कौन सी वीडियो AI से बनाई गई है और कौन नहीं, कैसे पहचानें?
एआई के दौर में वीडियो बनाना बहुत आसान हाे गया. अब कुछ सेकंड में किसी के हावभाव को कॉपी करके नकली वीडियो बना सकते हैं. यही वजह है कि असली और नकली वीडियो में फर्क करना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है.

आज के डिजिटल समय में सोशल मीडिया हमारी रोजाना की लाइफ का जरूरी हिस्सा बन चुका है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर हर दिन हजारों वीडियो और फोटो वायरल होती है. इनमें कभी किसी नेता का चौंकाने वाला बयान दिखाई देता है तो कभी किसी सेलिब्रिटी का ऐसा वीडियो सामने आता है, जिस पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. वहीं बड़ी समस्या तब होती है, जब इनमें से कई वीडियो इतने असली लगते हैं कि लोग बिना सोचे समझे उन्हें सच मान लेते हैं.
दरअसल, एआई के बदलते दौर में वीडियो बनाना बहुत आसान हाे गया है. वहीं, अब कुछ सेकंड में किसी की शक्ल, आवाज और हावभाव को कॉपी करके नकली वीडियो तैयार किए जा सकते हैं. यही वजह है कि असली और नकली वीडियो के बीच फर्क करना आम लोगों के लिए मुश्किल हो गया है. हालांकि अगर आप थोड़ा ध्यान दें तो कुछ संकेतों से आप आसानी से पहचान सकते हैं कि कोई वीडियो एआई से बना है या असली है. ऐसे में चलिए अब हम आपको बताते हैं कि कौन सी वीडियो एआई से बनाई गई है और कौन नहीं कैसे पहचान सकते हैं.
चेहरे के एक्सप्रेशन पर रखें नजर
एआई कितना भी एडवांस क्यों न हो जाए, चेहरे के एक्सप्रेशन में अक्सर गड़बड़ी कर देता है. डीपफेक वीडियो में कई बार स्माइल असली जैसी नहीं लगती है, होंठों के मूवमेंट से मेल नहीं खाती है, आईब्रो और गाल अजीब तरह से मूव करते दिखाई देते हैं. इसके अलावा असली इंसान के चेहरे की मूवमेंट नैचुरल होती है, जबकि नकली वीडियो में थोड़ी गड़बड़ी नजर आती है.
लाइट और शैडो को करें चेक
असली वीडियो में रोशनी चेहरे कपड़ो और बैकग्राउंड पर नैचुरल तरीके से पड़ती है. वहीं एआई वीडियो में अक्सर चेहरे की लाइट बाकी फ्रेम से मेल नहीं खाती है. कई बार छाया एक दिशा से आती दिखाई देती है, जबकि रोशनी दूसरी दिशा से दिखाई देती है. अलग-अलग शॉट्स में चेहरे की चमक अचानक बदलना भी एआई वीडियो हो सकता है.
वीडियो को पॉज कर फ्रेम बाय फ्रेम चेक करें
अगर किसी वीडियो पर शक हो तो उसे रोककर ध्यान से देखें. एआई से बने वीडियो में कई बार चेहरे के किनारे धुंधले दिखाई देते हैं. बाल अजीब तरीके से बैकग्राउंड में घुल जाते हैं या फिर ग्लिच नजर आता है. कई बाद आंखों या दांतों के आकार में भी बदलाव दिखाई दे सकता है. अगर फ्रेम में चीजें एक जगह जैसी न लगें तो वीडियो नकली हो सकता है.
आवाज और टोन से भी चेक करें फर्क
डीपफेक वीडियो में आवाज अक्सर जरूरत से ज्यादा साफ या मशीन जैसी लगती है. कई बार आवाज में इमोशन की कमी होती है और टोन पूरे वीडियो में एक जैसा रहता है. वहीं असली इंसान की आवाज में उतार-चढ़ाव और इमोशन होते हैं, जबकि एआई जनरेटेड ऑडियो में यह कमी साफ महसूस होती है.
रिवर्स सर्च और फैक्ट चेक टूल्स की लें मदद
अगर कोई वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है तो उसके पीछे का सच जांचने के लिए गूगल लेंस या गूगल रिवर्स इमेज सर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है. वीडियो के स्क्रीनशॉट को अपलोड करके भी आप उसका सोर्स पता लगा सकते हैं. इसके अलावा InVID जैसे टूल्स भी वायरल वीडियो की सच्चाई जांचने में मदद करते हैं.
AI डिटेक्शन टूल्स की भी ले सकते हैं मदद
आज कई वेबसाइट और टूल्स ऐसे है जो फोटो, वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट को स्कैन करके बताते हैं कि वह एआई से बना है या नहीं. AI or Not, GPT Zero, Zero GPT, QuillBot Detector और ThecHive AI Detector जैसे टूल्स इसमें बहुत उपयोगी माने जाते हैं.
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Source: IOCL
























