एक्सप्लोरर

JNU छात्रसंघ चुनाव का कार्यक्रम जारी, प्रचार-प्रसार को लेकर सख्त नियम जारी, पढ़ें पूरी डिटेल

Delhi News: चुनाव समिति ने स्पष्ट किया है कि प्रचार के लिए केवल हाथ से बने पोस्टर और फोटोकॉपी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकेगा. प्रचार सामग्री समिति की स्वीकृति के बाद ही परिसर में लगाई जा सकेगी.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्र संघ चुनाव 2025-26 की तारीखों का ऐलान हो गया है. विश्वविद्यालय चुनाव समिति ने शुक्रवार को आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया कि मतदान 4 नवंबर को होगा, जबकि परिणाम 6 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. इस बार समिति ने प्रचार-प्रसार और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं, ताकि पूरा चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष माहौल में संपन्न हो सके.

चुनाव समिति ने स्पष्ट किया है कि प्रचार के लिए केवल हाथ से बने पोस्टर और फोटोकॉपी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकेगा. किसी भी प्रकार की प्रिंटेड, रंगीन या डिजिटल पोस्टर-बैनर की अनुमति नहीं दी जाएगी. सभी प्रचार सामग्री केवल समिति की स्वीकृति के बाद ही परिसर में लगाई जा सकेगी.

पोस्टर या पंपलेट लगाने के लिए उम्मीदवारों को 24 घंटे पहले चुनाव समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. इसके अलावा शाम सात बजे के बाद किसी भी प्रकार का प्रचार कार्य, जैसे पोस्टर लगाना या वितरण करना, वर्जित रहेगा.

चुनाव प्रचार में केवल हाथ से बने पोस्टर का इस्तेमाल

बता दें कि चुनाव समिति द्वारा जारी आचार संहिता में यह स्पष्ट किया गया है कि चुनाव प्रचार के दौरान केवल हाथ से बने पोस्टर और फोटोकॉपी की गई सामग्री का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसका कारण यह है कि यह नियम लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप है, जो देशभर में छात्र संघ चुनावों को नियंत्रित करती हैं. इन सिफारिशों का उद्देश्य चुनावी खर्च को कम रखना और विश्वविद्यालय या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या गंदगी से बचाना है.

सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर पर प्रतिबंध

निर्देशों के अनुसार, विश्वविद्यालय की इमारतों, दीवारों, सड़कों, बिजली के खंभों, बस स्टॉप और पेड़ों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. कोई भी छात्र विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा सकता. ऐसा करने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. 

कार्यक्रमों के लिए 24 घंटे पहले देनी होगी जानकारी

समिति ने यह भी कहा है कि सभी सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक या सार्वजनिक कार्यक्रमों की जानकारी आयोजन से 24 घंटे पहले देनी होगी ताकि समय और स्थान की अनुमति दी जा सके. इसके अलावा, प्रचार के दौरान लाउडस्पीकर, वाहनों या जानवरों के उपयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.

चुनाव प्रक्रिया के लिए भी समय-सीमा तय की गई है. मतदाता सूची का प्रारंभिक मसौदा अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में जारी किया जाएगा, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि के बाद उम्मीदवारों की सूची घोषित की जाएगी. 29 से 31 अक्टूबर के बीच स्कूल-स्तर पर जनरल बॉडी मीटिंग्स आयोजित होंगी और 1 नवंबर को विश्वविद्यालय स्तर की आम बैठक होगी. 

6 नवंबर को घोषित किये जाएंगे नतीजे

2 नवंबर को उम्मीदवारों के बीच पारंपरिक “प्रेसीडेंशियल डिबेट” आयोजित की जाएगी, जो जेएनयू चुनाव का सबसे अहम चरण माना जाता है. 3 नवंबर को ‘नो-कैंपेन डे’ रहेगा, जबकि अगले दिन यानी 4 नवंबर को मतदान सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक दो चरणों में होगा. मतगणना रात 9 बजे से शुरू होगी और परिणाम 6 नवंबर को घोषित किए जाएंगे.

हमेशा चर्चाओं में रही है जेएनयू की राजनीति

जेएनयू में छात्र राजनीति हमेशा से देशभर में चर्चा का विषय रही है. विश्वविद्यालय में विभिन्न विचारधाराओं से जुड़े संगठन सक्रिय रहते हैं और चुनावों के दौरान कैंपस में बहस-विचार विमर्श का माहौल बन जाता है. इस बार भी अलग-अलग छात्र संगठनों ने प्रचार की तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि, प्रशासन का ध्यान इस बात पर है कि प्रचार मर्यादित दायरे में रहे और परिसर की शैक्षणिक शांति भंग न हो.

चुनाव समिति द्वारा जारी किए गए नए नियम लिंगदोह समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य छात्र राजनीति को स्वच्छ, सृजनात्मक और लोकतांत्रिक बनाए रखना है. इन दिशा-निर्देशों के तहत उम्मीद की जा रही है कि जेएनयू छात्र संघ चुनाव 2025-26 बिना किसी विवाद और हिंसा के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होंगे.

