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घरेलू एयरलाइंस में कितने पायलट, अब विदेशी पायलटों को भारत में कैसे मिल सकती है नौकरी?

देश की छह घरेलू एयरलाइंस के पास कुल 13,989 पायलट हैं. जिनमें सबसे ज्यादा पायलट एयर इंडिया ग्रुप और इंडिगो के पास हैं. बढ़ती फ्लीट और विशेष ट्रेनिंग की जरूरत के कारण विदेशी पायलटों की नियुक्ति जारी है.

देश में एयरलाइंस सेक्टर इन दिनों लगातार सुर्खियों में है, खासकर इंडिगो में आए ऑपरेशन संकट के बाद. इसी बीच नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने संसद में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए यह बताया कि भारत की छह प्रमुख घरेलू एयरलाइंस के पास कुल 13,989 पायलट मौजूद हैं. यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय एविएशन सेक्टर कितना बड़ा और तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन साथ ही, एक बड़ा सवाल यह भी उठता है जब भारत में इतने पायलट हैं तो फिर विदेशी पायलटों की जरूरत क्यों पड़ रही है?

कितनी एयरलाइंस के पास कितने पायलट?

मंत्री मोहोल ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि एयर इंडिया और उसकी लो-कॉस्ट कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस के पास क्रमशः 6,350 और 1,592 पायलट तैनात हैं. वहीं देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो के पास 5,085 कॉकपिट क्रू हैं.

इसके अलावा, अकासा एयर में 466 पायलट, स्पाइसजेट में 385 पायलट और सरकारी स्वामित्व वाली एलायंस एयर में 111 पायलट कार्यरत हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और इसके साथ ही पायलटों की मांग भी बढ़ रही है.

विदेशी पायलटों की जरूरत क्यों पड़ती है?

देश में करीब 14 हजार पायलट होने के बावजूद एयरलाइंस विदेशी पायलटों को नियुक्त कर रही हैं. इसकी वजह खुद मंत्री मोहोल ने स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि फ्लीट लगातार बढ़ रही है और एयरलाइंस को समय पर संचालन के लिए विशेष ट्रेनिंग वाले ‘रेटेड पायलट’ चाहिए होते हैं. कई नए एयरक्राफ्ट ऐसे होते हैं जिन्हें उड़ाने के लिए विशेष प्रकार की ट्रेनिंग जरूरी होती है और यह ट्रेनिंग तुरंत हर पायलट को नहीं मिल पाती. ऐसे में एयरलाइंस अंतरराष्ट्रीय पायलटों को अस्थायी आधार पर नियुक्त करती हैं ताकि उड़ानों में किसी तरह की देरी या कैंसिलेशन न हो और संचालन सुचारू रूप से चलता रहे.

FTOs लगातार बढ़ा रहे हैं ट्रेनिंग क्षमता

मंत्री ने बताया कि देश में फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (FTOs) का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है. DGCA ने नवंबर तक FTOs को 61 नए ट्रेनिंग विमानों को शामिल करने की अनुमति दी है, जिससे ट्रेनिंग क्षमता बढ़ी है. उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में दो और नए FTOs को मंजूरी दी गई है.

वर्तमान में 40 FTOs देशभर के 62 स्थानों पर सक्रिय हैं और लगातार अपनी ट्रेनिंग सुविधाओं को बेहतर बना रहे हैं. इससे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारत को विदेशी पायलटों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

क्या मंत्रालय FTOs में दखल देता है?

मुरलीधर मोहोल ने साफ कहा कि फ्लाइंग ट्रेनिंग की सुविधाएं और उनका विस्तार पूरी तरह बाजार पर निर्भर है. FTOs अपने व्यावसायिक फैसलों के आधार पर कितने ट्रेनिंग विमान जोड़ेंगे या कितने प्रशिक्षक रखेंगे यह उनका खुद का निर्णय होता है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय इसमें सीधा हस्तक्षेप नहीं करता.

तो क्या विदेशी पायलटों के लिए भारत में और अवसर खुलेंगे?

वर्तमान स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि जब तक भारत में फ्लीट तेजी से बढ़ रही है और नए एयरक्राफ्ट शामिल हो रहे हैं, तब तक विदेशी पायलटों की मांग बनी रहेगी. हालांकि भारत में FTOs की क्षमता और पायलट ट्रेनिंग में सुधार के साथ आने वाले वर्षों में यह निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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