बेरोजगारी के बीच भर्ती फीस पर बढ़ा बोझ, JKPSC-JKSSB ने युवाओं से वसूले 49 करोड़
Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है. फिर भी सरकार ने दो वर्षों में JKPSC और JKSSB भर्तियों के जरिए युवाओं से करीब 49 करोड़ रुपये आवेदन शुल्क वसूला है.

एक ओर जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी बेरोजगारी दर से जूझ रहा है. वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं से भारी भरकम आवेदन शुल्क वसूले जाने का मामला सामने आया है. विधानसभा में दिए गए आधिकारिक जवाबों के मुताबिक, पिछले दो वित्तीय वर्षों में JKPSC और JKSSB के जरिए करीब 12 हजार पदों के लिए उम्मीदवारों से लगभग 49 करोड़ रुपये आवेदन शुल्क के रूप में जमा किए गए.
जिससे राज्य में रोजगार नीति और सरकारी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. यह चौंकाने वाला डेटा विधानसभा में दो सवालों के जवाब में सामने आया. एक सवाल PDP के पुलवामा के विधायक वहीद पारा ने उठाया था और दूसरा सत्तारूढ़ पार्टी के श्रीनगर के विधायक मुबारक गुल ने उठाया था.
बेरोजगारी से निपटाने के लिए उठाए जा रहे अहम कदम- सरकार
आधिकारिक जवाब के अनुसार, जम्मू और कश्मीर सरकार ने सोमवार को विधानसभा को बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में कुल बेरोजगारी दर फिलहाल 6.7 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 3.5 प्रतिशत से काफी ज्यादा है. सदन को यह भी बताया गया कि मिशन युवा के तहत रोजगार विभाग ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के सहयोग से पूरे केंद्र शासित प्रदेश में एक बेसलाइन सर्वे किया था. सर्वे में 18-60 साल की उम्र के 4.73 लाख लोगों की पहचान की गई, जिनमें से लगभग 46.8 प्रतिशत ने बताया कि वे काम नहीं कर रहे हैं लेकिन काम करने के इच्छुक हैं, जो रोजगार की चुनौतियों की गंभीरता को उजागर करता है, खासकर युवाओं के बीच है.
बेरोजगारी से निपटने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने कहा कि रोजगार पैदा करना, खासकर युवाओं के बीच, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. लेकिन J&K में नौकरी के उम्मीदवारों से जमा किए जा रहे पैसे ने बेरोजगारी का एक और पहलू उजागर किया है. क्योंकि JKPSC और JKSSB द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं के जरिए वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान उम्मीदवारों से कुल 48,88,39,650 रुपये जमा किए गए हैं.
फाइनेंशियल ईयर में इकट्ठे किए जा रहे कई रुपये
साल-वार दिए गए विवरण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान, JKPSC ने 7,39,69,400 रुपये जमा किए, जबकि JKSSB ने 7,09,83,950 रुपये जमा किए. जिससे उस साल कुल जमा राशि 14,49,53,350 रुपये हो गई. फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में, JKPSC ने 10,50,68,700 रुपये इकट्ठा किए, जबकि JKSSB ने 23,88,17,600 रुपये इकट्ठा किए. जिससे साल का कुल कलेक्शन 34,38,86,300 रुपये हो गया. दो सालों में कुल मिलाकर JKPSC ने 17,90,38,100 रुपये और JKSSB ने 30,98,01,550 रुपये इकट्ठा किए हैं.
अगल-अलग कैटेगरी में दिया गया विज्ञापन
भर्ती के नाम पर नौकरी के उम्मीदवारों से भारी रकम इकट्ठा की गई है, जबकि अलग-अलग कैटेगरी में सिर्फ 12 हजार से ज्यादा पदों के लिए विज्ञापन दिया गया है, जिसमें JKSSB ने 10,400 पदों और JKPSC ने इसी दौरान लगभग 1,750 पदों के लिए विज्ञापन दिया था. इन आंकड़ों पर चिंता जताते हुए पुलवामा के विधायक ने आरोप लगाया कि बेरोजगार युवाओं से इतनी बड़ी रकम इकट्ठा करना सरकार के उस वादे के खिलाफ है जिसमें कहा गया था कि सरकारी नौकरियों के लिए एप्लीकेशन फॉर्म मुफ्त किए जाएंगे.
उन्होंने कहा कि बेरोजगार उम्मीदवारों से फीस लेना ऐसे समय में वित्तीय बोझ है जब कई पढ़े-लिखे युवा पहले से ही बेरोजगारी और आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं. विधायक ने कहा कि यह सब सरकार के इस साफ वादे के बावजूद हो रहा है कि सभी एप्लीकेशन फॉर्म मुफ्त किए जाएंगे. बेरोजगार युवाओं से इतनी ज्यादा फीस लेना न सिर्फ सरकार की घोषित नीति के खिलाफ है, बल्कि यह बेरोजगार उम्मीदवारों का शोषण भी है.
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