Bihar News: सिलेंडर की किल्लत और कालाबाजारी का डबल वार, बड़े शहर छोड़ लौट रहे प्रवासी मजदूर
Bihar LPG Crisis News: एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और कालाबाजारी से परेशान प्रवासी मजदूर अब पटना और अपने गांव लौट रहे हैं. महंगे गैस दाम, बंद काम और बढ़ती मुश्किलों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं.

एलपीजी सिलेंडर की किल्लत अब आम लोगों के साथ-साथ पटना के प्रवासी मजदूरों पर भी भारी पड़ रही है. मुंबई जैसे बड़े शहर में काम करने वाले मजदूर अब गैस की समस्या से परेशान होकर बिहार में अपने-अपने गांव लौटने लगे हैं. पटना पहुंचे कई मजदूरों ने बताया कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि रोजमर्रा का खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है.
मजदूरों का कहना है कि शुरुआत में उन्होंने लकड़ी पर खाना बनाकर काम चलाने की कोशिश की, लेकिन अब वह भी संभव नहीं हो पा रहा. लगातार बढ़ती दिक्कतों के चलते उन्हें गांव लौटने का फैसला लेना पड़ा. उनका कहना है कि जब तक गैस की स्थिति ठीक नहीं होती, वे वापस शहर नहीं जाएंगे.
ब्लैक में महंगे दामों पर मिल रहा सिलेंडर
मुंबई में मजदूरी करने वाले निराहुल हक ने बताया कि छोटे सिलेंडर की टंकी भरवाने के लिए 2000 रुपये तक मांगे जा रहे हैं. वहीं एक अन्य मजदूर जाकिर ने कहा कि कहीं-कहीं तो 5 से 6 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं. मजदूरों का आरोप है कि गैस की कमी नहीं है, बल्कि कुछ लोग कालाबाजारी कर रहे हैं.
कई मजदूर कंस्ट्रक्शन और बिल्डिंग लाइन में काम करते थे, लेकिन फिलहाल काम भी ठप पड़ा है. ऐसे में कमाई बंद हो गई है और ऊपर से गैस जैसी जरूरी चीज भी नहीं मिल रही. कटिहार जा रहे जुनाइल मोहम्मद ने बताया कि बिना गैस के रहना मुश्किल हो गया था, इसलिए गांव लौटना ही बेहतर लगा.
गांव में ही रहने का बना मन
बायसी के रहने वाले करीम और बुद्धा सेठ ने बताया कि किसी तरह लकड़ी पर खाना बनाकर गुजारा कर रहे थे, लेकिन अब हालात बिगड़ते जा रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक सिलेंडर मिलना शुरू नहीं होगा, वे गांव में ही रहेंगे.
मुंबई में काम करने वाले असम के मजदूरों ने भी यही दर्द बयां किया. उनका कहना है कि सिलेंडर ब्लैक में महंगे दाम पर मिल रहा था, जिससे खर्च और बढ़ गया. काम बंद है, कमाई नहीं हो रही और सरकार से भी कोई मदद नहीं मिली है. ऐसे में उन्होंने घर लौटने का फैसला किया.
गैस संकट ने मजदूरों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है. रोज कमाकर खाने वाले इन लोगों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल बन गई है. अब सभी को इंतजार है कि हालात जल्द सुधरें ताकि वे दोबारा शहर लौटकर अपना काम शुरू कर सकें.
Source: IOCL


























