आदिवासियों की शहादत का प्रतीक मानगढ़ धाम फिर चर्चा में, राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग
Mangarh Dham National Status: भारत आदिवासी पार्टी के बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत और कांग्रेस नेता ताराचंद भगोरा ने राजस्थान स्थित मानगढ़ धाम को 'राष्ट्रीय स्मारक' का दर्जा देने की मांग की.

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गई है. भारत आदिवासी पार्टी के बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत और कांग्रेस के पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा ने अलग-अलग वीडियो संदेशों के जरिए केंद्र और राज्य सरकारों को घेरते हुए आदिवासी समाज की वर्षों पुरानी मांग को जल्द पूरा करने की अपील की है.
इससे पहले केंद्र सरकार द्वारा बांसवाड़ा, राजस्थान स्थित मानगढ़ धाम को 'राष्ट्रीय स्मारक' का दर्जा देने से इनकार कर दिया था, जिसपर आदिवासी समाज ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी.
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केंद्र सरकार ने मानगढ़ धाम को पुरातात्विक प्रामाणिकता और अखंडता न रखने का हवाला देकर अंग्रेजी-सामंती व्यवस्था के विरुद्ध शहीद हुए 1,500 से अधिक भील आदिवासियों के बलिदान का अपमान किया है।
— Rajkumar Roat (@roat_mla) August 4, 2026
इससे राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के आदिवासी समाज की भावनाओं को भी गहरी ठेस… pic.twitter.com/Y5BwyG0HH6
राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग दोहराया
भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक धार्मिक या ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के बलिदान, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें आदिवासी समाज की इस महत्वपूर्ण मांग पर गंभीरता नहीं दिखा रही हैं. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से बिना किसी देरी के मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग दोहराई.
कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा
वहीं, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा ने भी वीडियो जारी कर कहा कि वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री के मानगढ़ धाम दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्मारक बनाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज तक यह वादा पूरा नहीं हुआ. उन्होंने इसे आदिवासी समाज की भावनाओं के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि चुनावी वादों को अब धरातल पर उतारने का समय आ गया है.
मानगढ़ धाम है 'आदिवासियों का जलियांवाला बाग'
दोनों नेताओं ने कहा कि 17 नवंबर 1913 को गोविंद गुरु के नेतृत्व में मानगढ़ धाम पर हुए भीषण नरसंहार में हजारों भील आदिवासी शहीद हुए थे. इसी ऐतिहासिक बलिदान के कारण मानगढ़ धाम को 'आदिवासियों का जलियांवाला बाग' कहा जाता है. उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से शहीदों को राष्ट्रीय सम्मान मिलने के साथ-साथ आदिवासी अंचलों में पर्यटन, रोजगार और विकास को भी नई दिशा मिलेगी.
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग अब लगातार राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर जोर पकड़ रही है. भारत आदिवासी पार्टी और कांग्रेस दोनों इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं. हालांकि, इस विषय पर सरकार की ओर से फिलहाल कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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