जालोर: बवाल के बाद पंचायत ने बदला फैसला, महिलाओं के स्मार्टफोन बैन करने का प्रस्ताव वापिस
Jalore Smartphone Ban News: महिलाओं के स्मार्टफोन बंद करने का विवादित प्रस्ताव वापस लिया गया. समाज के पंच पटेलों ने कहा कि यह बच्चों पर मोबाइल गेमिंग के दुष्प्रभाव को देखते हुए महिलाओं का सुझाव था.

राजस्थान के जालोर जिले में महिलाओं के स्मार्टफोन बंद करने को लेकर विवादित प्रस्ताव को अब वापस ले लिया गया है. सुंधा पट्टी के 15 गांवों में चौधरी समाज की बैठक का वीडियो वायरल होने के बाद जब पूरा मामला सामने आया, तो समाज के पंच पटेलों ने इस प्रस्ताव को वापस लेने का फैसला किया है.
दरअसल, रविवार को हुई समाज की बैठक में महिलाओं के स्मार्टफोन बंद करने का प्रस्ताव रखा गया था. इस बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पूरे मामले की पड़ताल की गई. जब समाज के पांच पटेलन से बातचीत की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई निर्णय नहीं बल्कि महिलाओं की ओर से दिया गया सुझाव था.
समाज के पंच पटेल का कहना है कि यह प्रस्ताव इसलिए रखा गया था क्योंकि महिलाओं के पास मोबाइल होने से बच्चों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है. गेमिंग के साथ-साथ साइबर ठगी के मामलों में भी लगातार नुकसान झेलना पड़ता है. इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिए आने वाले कुछ अश्लील विज्ञापनों से भी बच्चों की मानसिकता पर असर पड़ता है.
समाज के पांच सुजानाराम ने बताया, "रविवार को हुई बैठक में समाज की महिलाओं की ओर से बच्चों पर पढ़ रहे मोबाइल के दुष्प्रभाव को लेकर दिए गए सुझाव के संबंध में समाज के समक्ष यह सुझाव रखा गया था, लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया था और न ही इसे लागू किया गया था. 26 जनवरी तक समाज के लोगों से राय मांगी जानी थी.
बच्चे पढ़ाई की जगह गेमिंग में व्यस्त
उन्होंने बताया कि आजकल स्मार्टफोन की वजह से बच्चे अधिक गेम खेल रहे हैं. भोजन खाने में भी आनाकानी करते हैं. स्कूल से घर आने के बाद होमवर्क नहीं करते, केवल मोबाइल लेकर बैठ जाते हैं. बच्चों को इतना ज्ञान नहीं होता, इसलिए कई बार साइबर ठगी के मामलों में भी नुकसान का सामना करना पड़ता है. पांच पटेलन ने स्पष्ट किया, "ऐसा नहीं है कि महिलाओं और बेटियों को मोबाइल बिल्कुल बंद करने के लिए कहा गया था. आज के जमाने में पढ़ाई करने वाली बच्चियों को मोबाइल रखना जरूरी होगा तो वह अपने घर में ही मोबाइल से पढ़ाई कर सकती हैं. पढ़ाई के लिए जरूर उपयोग कर सकती हैं, जिससे उनकी पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं हो.
'बच्चे दिनभर करते हैं मोबाइल का यूज'
समाज की महिलाओं ने बताया कि यह उनका सुझाव था कि बच्चे दिन भर पढ़ाई न करते हुए मोबाइल लेकर बैठ जाते हैं. इससे उनकी आंखों पर असर पड़ रहा है. दिनभर वीडियो गेमिंग से स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है. बच्चे स्कूल जाने में आनाकानी करते हैं और स्कूल से आने के बाद घर पर बैठकर मोबाइल देखते हैं, जिससे मासूम छोटे बच्चों पर दुष्प्रभाव पड़ता है. इसी वजह से गांव के बुजुर्गों को यह सुझाव दिया गया था, जिस पर समाज की बैठक में केवल प्रस्ताव और सुझाव रखा गया था. हालांकि अभी इसको लागू नहीं किया गया था, केवल समाज के सुझाव मांगे गए थे, जिसे 26 जनवरी 2026 को लागू किया जाना था.
अब प्रस्ताव पूरी तरह वापस
लेकिन अब इस पूरे मामले को लेकर समाज के पांच पटेलन ने बैठक बुलाकर इस निर्णय को वापस ले लिया है. समाज के समक्ष रखे गए इस सुझाव और प्रस्ताव को पूरी तरह से वापस ले लिया गया है. उन्होंने कहा कि समाज के समक्ष केवल प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन उसको अब वापस ले लिया गया है. यह केवल समाज हित के लिए सुझाव और प्रस्ताव था, न कि कोई निर्णय था.
Source: IOCL