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Delhi Weather: दिल्ली के कुछ हिस्सों में बरसे बादल, तापमान में गिरावट, 6 जून के मौसम को लेकर IMD का अपडेट
दिल्ली के कुछ हिस्सों में बरसे बादल, तापमान में गिरावट, 6 जून के मौसम को लेकर IMD का अपडेट
दिल्ली अग्निकांड के आरोपी की क्राइम कुंडली, बांग्लादेशी महिलाओं के बनवाए थे फर्जी दस्तावेज
दिल्ली अग्निकांड के आरोपी की क्राइम कुंडली, बांग्लादेशी महिलाओं के बनवाए थे फर्जी दस्तावेज
धर्मेंद प्रधान के इस्तीफे की उठी मांग तो भड़कीं स्वाति मालिवाल, कहा- दिग्विजय सिंह अच्छे से जानते हैं...
धर्मेंद प्रधान के इस्तीफे की उठी मांग तो भड़कीं स्वाति मालिवाल, कहा- दिग्विजय सिंह अच्छे से जानते हैं...
अन्नामलाई के BJP छोड़ने पर संजय सिंह का बड़ा बयान, 'सभी को लगता है कि वो विजय की तरह...'
अन्नामलाई के BJP छोड़ने पर संजय सिंह का बड़ा बयान, 'सभी को लगता है कि वो विजय की तरह...'

वीडियोज

Sansani: ब्रेकअप का खूनी दरिंदा ! | Mohali Punjab | Crime News
Khan Sir Controversy: 'गोली कांड' में खान सर फंस गए! | Roshan Anand | Coaching Firing | Bihar News
Khan Sir Controversy | Janhit: कोचिंग वाले लड़ रहे...पढ़ने वाले 'मर' रहे! | Coaching Firing | Bihar
Bharat Ki Baat: कमलेश बिंद एनकाउंटर पर महा-संग्राम! | Vineet Rai | Encounter News | UP News
India GDP Growth | Sandeep Chaudhary: GDP ग्रोथ का सबसे सटीक विश्लेषण | RBI | Economy | PM Modi

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
क्या पार्टी पर अपना कंट्रोल खोते जा रही हैं ममता बनर्जी? 30 साल बाद अधर में TMC का राजनीतिक भविष्य 
क्या पार्टी पर कंट्रोल खोते जा रही हैं ममता बनर्जी? 30 साल बाद अधर में TMC का राजनीतिक भविष्य 
खान सर के लोकेशन का पता नहीं! पुलिस कर सकती है रेड, कभी भी गिरफ्तारी संभव
खान सर के लोकेशन का पता नहीं! पुलिस कर सकती है रेड, कभी भी गिरफ्तारी संभव
चीफ जस्टिस के लंदन प्रोग्राम में 'असहिष्णुता' पर सवाल से गरमाया माहौल, कॉकरोच जनता पार्टी ने शेयर किया Video
सीजेआई के UK प्रोग्राम में 'असहिष्णुता' पर सवाल से गरमाया माहौल, कॉकरोच जनता पार्टी ने शेयर किया Video
हेलमेट पर लगी बॉल तो खिलाड़ी को याद आई 'वर्जिनिटी', अक्षर पटेल ने बताया मजेदार किस्सा
हेलमेट पर लगी बॉल तो खिलाड़ी को याद आई 'वर्जिनिटी', अक्षर पटेल ने बताया मजेदार किस्सा
अमिताभ बच्चन के पास है कुल कितने बीघा जमीन? अयोध्या, अलीबाग और गुजरात तक फैली है अरबों की प्रॉपर्टी
अमिताभ बच्चन के पास है कुल कितने बीघा जमीन? अयोध्या, अलीबाग और गुजरात तक फैली है अरबों की प्रॉपर्टी
दुनिया में भारत का वर्चस्व, चीन बड़ा खिलाड़ी, पुतिन ने ट्रंप को चेताया- तेल की कीमतें बढ़ी तो US की बादशाहत...
दुनिया में भारत का वर्चस्व, चीन बड़ा खिलाड़ी, पुतिन ने ट्रंप को चेताया- तेल की कीमतें बढ़ी तो US की बादशाहत...
Explained: पेपर लीक का लंबा इतिहास लेकिन सजा सीमित क्यों? कैसे कुछ ही आरोपी पहुंचते कटघरे और ज्यादातर बच निकलते
पेपर लीक का लंबा इतिहास लेकिन सजा सीमित क्यों? कैसे कुछ आरोपी पहुंचते कटघरे और ज्यादातर बच जाते
भारत में कितना है गेहूं का स्टॉक, जानें कितने साल तक ना उगाया जाए तो चल जाएगा काम?
भारत में कितना है गेहूं का स्टॉक, जानें कितने साल तक ना उगाया जाए तो चल जाएगा काम?
Embed widget