Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या पर बगहा में त्रिवेणी संगम पर उमड़े भक्त, 3-3 KM तक लगी वाहनों की कतार
Mauni Amavasya 2025: ब्रह्म मुहूर्त से ही नारायणी गंडक के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा. माना जा रहा था कि अधिक भीड़ होगी. इसको देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट था.

Mauni Amavasya Snan: मौनी अमावस्या पर बिहार के वाल्मीकि नगर स्थित त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं बुधवार (29 जनवरी) को सुबह से उमड़ पड़े. नजारा देखकर पता ही नहीं चल रहा था कि ये बिहार का बगहा है या फिर लोग महाकुंभ (यूपी) पहुंच गए हैं. तीन-तीन किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार देखने को मिली. बुधवार तड़के से ही लोग मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए पहुंचने लगे थे.
ब्रह्म मुहूर्त से ही नारायणी गंडक के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा. श्रद्धालुओं ने स्नान के दौरान भगवान विष्णु, शिव और सूर्य देव की आराधना की. दान-पुण्य किया. वाल्मीकि नगर से सटे होने के कारण नेपाल से भी श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची थी. उत्तर प्रदेश से सटे जो इलाके हैं वहां से भी लोग वाल्मीकि नगर पहुंचकर स्नान करते हैं.

पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल के साथ मेडिकल टीम भी तैनात
मौनी अमावस्या पर पहले से ही माना जा रहा था कि अधिक भीड़ होगी. इसको देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट था. भगदड़ और या कोई अप्रिय घटना ना घटे इसको लेकर सुरक्षा-व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे. स्नान घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल के जवान और मेडिकल टीम की तैनाती की गई है. श्रद्धालुओं की अधिक संख्या के कारण वाल्मीकि नगर और बगहा में तीन-तीन किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं.
मौनी अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है. आत्मा शुद्ध होती है. वाल्मीकि नगर स्थित त्रिवेणी संगम गंडक, तमसा और सोनभद्र नदियों के संगम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है. उत्तर भारत का दूसरा सबसे बड़ा संगम स्थल माना जाता है. प्रयागराज के बाद इस स्थान का विशेष धार्मिक महत्व है. प्रत्येक वर्ष बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के विभिन्न इलाकों से लाखों श्रद्धालु यहां स्नान-दान करने पहुंचते हैं.
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Source: IOCL
























