राजस्थान में भ्रष्ट अधिकारियों पर बड़ा एक्शन, CM ने दी IAS-RPS समेत कई पर कार्रवाई की मंजूरी
Rajasthan News In Hindi: दो अधिकारियों समेत कई के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी है. इसके अलावा दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी चिकित्सा अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) एक अधिकारी, राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) के दो अधिकारियों समेत कई के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंगलवार को मंजूरी दी है. इसके अलावा, दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी चिकित्सा अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत विभागीय कार्रवाई की मंजूरी दी है. अधिकारी पर बिना नीलामी के मूल्यवान सरकारी भूमि के आवंटन में अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप है. हालांकि, बयान में अधिकारी का नाम नहीं बताया गया है.
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इन अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश
बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने जयपुर स्थित महिला बंदी सुधार गृह में तैनात उप अधीक्षक को निलंबित करने, एक आरपीएस अधिकारी के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा एक अन्य आरपीएस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद आगे की कार्रवाई को मंजूरी दी है.
जयपुर के महिला बंदी सुधार गृह में तैनात उप अधीक्षक सरोज बिश्नोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. साथ ही उनका मुख्यालय जयपुर से भरतपुर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है. बिश्नोई पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला बंदी को अपने साथ रखकर सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप कराया. उन पर यह भी आरोप है कि नियमों का उल्लंघन करते हुए धन लेकर बंदियों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराईं.
जोधपुर साइबर अपराध एसीपी के खिलाफ कार्रवाई को मंजूरी
मुख्यमंत्री ने जोधपुर में साइबर अपराध के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), साइबर क्राइम देरावर सिंह के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई को भी मंजूरी दी है. देरावर सिंह पर आरोप है कि डीग जिले के कामां थानाधिकारी के रूप में तैनाती के दौरान उन्होंने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती.
आरोप है कि एक हत्या के मामले की जांच के दौरान उन्होंने आठ आरोपियों में से केवल एक को दोषी मानते हुए सात अन्य आरोपियों को बचाने का प्रयास किया. एक अन्य मामले में मुख्यमंत्री ने आरपीएस अधिकारी लाभूराम बिश्नोई के खिलाफ विभागीय जांच रिपोर्ट को मंजूरी दी, जिसमें उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप सिद्ध पाए गए हैं.
लाभूराम पर आरोप है कि सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा थाना क्षेत्र में बनास नदी में अवैध बजरी खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उन्होंने उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी की. इसके कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी और स्वयं उनके सहित पुलिसकर्मियों की जान जोखिम में पड़ गई.
चिकित्सा अधिकारी को सेवा से किया बर्खास्त
दहेज उत्पीड़न के एक मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए और 406 के तहत दोषी पाए गए एक चिकित्सा अधिकारी को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. मुख्यमंत्री ने राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-16 के तहत राजस्थान सिविल सेवा के दो अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के आदेश भी दिए हैं.
इसके अलावा, एक सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा अधिकारी की पेंशन का 20 प्रतिशत हिस्सा स्थायी रूप से रोकने का निर्णय भी लिया गया है. बयान के अनुसार, सीसीए नियम-34 के तहत पुनर्विचार से जुड़े पांच मामलों में विभिन्न अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाएं खारिज करते हुए पहले से दी गई सजा को बरकरार रखा गया है.
मुकदमा चलाने की दी मंजूरी
मुख्यमंत्री ने आपराधिक मामलों में आरोपियों की मदद करने के बदले रिश्वत मांगने के आरोपी तत्कालीन वृत्ताधिकारी (सीओ) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है.
इसके अलावा, तत्कालीन भीलवाड़ा सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी राकेश खोईवाल के खिलाफ भी राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-16 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दी गई है.
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