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Hajj 2025: हज यात्रा के दूसरे दिन का क्या है महत्व? किसे कहते हैं वुक़ूफ-ए-अराफात, जानें जरूरी बात
हज के दूसरे दिन वुकूफ ए अराफात में दुआ और इबादत का विशेष महत्व होता है. यह हज के लिए अनिवार्य है, जिसे किए बिना हज अधूरा माना जाता है. जानिए अराफात और मुजदलिफा के रिवाजों का आध्यात्मिक पक्ष.
अराफात का मैदान जहां एक ओर पैगंबर की आखिरी तकरीर का साक्षी रहा, वहीं आज भी वह करोड़ों दिलों के सच्चे इरादों की गवाही देता है.
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हज यात्रा का दूसरा दिन, जिसे वुक़ूफ-ए-अराफात कहा जाता है. ये हज का सबसे महत्वपूर्ण रिवाज माना जाता है. अगर कोई हाजी इस दिन मैदान-ए-अराफात में उपस्थित नहीं होता तो उसका हज अधूरा और अमान्य माना जाता है.
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वुक़ूफ-ए-अराफात के दिन मक्का से लगभग 20 किमी दूर स्थित अराफात के मैदान में दोपहर से सूर्यास्त तक पहुंचते हैं लोग. इस दौरान लाखों हाजी दुनिया की हर भाषा में हर दिल से अल्लाह से अपनी गलतियों की माफी मांगते हैं.
Published at : 05 Jun 2025 02:11 PM (IST)
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