बिना रेलिंग की छत, पांच कमरों में 663 बच्चे, कैसे पढ़ेगा बिहार?
जमुई के झाझा स्थित स्कूल में 663 बच्चों के लिए सिर्फ पांच कमरे हैं. जगह की कमी से बच्चे बरामदे और बिना रेलिंग वाली छत पर पढ़ने को मजबूर हैं. इससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं.

जमुई के झाझा प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय धोरिकवा में बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. बिहार सरकार बेहतर शिक्षा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार दावे करती है, लेकिन इस स्कूल की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाती है. स्कूल में 663 बच्चों का नामांकन है, जबकि पढ़ाई के लिए महज पांच कमरे उपलब्ध हैं.
स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले कक्षाओं की भारी कमी है. जगह नहीं होने के कारण कई बच्चों को बरामदे में जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जाता है. इससे जहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं स्कूल की आधारभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
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बिना रेलिंग की छत पर बच्चों की क्लास
सबसे गंभीर स्थिति स्कूल की छत पर नजर आती है. करीब दो दर्जन से अधिक बच्चों को बिना रेलिंग वाली छत पर एस्बेस्टस शेड के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. छत के खुले हिस्से में डेस्क-बेंच लगाकर कक्षा संचालित की जा रही है. छत के किनारे सुरक्षा के लिए रेलिंग तक नहीं है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है.
बच्चों ने बताया- छत पर लगता है डर
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का कहना है कि खुले में और बिना रेलिंग वाली छत पर बैठकर पढ़ाई करने में डर लगता है. बच्चों के लिए लगाए गए कुछ डेस्क और बेंच भी क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं. छात्राओं ने भी छत और बालकनी में रेलिंग नहीं होने से दुर्घटना की आशंका जताई है.
प्रधानाध्यापक बोले- विभाग को दी गई जानकारी
स्कूल के प्रधानाध्यापक ने कमरों की कमी की बात स्वीकार करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी दी गई है. उनके मुताबिक विभाग की ओर से अतिरिक्त कमरे और रेलिंग की व्यवस्था कराने का आश्वासन मिला है. सवाल यह है कि जब तक यह व्यवस्था नहीं होती, तब तक बच्चों को असुरक्षित छत पर बैठाकर पढ़ाना कितना सुरक्षित है? शिक्षा व्यवस्था के बड़े दावों के बीच जमुई के इस स्कूल की स्थिति सरकारी इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
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