DTC ड्राइवर्स की मांगों पर नहीं बनी बात, आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
डीटीसी कॉन्टैक्ट कर्मचारियों के बेसिक DA को लागू न करने का मामले में कर्मचारियों के यूनियन की तरफ से दिल्ली सरकार को पत्र लिखा गया है, जिसमें मांगे पूरी करने को कहा है और ऐसा ना होने पर चेतावनी दी है.

लंबे समय से लंबित चले आ रहे डीटीसी कॉन्टैक्ट कर्मचारियों के बेसिक DA को लागू न करने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है. बीते सात दिनों से आंदोलन कर रहे कॉन्टैक्ट कर्मचारियों ने इसे लेकर डीटीसी कॉन्टैक्ट कर्मचारियों में रोष का माहौल है और उन्होंने अब आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है.
कर्मचारियों के यूनियन की तरफ से इस संबंध में दिल्ली सरकार, परिवहन मंत्रालय और उपराज्यपाल से लेकर अन्य संबंधित विभागों को एक पत्र भी लिखा गया है, जिसमें बेसिक DA को लागू करने की मांग के साथ डीटीसी बस चला रहे प्राइवेट ड्राइवरों को तुरंत प्रभाव से डीटीसी के पैरोल पर किए जाने की मांग की है. अगर ऐसा नहीं होता है तो कर्मचारियों ने काम को पूरी तरह से बंद करके आंदोलन को बड़ा बनाने की चेतावनी दी है.
वहीं, अपनी मांगों को लेकर अड़े बस ऑपरेटरों के प्राइवेट ड्राइवरों की हड़ताल सातवें दिन सोमवार को भी जारी रही. हालांकि, मामले को संभालने के लिए DTC अधिकारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए ATI बनाए गए स्थायी कर्मचारियों और अपने संविदा कर्मचारियों को बसों का संचालन सामान्य करने की कोशिश की, बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो सका. तमाम कोशिशों के बाद भी केवल 30 से 35 फीसदी बसों का संचालन ही सम्भव हो पाया और ज्यादातर बसें डिपो में ही खड़ी रहीं.
घंटों इंतजार के बाद मिली बसें, उसमें भी भारी भीड़
सोमवार का दिन होने के कारण स्कूल, कॉलेज और दफ्तर जाने वाले लोग यात्रा के लिए बाहर निकले, जिस कारण बस स्टॉप के साथ-साथ मेट्रो स्टेशनों पर भी यात्रियों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिली. आनंद विहार, हसनपुर गांव, कड़कड़डूमा, निर्माण विहार, बुराड़ी, महरौली समेत कई क्षेत्रों में स्टैंड पर खड़े यात्री बसों का इंतजार करते रहे.
बड़ी संख्या में बसों का इंतजार कर थके यात्रियों ने ऑटो, ई-रिक्शा एवं मेट्रो से यात्रा करना बेहतर समझा. इस दौरान यात्रियों ने अपनी परेशानी बयां करते हुए कहा कि, हड़ताल के कारण सात दिन से परेशानी झेल रहे हैं. सरकार को हड़ताल खत्म कराने की दिशा में तुरंत पहल कर यात्रियों को राहत दिलानी चाहिए.
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मंत्री के साथ बैठक के बाद भी नहीं निकला नतीजा
मांग पूरी होने के बाद ही काम पर लौटने की चेतावनी दे चुके बस ऑपरेटरों और ड्राइवरों के प्रतिनिधियों की परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक बेनतीजा साबित हुई. हालांकि, बैठक में मेडिकल सुविधा, बीमा समेत अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई थी, लेकिन परिवहन मंत्री द्वारा वेतन बढ़ाने के मामले पर श्रम विभाग से विचार-विमर्श की बात ने मामले को बिगाड़ दिया और ड्राइवरों ने हड़ताल समाप्त करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.
जिसके बाद DTC ने अपने 2900 स्थायी ड्राइवरों और अन्य संविदा कर्मचारियों के साथ बसों का संचालन शुरू कराया. लेकिन बसों के अनुसार पर्याप्त संख्या में ड्राइवर उपलब्ध न होने की वजह से ज्यादातर बसें डिपो में ही खड़ी रही.
हड़ताल खत्म करने के दबाव के बाद शुरू हुआ विरोध
इस बीच हड़ताल खत्म करके काम पर काम पर लौटने के दबाव से कर्मचारियों में आक्रोश भर गया और उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया. तेहखंड डिपो के करीब 50 से ज्यादा निजी चालकों ने विरोध जताते हुए एक साथ इस्तीफा दे दिया. आरोप है कि, ऑपरेटरों ने धमकी दी कि अगर वेतन कम लग रहा तो वे इस्तीफा दे दें. जिसके आक्रोशित निजी ड्राइवरों ने यह कदम उठाया. इसके अलावा कई अन्य डिपो में भी ड्राइवरों ने इस्तीफे दिए हैं.
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने एबीपी की टीम से कहा कि, महज 862 रुपये की दिहाड़ी पर काम कर रहे ड्राइवरों का वेतन बढ़ाने में सरकार को दिक्कत हो रही है और उनके स्थान पर 80 हजार रुपये के स्थायी ड्राइवरों को तैनात किया जा रहा है. उनका आरोप है कि सरकार के इस कदम से संसाधनों के दुरुपयोग किये जाने का स्पष्ट प्रमाण मिल रहा है. क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो वे प्राइवेट कर्मचारियों के वेतन में इजाफा करने में परहेज नहीं करते और न ही उन्हें 80 हजार रुपये की तनख्वाह वाले ड्राइवरों की बसों पर तैनाती की जरूरत पड़ती.
जरूरत से काफी कम संख्या में है ड्राइवर
बताते चलें कि, वर्तमान में DTC और परिवहन विभाग के बेड़े में कुल 6630 बसें हैं. एक बस पर औसतन 2.5 ड्राइवरों की जरूरत होती है. इस तरह इन 6630 बसों के लिए हर दिन 16500 ड्राइवरों की जरूरत है.
जबकि अभी महज 7200 ड्राइवर हैं. ऐसे में हर दिन करीब नौ हजार से अधिक ड्राइवरों की जरूरत है और जब तक ड्राइवरों की संख्या जरूरत के अनुसार नहीं होती है तब तक बसों का संचालन सामान्य रूप से हो पाना सम्भव नहीं है. अब देखना होगा कि सरकार कब और किस फॉर्मूले से इस हड़ताल को समाप्त करवाती है.
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