Sambhajinagar News: वट सावित्री पूजा से पहले पत्नी पीड़ित पुरुषों ने की पीपल की उल्टी परिक्रमा, उठाई ये मांग
Sambhajinagar News In Hindi: वट सावित्री पूर्णिमा से पहले छत्रपति संभाजीनगर में पत्नी पीड़ित पुरुषों ने पीपल के पेड़ की 108 उल्टी परिक्रमा की. पुरुष आयोग के गठन, बराबर न्याय की मांग उठाई.

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में वट सावित्री पूर्णिमा से एक दिन पहले एक अनोखा कार्यक्रम देखने को मिला. यहां पत्नी पीड़ित आश्रम से जुड़े पुरुषों ने पीपल के पेड़ की पूजा की और उसके चारों ओर 108 उल्टी परिक्रमा की. इस कार्यक्रम में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे पुरुषों ने अपनी शादीशुदा जिंदगी में आने वाली परेशानियों को सामने रखा और सरकार से पुरुषों के लिए अलग व्यवस्था बनाने की मांग की.
पुरुष आयोग और अलग मैकेनिज्म की मांग
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि उनका मकसद किसी महिला का विरोध करना नहीं है, बल्कि उन पुरुषों की समस्याओं को सामने लाना है जो मानसिक, सामाजिक और कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं.
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उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से पुरुष आयोग बनाने, पुरुषों से जुड़े मामलों के लिए अलग मैकेनिज्म तैयार करने और झूठी शिकायतों के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई.
'पत्नी पीड़ित आश्रम' का दावा है कि वह पिछले 7 सालों से इस तरह का कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. जिस दिन महिलाएं वट सावित्री व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं, उसी मौके पर पत्नी से प्रताड़ित होने का दावा करने वाले पुरुष एक साथ जुटकर पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं और प्रतीकात्मक रूप से उल्टी परिक्रमा करते हैं. उनका कहना है कि यह उनके दर्द और संघर्ष को समाज के सामने रखने का तरीका है.
मेंटल हेल्थ और आत्महत्या के मुद्दे पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान कई पुरुषों ने अपने निजी अनुभव साझा किए. इस दौरान पारिवारिक विवाद, झूठे मामलों के आरोप, मानसिक तनाव और पुरुषों में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं पर भी चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि इन मुद्दों पर भी गंभीरता से बात करने और मदद की व्यवस्था बनाने की जरूरत है.
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आश्रम के अध्यक्ष एडवोकेट भरत फुलारे ने कहा कि उनका आंदोलन महिलाओं के खिलाफ नहीं है. उनका कहना है कि जिस तरह महिलाओं के अधिकारों और समस्याओं पर गंभीरता से काम होता है, उसी तरह पत्नी प्रताड़ित पुरुषों की समस्याओं को भी सुना जाना चाहिए. उन्होंने सरकार से पुरुषों के लिए अलग तंत्र बनाने और न्याय व्यवस्था में संतुलित नजरिया अपनाने की अपील की.
























