुरू की थी. ईडी के अनुसार, इन गतिविधियों से अर्जित धन का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में एक स्टोन क्रशर इकाई खरीदने में किया गया, जिस पर बाद में अवैध खनन से जुड़े लेन-देन में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया.
सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि उसका नाम हिमाचल प्रदेश में दर्ज प्राथमिकी में नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उन मामलों की जांच के बाद समापन रिपोर्ट दाखिल की गई, जिनमें से कई को सक्षम अदालतें स्वीकार भी कर चुकी हैं. अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी 18 नवंबर, 2024 से हिरासत में है, जबकि मुकदमे की सुनवाई अभी प्रभावी रूप से शुरू भी नहीं हुई है.
ईडी ने ज़मानत याचिका का किया विरोध
ईडी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने कथित तौर पर धनशोधन में भूमिका निभाई और उत्तर प्रदेश स्थित स्टोन क्रशर अवैध खनन से अर्जित धन से खरीदा गया था. हाई कोर्ट ने पीएमएलए के उस वैधानिक प्रावधान का परीक्षण किया, जिसके अनुसार धनशोधन का मामला तभी बनता है, जब उसमें अनुसूचित अपराध से प्राप्त आय शामिल हो.
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अदालत ने कहा कि अनुसूचित अपराध से अर्जित आय से आशय अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि से अर्जित संपत्ति से है. अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में अभियोजन पक्ष किसी ऐसी विशिष्ट संपत्ति की पहचान नहीं कर सका, जो कथित तौर पर अनुसूचित अपराध से जुड़ी आपराधिक गतिविधि से अर्जित हुई हो, विशेष रूप से आरोपी के संबंध में.
कोर्ट ने जमानत याचिका की स्वीकार
एक जुलाई के अपने आदेश में अदालत ने यह भी कहा कि केवल यह आरोप कि किसी व्यक्ति के पास अज्ञात स्रोत से अर्जित संपत्ति है, अपने आप यह साबित नहीं करता कि वह पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध से अर्जित आय है. उच्च न्यायालय ने आरोपी की हिरासत की अवधि, जांच पूरी हो जाने, सह-आरोपी को जमानत मिल जाने तथा जमानत के स्तर पर उपलब्ध सामग्री को ध्यान में रखते हुए उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली.
























