अब भरतपुर के बांके बिहारी मंदिर से 3.65 लाख का हीरा गायब, देवस्थान विभाग पर लगे गंभीर आरोप
Bharatpur News In Hindi: राजस्थान के भरतपुर स्थित प्राचीन बांके बिहारी मंदिर में दान किए गए 3.65 लाख के हीरे की जगह कांच का टुकड़ा लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है.

राजस्थान में मंदिरों के चढ़ावे में घपले के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. बुटाटी धाम में 22 करोड़ के कथित घपले के बाद अब भरतपुर जिले के प्राचीन बांके बिहारी जी मंदिर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक महिला भक्त द्वारा भगवान को चढ़ाया गया 3 लाख 65 हजार रुपये का असली हीरा गायब होने का आरोप लगा है. दानदाता परिवार का दावा है कि देवस्थान विभाग ने मिलीभगत कर हीरे को गायब कर दिया है और उसकी जगह भगवान की मूर्ति पर कांच का टुकड़ा लगा दिया है.
दानदाता महिला की पुत्रवधु कृपाली (निवासी रंजीत नगर) ने बताया कि उनकी सास मीरा बंसल बांके बिहारी जी की परम भक्त हैं. उनका मन था कि बांके बिहारी जी की मूर्ति पर भी हीरा लगना चाहिए. इसके लिए उन्होंने पैसे जोड़कर दिल्ली के करौल बाग स्थित 'कुंदन लाल एंड संस' से 3.65 लाख रुपये में एक हीरा खरीदा था. दिसंबर 2024 में मीरा बंसल ने यह हीरा मंदिर के पुजारी मनोज भारद्वाज को सौंपकर दान कर दिया. हीरा दान करने के करीब 6 महीने बाद जब परिवार ने मूर्ति के दर्शन किए, तो वहां पहले जैसी हीरे की चमक नहीं थी. जांचने पर पता चला कि जो हीरा उन्होंने चढ़ाया था, वह मूर्ति पर नहीं था.
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रसीद नहीं दी, अब विभाग कह रहा- 'तुमने ही कांच चढ़ाया होगा'
परिवार का आरोप है कि हीरा दान करने के बाद उन्होंने देवस्थान विभाग से कई बार रजिस्ट्रेशन कराने के लिए रसीद (Slip) मांगी, लेकिन उन्हें रसीद नहीं दी गई.
मीरा बंसल के पास हीरे का असली बिल, उसका नंबर और सर्टिफिकेट (Certificate) आज भी मौजूद है. लेकिन जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो देवस्थान विभाग के अधिकारियों ने उल्टा उन्हें ही कटघरे में खड़ा कर दिया. अधिकारियों का कहना है कि "क्या पता तुमने ही बिहारी जी पर कांच का टुकड़ा चढ़ाया हो." परिवार का तर्क है कि अगर ऐसा था, तो दान लेते समय विभाग ने हीरे की जांच क्यों नहीं की?
सीएम भजनलाल शर्मा से की गई शिकायत
एक साल से जांच की मांग कर रहे परिवार ने इस मामले की शिकायत देवस्थान विभाग (उदयपुर), भरतपुर विधायक सुभाष गर्ग और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से भी की है. हालांकि, अभी तक पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन परिवार लगातार मूर्ति पर लगे 'कथित हीरे' की विशेषज्ञ जांच की मांग पर अड़ा है.
क्या कहना है देवस्थान विभाग का?
इस पूरे विवाद पर देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा का गोलमोल जवाब सामने आया है. आयुक्त ने कहा, "जब यह हीरा दान किया गया था, तब मैं कहीं और तैनात था. मुझे नहीं पता कि उस समय कौन अधिकारी या कर्मचारी था. अब वह हीरा है या कांच का टुकड़ा, यह मैं नहीं बता सकता. हमारे रिकॉर्ड के अनुसार हीरा 15 नवंबर को दान किया गया था (जबकि परिवार 10 दिसंबर बता रहा है). हीरे की जांच के लिए एक कमेटी बना दी गई है और उसे वेरिफाई किया जा रहा है."
इस घटना के बाद से देवस्थान विभाग की कार्यप्रणाली और मंदिरों में करोड़ों के चढ़ावे की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.























