बिहार: PMCH के पूर्व प्रिंसिपल NP सिंह मामले में बड़ा खुलासा, गार्ड ने बताई पूरी सच्चाई
Bihar News: पीएमसीएच के पूर्व प्राचार्य के गार्ड ने उस दिन की घटना के बारे में जानकारी दी. गार्ड ने बताया कि उस दिन डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह निजी क्लीनिक में 11 बजे से मरीज देख रहे थे.

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह पर की गई कार्रवाई लगातार चर्चाओं बनी हुई है, अब इस मामले में PMCH के पूर्व प्रिंसिपल के साथ प्रतिनियुक्त सरकारी अंगरक्षक ने उस दिन की घटना के बारे में जानकारी दी है. पूर्व प्राचार्य के बॉडीगार्ड ने पीएमसीएच (PMCH) के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह के निजी क्लीनिक में उपस्थिति रहने के बारे में जानकारी दी है.
पूर्व प्राचार्य डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह के साथ प्रतिनियुक्त सरकारी अंगरक्षक ने उस दिन के बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि दिनांक 23 जून 2026 को यानी जिस दिन स्वास्थ्य मंत्री पीएमसीएच में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उपस्थित थे, वे पूर्व प्राचार्य डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह के साथ ड्यूटी पर थे.
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ड्यूटी के समय क्लीनिक पर मौजूद थे एनपी सिंह- गार्ड
सरकारी अंगरक्षक संजीत कुमार (सिपाही नंबर- 2317) ने बताया कि वह डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह के साथ प्राचार्य पीएमसीएच के सरकारी अंगरक्षक के रूप में तैनात किए गए है. मंगलवार, 23 जून को हुई घटना की पूरी जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि ड्यूटी का समय वह रोजाना की तरह उस दिन भी सुबह 9:30 बजे डॉक्टर साहब के आवास सह क्लीनिक पर ड्यूटी के लिए पहुंच गया था.
सुबह 9:30 से शाम 6:30 बजे तक क्लीनिक पर एनपी सिंह- गार्ड
पूर्व प्राचार्य के गार्ड ने बताया कि प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह सुबह 11:00 बजे अपने घर के ऊपरी हिस्से से नीचे क्लीनिक में आए. इसके बाद डॉक्टर साहब ने शाम 6:00 बजे तक लगातार मरीजों को देखा. उस दिन करीब 15 से 20 मरीज इलाज के लिए आए थे. सुरक्षा गार्ड ने स्पष्ट किया कि सुबह 9:30 बजे से लेकर शाम 6:30 बजे (जब गार्ड अनुमति लेकर वहां से निकला) तक डॉक्टर साहब अपने क्लीनिक में ही मौजूद थे और पूरे समय वहीं बैठकर काम कर रहे थे, वे कहीं भी बाहर नहीं गए थे.
उल्लेखनीय है कि डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह के मामले में उनके द्वारा मीडिया में दिए गए बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मामले की उच्च स्तरीय जांच करने का निर्णय लिया गया है. परंतु, सरकारी अंगरक्षक के बयान से स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अब तक जिस आधार पर कार्रवाई की बात कही जा रही थी वह सत्य साबित होता है. अब पूरे मामले में जाँच कर आरोपी डॉक्टर से उनका पक्ष लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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