अजित पवार गुट में नया विवाद, NCP चीफ के पद से सुनेत्रा पवार की होगी विदाई?
NCP Sunetra Pawar: यह लीगल नोटिस 9 जुलाई की तारीख का है, जो एनसीपी की नेशनल प्रेसिडेंट सुनेत्रा पवार, वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल और पार्टी सेक्रेटरी बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है.

महाराष्ट्र में अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में नया विवाद छिड़ गया है. अब पार्टी में नेतृत्व को लेकर एक और बहस शुरू हो गई है. दरअसल, एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार, कार्कारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और पार्टी महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को एक लीगल नोटिस भेजा गया है, जिसके जरिए सुनेत्रा पवार के नेशनल प्रेसिडेंट के चुनाव को चुनौती दी गई है.
9 जुलाई की तारीख वाला यह नोटिस पार्टी के सीनियर नेता और नेशनल सेक्रेटरी सच्चिदानंद सिंह ने भेजा है और चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए हैं. नोटिस भेजते हुए सच्चिदानंद सिंह ने दोबारा चुनाव कराने की मांग की है.
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स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग
सच्चिदानंद सिंह ने 26 फरवरी को हुए एनसीपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को गैर-कानूनी बताया और इसे कैंसिल करने की मांग की है. उन्होंने डिमांड की है कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव अधिकारी की देखरेख में नए तरीके से चुनाव कराया जाए.
नोटिस में यह भी कहा गया है कि जब तक नया चुनाव नहीं हो जाता, तब तक नेशनल प्रेसिडेंट की नियुक्ति और ऑफिस-बेयरर्स की रिवाइज्ड लिस्ट को इनवैलिड माना जाए.
कौन हैं सच्चिदानंद सिंह?
सच्चिदानंद सिंह NCP (अजित पवार गुट) के झारखंड स्टेट प्रेसिडेंट. वे पिछले 15 साल से पार्टी से जुड़े हैं. साल 2023 के दिसंबर में कर्जत कन्वेंशन में उन्हें नेशनल सेक्रेटरी अपॉइंट किया गया था, जब अजित पवार नेशनल प्रेसिडेंट हुआ करते थे. इस साल 26 फरवरी को पार्टी की नेशनल एग्जीक्यूटिव में वे शामिल नहीं थे.
सच्चिदानंद सिंह ने उठाईं क्या आपत्तियां?
28 जनवरी, 2026 को अजित पवार की मौत के बाद, पार्टी ने 17 फरवरी 2026 को इलेक्शन कमीशन को एक बदला हुआ कॉन्स्टिट्यूशन जमा किया, जिसमें कहा गया कि वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल नए प्रेसिडेंट के चुने जाने तक नेशनल प्रेसिडेंट की शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे.
सच्चिदानंद सिंह का तर्क है कि बदले हुए कॉन्स्टिट्यूशन के तहत, सिर्फ प्रफुल्ल पटेल के पास नेशनल एग्जीक्यूटिव मीटिंग बुलाने का अधिकार था. उन्होंने सवाल उठाया है कि नेशनल जनरल सेक्रेटरी बृजमोहन श्रीवास्तव ने किस अधिकार से 26 फरवरी को मीटिंग बुलाई.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि 26 फरवरी की नेशनल एग्जीक्यूटिव मीटिंग के लिए मंज़ूरी मांगने के लिए 18 फरवरी को इलेक्शन कमीशन को भेजे गए लेटर में उस समय के नेशनल एग्जीक्यूटिव मेंबर्स की मंज़ूरी नहीं थी, जिससे सुनेत्रा पवार के नेशनल प्रेसिडेंट के तौर पर अपॉइंटमेंट की कानूनी वैधता पर सवाल उठते हैं.
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