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'मेरा बेटा कोमा में था...', राम सूरत राय के खिलाफ चुनाव में उतरेंगे ये पूर्व अधिकारी, जानें पूरी कहानी

Former DCLR Aditya Shivkumar: पूर्व डीसीएलआर आदित्य शिव कुमार ने ऐसी जानकारी दी है, जिसे जानकार न सिर्फ रोंगटे खड़े हो जाएंगे, बल्कि सिस्टम पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा होगा.

बिहार विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ चुका है, एनडीए और इंडिया गठबंधन के अलावा कई छोटे दल चुनाव मैदान में आ रहे हैं तो कई आईएएस, आईपीएस भी चुनाव में अपना किस्मत आजमाने का दावा कर रहे हैं. इसी कड़ी में एक DCLR ( भूमि उप समाहर्ता) भी नौकरी से इस्तीफा देकर चुनाव मैदान में आ गए हैं.

पूरे परिवार के साथ प्रताड़ित हुए थे पूर्व अधिकारी

हालांकि इनका मकसद चुनाव जीतना नहीं बल्कि उस पूर्व मंत्री को हराना है, जिसके कारण वह अपने पूरे परिवार के साथ प्रताड़ित हुए थे. अब इस पूर्व अधिकारी ने मुजफ्फरपुर के औराई विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कमर कस ली है. बिहार लोक सेवा आयोग से चयनित आदित्य शिवकुमार जो पहले 2021 में अंचल अधिकारी के पद पर कांटी अंचल कार्यालय में थे.  

उस वक्त के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री  राम सूरत राय से इतना ज्यादा प्रताड़ित हुए थे कि उस वक्त ही उन्होंने संकल्प ले लिया था कि 2025  रामसूरत राय को औराई विधानसभा से हराना है. इसके लिए 20 साल बची नौकरी को ठुकरा कर चुनाव मैदान में आ गए हैं.  

एबीपी न्यूज से बात करते हुए आदित्य शिव कुमार ने ऐसी जानकारी दी जिसे जानकार न सिर्फ रोंगटे खड़े हो जाएंगे, बल्कि अब सिस्टम पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो रहा है. आदित्य शिवकुमार ने बताया कि वर्ष 2021 में हम कांटी अंचल कार्यालय में सीओ के पद पर थे. उसे वक्त मेरा बेटे की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई और उसकी गंभीर बीमारी के कारण हम अच्छे ढंग से काम नहीं कर रहे थे. बराबर बिहार के बाहर उसे इलाज कराने के लिए ले जाना पड़ रहा था.

"मेरा बेटा कोमा में था और मुझे लगा था कि अब नहीं रहेगा. उस वक्त मेरा ट्रांसफर नेपाल के बॉर्डर के पास कर दिया गया. मेरे बच्चे की बीमारी की खबर पूरे अंचल की जनता को मिली और ट्रांसफर की जानकरी सभी लोग जान गए थे. जिसके बाद वहां की जनता ने धरना प्रदर्शन और ट्रांसफर रोकने की बात के लिए आंदोलन भी किए थे. उस वक्त वहां के जिला अध्यक्ष वह भी मेरे साथ खड़े हो गए थे, लेकिन इन्होंने ट्रांसफर नहीं रोका.

उन्होंने बताया कि हम तो पूरी तरह मायूस थे. मेरी नजर नौकरी पर नहीं अपने बेटे पर थी, लेकिन नौकरी भी बचाना था इसके लिए मैं पटना में जाकर मंत्री रामसूरत राय से मिला और अपने बेटे की तबीयत के बारे में भी बताया. तो उन्होंने कहा जहां ट्रांसफर हुआ है वहीं होगा अगर रोकना है तो 55 लाख रुपया दो. उनकी आवाज सुनकर मैं स्तब्ध रह गया था.

अपने बेटे की बीमारी में ऐसे ही मैं तंग हो गया था उस पर 55 लाख की डिमांड सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे. मैने कहा कि नहीं हो पाएगा सर मैं सारा पैसा तो मेरे बेटे की बीमारी में जा रहा है, लेकिन उन्होंने एक भी नहीं सुनी. हम अपने बेटे के इलाज में 2022 तक लगे रहे. उसी वक्त हमने ठान लिया था कि इस मंत्री का जवाब हम इस चुनाव में देंगे.

आदित्य कुमार ने कहा कि उस वक्त ही मैंने इस्तीफा देने के लिए लेटर दे दिया था, लेकिन इतना ज्यादा बवाल हुआ था कि मेरा इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ. उस वक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  उनके रेगुलर ट्रांसफर पोस्टिंग पर रोक लगा दी थी, लेकिन मेरे जेहन में सिर्फ एक ही बात थी कि जिसके कारण मैं बर्बाद हुआ हूं उसे मैं नहीं छोडूंगा. उन्होंने बताया कि आज भी मेरा बच्चा पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है. आम नॉर्मल व्यक्ति की तरह वह नहीं है और उसकी वजह है रामसूरत राय.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ में बोले

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि औराई विधानसभा की जनता के लिए भी सोच रहा हूं कि वहां जितने मुद्दे हैं और जितनी समस्या है आज भी चेचरी पुल से लोग आते जाते हैं. जनता के लिए उन समस्याओं को दूर करूंगा और ऐसे भ्रष्ट जनप्रतिनिधि से जनता को निजात दिलाऊंगा. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ की लेकिन कहा कि 44 विभाग हैं. तो 44 मुख्यमंत्री नहीं हो सकते हैं. ऐसे विधायक को हटाने के लिए हम कुछ भी कर सकते हैं.

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