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क्यों कहा जाता था कि कभी नहीं डूबेगा टाइटैनिक, क्या लगा था इसमें ऐसा?
इसमें आधुनिक तकनीक, मजबूत स्टील और खास वाटरटाइट कमरे बनाए गए थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. अपनी पहली ही यात्रा में यह विशाल जहाज अटलांटिक महासागर में डूब गया.
साल 1912 में बना टाइटैनिक जहाज अपने समय का सबसे बड़ा, सबसे शानदार और सबसे सुरक्षित माना जाता था. कहा जाता था कि यह जहाज कभी डूब ही नहीं सकता है. इसमें आधुनिक तकनीक, मजबूत स्टील और खास वाटरटाइट कमरे बनाए गए थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. अपनी पहली ही यात्रा में यह विशाल जहाज अटलांटिक महासागर में डूब गया और इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री हादसा बन गया. आज भी टाइटैनिक की कहानी लोगों को हैरान कर देती है.
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टाइटैनिक का पूरा नाम RMS Titanic था, क्योंकि यह ब्रिटेन की रॉयल मेल सर्विस के लिए चिट्ठियां और पार्सल भी ले जाता था. यह जहाज आयरलैंड के बेलफास्ट शहर में हार्लैंड एंड वूल्फ कंपनी ने बनाया था. इसकी लंबाई लगभग 269 मीटर थी, चौड़ाई 28 मीटर और ऊंचाई करीब 53 मीटर, इसमें 3 बड़े इंजन लगे थे. रोजाना लगभग 600 टन कोयला जलता था. इस जहाज में करीब 3300 लोगों के रहने की जगह थी. यह बेहद आलीशान था और इसकी फर्स्ट क्लास टिकट बहुत महंगी मानी जाती थी.
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टाइटैनिक को उस समय की सबसे आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना माना गया था. इसमें कई वाटरटाइट कंपार्टमेंट (पानी रोकने वाले कमरे) बनाए गए थे. अगर एक या दो कमरे में पानी भर भी जाए तो जहाज के बाकी हिस्से सुरक्षित रहें. इसी वजह से इसका प्रचार किया गया कि यह जहाज कभी नहीं डूबेगा. लोगों ने इस पर आंख बंद करके भरोसा कर लिया.
Published at : 03 Jan 2026 11:30 AM (IST)
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