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Europe vs US: क्या पूरा यूरोप मिलकर कर पाएगा ग्रीनलैंड की सुरक्षा, अमेरिका की तुलना में कितनी है ताकत?

Europe vs US: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड के कंट्रोल को लेकर तनाव बढ़ चुका है. आइए जानते हैं क्या यूरोप अमेरिका से ग्रीनलैंड की सुरक्षा कर पाएगा या नहीं.

Europe vs US: ग्रीनलैंड को लेकर तनाव बढ़ चुका है. दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन यूरोपीय देशों पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव डालने की धमकी दी है जो ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का विरोध करते हैं.  1 फरवरी से 10% टैरिफ और जून तक इसे बढ़ाकर 25% करने की चेतावनी दी गई है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या यूरोप मिलकर ग्रीनलैंड की रक्षा कर सकता है और आखिर उसकी ताकत असल में संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में कितनी है.

यूरोप अमेरिका की तुलना में कितना ताकतवर है 

आपको बता दें कि यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में से 23 नाटो के सदस्य भी हैं. इससे उन्हें सामूहिक रक्षा ढांचा मिलता है. लेकिन अगर सैन्य खर्च और क्षमता की बात करें तो इसमें एक बड़ा अंतर है. नाटो के कुल सैन्य खर्च का लगभग 42% हिस्सा अकेले अमेरिका वहन करता है. वहीं यूरोपीय संघ के पास सक्रिय सैन्यकर्मी रूस से ज्यादा हैं, लेकिन इसकी अपनी कोई स्थायी एकीकृत सैन्य कमान संरचना नहीं है जैसे नाटो के पास है.

यूरोप की सैन्य प्रतिक्रिया 

अमेरिकी दबाव के जवाब में यूरोपीय देशों ने हल्की ताकत दिखाने के बजाय एकता और तैयारी दिखाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है. फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे और स्वीडन ने ग्रीनलैंड में सीमित संख्या में सैनिकों की तैनाती शुरू कर दी है. फ्रांस ने पहाड़ी सैनिक भेजे हैं, जर्मनी ने टोही इकाइयां और डेनमार्क ने अपनी आर्कटिक सेना के स्थायी विस्तार की घोषणा कर दी है. 

आर्थिक युद्ध 

यूरोप आर्थिक शक्ति के मामले में सच में संयुक्त राज्य अमेरिका को टक्कर देता है. यूरोपीय संघ ट्रंप की धमकियों के जवाब में अमेरिकी सामानों पर जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं. खास व्यापार रियायतों को खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है. इसमें अमेरिकी लॉबस्टर पर शून्य शुल्क आयात शामिल है और यूरोपीय संघ के 2023 एंटी कोर्सियन इंस्ट्रूमेंट को सक्रिय करने पर भी विचार हो रहा है. यह मेकैनिज्म यूरोपीय संघ को टैरिफ लगाने, व्यापार प्रतिबंधित करने, निवेश रोकने और आर्थिक ब्लैकमेल का इस्तेमाल करने वाले देशों की कंपनियों को दंडित करने की अनुमति देता है.

अमेरिकी टैक दिग्गजों पर दबाव 

एक और शक्तिशाली कदम अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के खिलाफ रेगुलेटरी कर्रवाई है. यूरोप के पास पहले से ही सख्त डिजिटल और प्रतिस्पर्धा कानून है और यह गूगल, मेटा और एक्स जैसी कंपनियों पर भारी जुर्माना, ऑपरेशनल प्रतिबंध या फिर आंशिक प्रतिबंध भी लगा सकता है.

नाटो का अनुच्छेद 5

डेनमार्क ने साफ तौर पर कहा है कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है और इसका भविष्य सिर्फ इसके लोग ही तय करेंगे. राजनीतिक तौर पर यूरोप एकजुट हो चुका है और इस मुद्दे को भू राजनीति के बजाय संप्रभुता के मुद्दे के रूप में पेश कर रहा है. अगर अमेरिका सैन्य कब्जे की कोशिश करता है तो डेनमार्क नाटो के अनुच्छेद 5 का इस्तेमाल कर सकता है. इसके अनुसार एक सदस्य पर हमले को सभी पर हमला माना जाता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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