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भैराणा धाम की जमीन अधिग्रहण पर सियासत गरमाई, संतों के समर्थन में उतरी कांग्रेस

Rajasthan News: राजस्थान के जयपुर में पिछले डेढ़ महीने से तपती धूप और गर्मी के बीच साधु संत आंदोलन कर रहे हैं. जयपुर ग्रामीण में संतों की तपस्थली भैराणा धाम और आसपास की जमीन को इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट

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  • संतों की मांग है कि सरकार अधिग्रहण का फैसला वापस ले, क्षेत्र को हरा-भरा बनाए.

राजस्थान के जयपुर में पिछले डेढ़ महीने से तपती धूप और गर्मी के बीच साधु संत आंदोलन कर रहे हैं. जयपुर ग्रामीण में संतों की तपस्थली भैराणा धाम और आसपास की जमीन को इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के लिए राजस्थान सरकार द्वारा अधिग्रहित किए जाने के विरोध में साधु संतों कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. इस बीच कांग्रेस ने भी राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार पर निशाना  साधा है.

कांग्रेस पार्टी के विधायक रफीक खान ने कहा कि सरकार राजस्थान के बाहर के बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए इस जमीन का अधिग्रहण कर रही है. उन्होंने कहा कि खुद को सनातनियों का हमदर्द बताने वाली पार्टी की सरकार साधु संतों को लेकर भी गंभीर नहीं है. 

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कांग्रेस ने राज्य सकार को घेरा

कांग्रेस नेता रफीक ने कहा कि साधु संत आसमान से बरस रही आग के बीच डेढ़ महीने से आंदोलन कर रहे हैं. सरकार ने डेढ़ महीने से उनकी बात नहीं सुनी है. यह सरकार हर मामले में जिद पर अड़ी रहती है और किसी की बात नहीं सुनती है. नमाने तरीके से काम करती है. उन्होंने आगे कहा कि सरकार को साधु संतों के साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए. कांग्रेस पार्टी संतो के साथ है. पार्टी जल्द ही बैठक कर इस मामले में अपनी रणनीति तय करेगी. 

विधायक रफीक खान का कहना है कि सरकार को आम जनता के हितों का ध्यान रखना चाहिए ना कि कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों का.  राजस्थान में कई शहरों में इसी तरीके से मनमाना अधिग्रहण किया जा रहा है. कांग्रेस पार्टी सरकार को कतई मनमानी नहीं करने देगी. 

 भैराणा धाम क्या है?

बता दें कि भैराणा धाम राजस्थान के जयपुर ग्रामीण और अजमेर जिले की सीमा पर स्थित है. यह संत दादू दयाल की कर्मभूमि और तपोस्थली मानी जाती है और लंबे समय से यहां दादू संप्रदाय के संत साधना करते रहे हैं. यहां स्थान हरे-भरे पेड़ों से भरा हुआ है. इसके साथ ही यहां बड़ी संख्या में पशु-पक्षी भी रहते थे. संतों का कहना है कि यह सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति और अध्यात्म का बड़ा केंद्र है.

भैराणा धाम को लेकर आंदोलन क्यों?

हाल ही में भजनलाल शर्मा सरकार ने इस इलाके को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करते हुए जमीन का अधिग्रहण किया था. इसके बाद जमीन को रीको यानी राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन को सौंप दिया. रीको ने करीब 550 बीघा जमीन पर औद्योगिक विकास की तैयारी शुरू कर दी.

संतों का आरोप है कि इंडस्ट्री लगाने के लिए बड़ी संख्या में हरे पेड़ काटे गए और जंगल को नुकसान पहुंचाया गया. इसी के खिलाफ संत समाज पिछले करीब डेढ़ महीने से आंदोलन कर रहा है. संतों की मांग है कि सरकार जमीन अधिग्रहण का फैसला वापस ले और पूरे इलाके को फिर से हरा-भरा बनाया जाए.  

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मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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