Udaipur: होलिका दहन में काम आने वाला यह पेड़ दिल और त्वचा की बीमारियों को मिनटों में करता है दूर, जानिए इसके फायदे
रंगों के त्यौहार होली के पहले होलिका दहन में जिस पेड़ की लकड़ी का उपयोग किया जाता है उसका औषधि रूप में काफी महत्व है. यहां जानें सेमल के पेड़ के औषधीय गुण क्या-क्या हैं?

देशभर में 17 मार्च को होलिका दहन और 18 मार्च को धुलेंडी (होली) मनाई जाएगी. रंगों के इस त्यौहार का कई मायनों में महत्व है. इस प्रकार होलिका दहन में जिस पेड़ की लकड़ी का उपयोग किया जाता है उसका भी औषधि रूप में काफी महत्व है. सेमल पेड़ की लकड़ी दिल सहित स्किन की बीमारियों की रोकथाम के काम में आता है.
उदयपुर शहर स्थित विद्याभवन रूरल इंस्टीट्यूट के बॉटनी विभाग प्रभारी डॉ अनिता जैन ने बताया इस पेड़ का कितना उपयोग है.
बॉटनी भाषा में इसको बोम्बेक्सिमा कहा जाता है और लोकल भाषा में सेमल का पेड़ कहा जाता है. सदियों से इस पेड़ की लकड़ी का उपयोग होलिका दहन में किया जा रहा है.
यह पेड़ औषधीय पॉइंट से बहुत खास है. पेड़ का हर भाग औषधीय उपयोग में आता है. इस पेड़ के जड़ का उपयोग दिल की बीमारियों के लिए काफी होता है और यह वैज्ञानिक तौर पर प्रूव भी किया जा चुका है. यह ब्लड प्रेशर को कम करने के काम में आता है.
उन्होंने आगे बताया कि पेड़ की ऊपरी सतह के हर हिस्से में स्पाइन यानी जो नुकीलापन होता है इनको पीसकर स्किन की समस्या दूर की जाती है. जैसे पिम्पल, डार्कनेस आदि. साथ ही स्किन की कई क्रीम में इसका उपयोग किया जाता है. पेड़ के फूलों की बात करें तो ये खून जैसा लाल होता है. इसका उपयोग आदिवासी क्षेत्र की महिलाएं मेनोरेजिया क्योर करने के काम में लेती है.
इस पेड़ का फ्रूट जब मेच्योर होता है तो उसमें रूई निकलती है तो तकिया सहित अन्य बनाने के काम में आता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस पेड़ में कई पक्षी घोसला बनाते हैं और फ्रूट इनके खाना में काम आता है. उन्होंने यह भी बताया कि सेमल जैसा दिखने वाला एक पेड़ हारसिंगा भी होलिका दहन के उपयोग में लिया जाने लगा है.
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Source: IOCL


























