'इस्तीफा मांगा जाना चाहिए और...', CEC ज्ञानेश कुमार पर उद्धव गुट का हमला
चुनाव आयोग विवाद पर सियासत तेजी से गरमाई हुई है. इस बीच कांग्रेस लगातार इस्तीफे की मांग कर रही है. वहीं उद्धव ठाकरे गुट ने भी मोर्चा खोल दिया है.

चुनाव आयोग को लेकर देशभर में विवाद गरमाया हुआ है. इस बीच चुनाव आयोग विवाद को लेकर कांग्रेस के विरोध पर शिवसेना उद्धव गुट ने भी विरोध जताया है. शिवसेना यूबीटी नेता आनंद दुबे ने कहा कि ऐसे में जिस संस्था पर इस तरह के आरोप लगे हैं, वह संस्था निष्पक्ष मानी जाती है."
उन्होंने आगे कहा, "अब जब तक वह संस्था सामने से नहीं कहेगी कि ऐसा कुछ गड़बड़ नहीं है. क्योंकि हम लोगों को अखबार, टीवी चैनलों पर विश्वास करना होता है. क्योंकि आप लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं अगर आपने कोई खबर छापी है तो जरूर उसमें सत्यता होने से इनकार नहीं किया जा सकता."
उन्होंने आगे कहा कि हमें लगता है यह चुनाव आयोग कहे तो बेहतर है और अगर नहीं कहता है तो इसको हम मौन स्वीकृति समझें. उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग जवाब नहीं दे रहा है तो क्या हम समझें कि वहां कुछ गड़बड़ है? क्या हम समझें कि एसआईआर में धांधली हुई है.? क्या हम समझें कि लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है? अगर हम यह समझें तो इस्तीफा मांगा जाना चाहिए और अगर आपको लगता है कि ऐसा कुछ नहीं है तो सामने से आकर बताइए कि ऐसा कुछ नहीं है." उन्होंने आगे कहा, "हम तो विपक्ष में हैं और हमारा काम है कि जब कोई तस्वीर साफ नहीं है तो आईने पर जो धूल लगी है उसको पोंछे और तस्वीर को साफ करें यह हमारा काम है."
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शिवसेना नेता ने चुनाव आयोग को लेकर और क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने कहा, "जरूरी यह है कि इस समय पूरे देश में एक अखबार की खबर छपी, जिसमें बताया गया कि जो चुनाव आयोग के तीन मुखिया है. जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी इनमें आपस में मतभेद हैं. पिछले 10 महीने में 14 बार इनकी आपस में नोकझोंक हुई. इनके बीच किसी न किसी विषय पर तकरार हुई है.
सीजेपी के मुंबई प्रोटेस्ट पर क्या बोले यूबीटी नेता?
सीजेपी ने 2 अक्तूबर को मुंबई में चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट का ऐलान किया है. इस प्रोटेस्ट को लेकर उद्धव गुट के नेता ने कहा, "लोकतंत्र में आंदोलन करना और धरना प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है. हम एक राजनीतिक पार्टी हैं. कौन क्या कर रहा है उसको हम नहीं जानते. वो अपने ढंग से काम करते हैं और हम अपने ढंग से काम करते हैं. हम सिर्फ एक बात जानते हैं कि अगर यह खबर सही है तो यह देश के लिए दुर्भाग्य है और अगर यह खबर झूठी है तो इसका खंडन चुनाव आयोग करे."
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग की प्रवक्ता क्यों बनती है. हमने तो सरकार से सवाल पूछा ही नहीं है. हमने चुनाव आयोग से सवाल पूछा है. जब पार्टियां तोड़नी होती हैं, चुनाव सिंबल फ्रीज करना होता है, किसी को नया नाम देना होता है तब आप सामने से आ जाते हैं. अब क्यों छिपे हुए हैं.
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