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5 सबसे खतरनाक ड्रोन तकनीक जिससे दुश्मन के उड़ जाएंगे परखच्चे! जानिए किस देश के पास है

ड्रोन टेक्नोलॉजी ने युद्ध का पूरा चेहरा बदल दिया है. जिन मानव रहित हवाई वाहनों (UCAVs) को कभी सिर्फ सीमित इस्तेमाल के लिए देखा जाता था, वे आज हर बड़ी सेना का अहम हिस्सा बन चुके हैं.

ड्रोन टेक्नोलॉजी ने युद्ध का पूरा चेहरा बदल दिया है. जिन मानव रहित हवाई वाहनों (UCAVs) को कभी सिर्फ सीमित इस्तेमाल के लिए देखा जाता था, वे आज हर बड़ी सेना का अहम हिस्सा बन चुके हैं.

ड्रोन टेक्नोलॉजी ने युद्ध का पूरा चेहरा बदल दिया है. जिन मानव रहित हवाई वाहनों (UCAVs) को कभी सिर्फ सीमित इस्तेमाल के लिए देखा जाता था, वे आज हर बड़ी सेना का अहम हिस्सा बन चुके हैं. अब ये सिर्फ निगरानी और जासूसी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सटीक हमले, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता के साथ युद्धभूमि के नियम तय कर रहे हैं. आज की मिलिट्री दुनिया में तेज़, घातक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस ड्रोन की मांग पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है. अमेरिका, तुर्की, चीन और रूस जैसे देशों ने ऐसे ड्रोन विकसित किए हैं जो भविष्य की हवाई लड़ाई के निर्णायक हथियार साबित हो रहे हैं. आइए जानते हैं 2025 के कुछ सबसे शक्तिशाली और चर्चित सैन्य ड्रोन के बारे में.

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अमेरिका का MQ-9 Reaper आधुनिक युद्ध का सबसे भरोसेमंद ड्रोन है. यह 27 घंटे तक उड़ान भर सकता है और करीब 1,700 किलो तक हथियार ले जाने में सक्षम है. मिसाइल, बम और उन्नत सेंसरों से लैस यह ड्रोन न सिर्फ निगरानी करता है बल्कि सटीक हमले भी करता है. 2007 से अब तक यह लगभग हर बड़े युद्धक्षेत्र में अपनी क्षमता दिखा चुका है और वर्तमान में अमेरिका समेत 10 देशों की सेनाओं के पास सक्रिय है.
अमेरिका का MQ-9 Reaper आधुनिक युद्ध का सबसे भरोसेमंद ड्रोन है. यह 27 घंटे तक उड़ान भर सकता है और करीब 1,700 किलो तक हथियार ले जाने में सक्षम है. मिसाइल, बम और उन्नत सेंसरों से लैस यह ड्रोन न सिर्फ निगरानी करता है बल्कि सटीक हमले भी करता है. 2007 से अब तक यह लगभग हर बड़े युद्धक्षेत्र में अपनी क्षमता दिखा चुका है और वर्तमान में अमेरिका समेत 10 देशों की सेनाओं के पास सक्रिय है.
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तुर्की का Bayraktar TB2 आधुनिक युद्ध का गेमचेंजर साबित हुआ है. कम कीमत और आसान ऑपरेशन की वजह से यह उन देशों के लिए वरदान है जो महंगे अमेरिकी ड्रोन खरीदने की स्थिति में नहीं हैं. यह 2014 से सेवा में है और सीरिया, लीबिया, नागोर्नो-काराबाख और यूक्रेन जैसे युद्धों में इसने दुश्मन के टैंकों और एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त कर अपनी मारक क्षमता साबित की है.
तुर्की का Bayraktar TB2 आधुनिक युद्ध का गेमचेंजर साबित हुआ है. कम कीमत और आसान ऑपरेशन की वजह से यह उन देशों के लिए वरदान है जो महंगे अमेरिकी ड्रोन खरीदने की स्थिति में नहीं हैं. यह 2014 से सेवा में है और सीरिया, लीबिया, नागोर्नो-काराबाख और यूक्रेन जैसे युद्धों में इसने दुश्मन के टैंकों और एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त कर अपनी मारक क्षमता साबित की है.
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Bayraktar की तुलना में TAI Anka और ज्यादा सक्षम ड्रोन है. यह 30 घंटे से भी अधिक समय तक उड़ान भर सकता है और भारी हथियार ले जाने की क्षमता रखता है. इसके Anka-S वेरिएंट में सैटेलाइट कंट्रोल और आधुनिक हथियार सिस्टम जुड़ा है. यह निगरानी, स्ट्राइक और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सभी भूमिकाओं में कारगर है.
Bayraktar की तुलना में TAI Anka और ज्यादा सक्षम ड्रोन है. यह 30 घंटे से भी अधिक समय तक उड़ान भर सकता है और भारी हथियार ले जाने की क्षमता रखता है. इसके Anka-S वेरिएंट में सैटेलाइट कंट्रोल और आधुनिक हथियार सिस्टम जुड़ा है. यह निगरानी, स्ट्राइक और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सभी भूमिकाओं में कारगर है.
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चीन का Wing Loong II ड्रोन अमेरिका के MQ-9 Reaper जैसा दिखता है लेकिन कीमत में काफी सस्ता है. यह 32 घंटे तक उड़ सकता है और एक बार में 12 तक मिसाइलें ले जा सकता है. यही वजह है कि यह मध्य-पूर्व, अफ्रीका और एशिया के कई देशों में एक्सपोर्ट किया गया है. इसकी सबसे बड़ी ताकत है कम लागत और चीनी हथियारों के साथ आसान एकीकरण.
चीन का Wing Loong II ड्रोन अमेरिका के MQ-9 Reaper जैसा दिखता है लेकिन कीमत में काफी सस्ता है. यह 32 घंटे तक उड़ सकता है और एक बार में 12 तक मिसाइलें ले जा सकता है. यही वजह है कि यह मध्य-पूर्व, अफ्रीका और एशिया के कई देशों में एक्सपोर्ट किया गया है. इसकी सबसे बड़ी ताकत है कम लागत और चीनी हथियारों के साथ आसान एकीकरण.
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रूस ने 2020 में Orion को अपनी वायुसेना में शामिल किया. यह 24 घंटे तक उड़ सकता है और लगभग 250 किलो तक हथियार ले जा सकता है. भले ही इसकी मारक क्षमता अमेरिकी या चीनी ड्रोन जितनी न हो, लेकिन यह रूस का पहला मध्यम-ऊँचाई वाला कॉम्बैट ड्रोन है जो पूरी तरह घरेलू तकनीक से बना है. Orion अब निर्यात के लिए भी तैयार किया जा रहा है.
रूस ने 2020 में Orion को अपनी वायुसेना में शामिल किया. यह 24 घंटे तक उड़ सकता है और लगभग 250 किलो तक हथियार ले जा सकता है. भले ही इसकी मारक क्षमता अमेरिकी या चीनी ड्रोन जितनी न हो, लेकिन यह रूस का पहला मध्यम-ऊँचाई वाला कॉम्बैट ड्रोन है जो पूरी तरह घरेलू तकनीक से बना है. Orion अब निर्यात के लिए भी तैयार किया जा रहा है.

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