एक्सप्लोरर

बिना नट बोल्ट के तैयार हुआ देश का यह ब्रिज, जानिए कितने टन लोहे से बना यह अजूबा

Bridge Without Nuts And Bolts: देश में एक ब्रिज ऐसा है जिसको बनाने में कोई भी नट-बोल्ट का इस्तेमाल नहीं किया गया है. लेकिन फिर भी सालों से वह मजबूती से खड़ा है और लाखों लोग उस पर से गुजरते हैं.

Bridge Without Nuts And Bolts: देश में एक ब्रिज ऐसा है जिसको बनाने में कोई भी नट-बोल्ट का इस्तेमाल नहीं किया गया है. लेकिन फिर भी सालों से वह मजबूती से खड़ा है और लाखों लोग उस पर से गुजरते हैं.

भारत में एक ऐसा पुल है, जिसे रोज लाखों लोग पार करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इसकी असली कहानी जानते हैं. न इसमें नट हैं, न बोल्ट, फिर भी यह दशकों से मजबूती से खड़ा है. इस पुल ने जंग की बमबारी देखी, आजादी की लड़ाई झेली और भयानक अकाल का दौर भी देखा. हैरानी की बात यह है कि इतना ऐतिहासिक होने के बावजूद इसका कभी औपचारिक उद्घाटन तक नहीं हुआ. आइए इसके बारे में जानें.

1/7
कोलकाता का हावड़ा ब्रिज भारत ही नहीं, दुनिया के सबसे मशहूर पुलों में गिना जाता है. अंग्रेजी शासन के दौरान शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 1936 में निर्माण के चरण में आया और 3 फरवरी 1943 को आम जनता के लिए खोल दिया गया.
कोलकाता का हावड़ा ब्रिज भारत ही नहीं, दुनिया के सबसे मशहूर पुलों में गिना जाता है. अंग्रेजी शासन के दौरान शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 1936 में निर्माण के चरण में आया और 3 फरवरी 1943 को आम जनता के लिए खोल दिया गया.
2/7
हालांकि, आज तक इसका कोई औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ. इसके बावजूद यह पुल 80 साल से ज्यादा समय से कोलकाता की जीवनरेखा बना हुआ है. हावड़ा ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में कहीं भी नट-बोल्ट का इस्तेमाल नहीं हुआ है.
हालांकि, आज तक इसका कोई औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ. इसके बावजूद यह पुल 80 साल से ज्यादा समय से कोलकाता की जीवनरेखा बना हुआ है. हावड़ा ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में कहीं भी नट-बोल्ट का इस्तेमाल नहीं हुआ है.
3/7
पूरी संरचना को जोड़ने के लिए धातु की कीलों यानी रिवेट्स का सहारा लिया गया. यही वजह है कि इसे इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना माना जाता है. रिवेट तकनीक ने इस पुल को ज्यादा लचीलापन और मजबूती दी, जो भारी ट्रैफिक के बावजूद आज भी कायम है.
पूरी संरचना को जोड़ने के लिए धातु की कीलों यानी रिवेट्स का सहारा लिया गया. यही वजह है कि इसे इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना माना जाता है. रिवेट तकनीक ने इस पुल को ज्यादा लचीलापन और मजबूती दी, जो भारी ट्रैफिक के बावजूद आज भी कायम है.
4/7
यह पुल हुगली नदी के दोनों किनारों पर बने सिर्फ दो विशाल पायों पर टिका है. इन पायों की ऊंचाई करीब 280 फीट है, जबकि इनके बीच की दूरी लगभग 1500 फीट है. अपने समय में हावड़ा ब्रिज दुनिया का तीसरा सबसे लंबा कैंटिलीवर ब्रिज था. खास बात यह है कि नदी के बीच में कोई खंभा नहीं है, जिससे जल यातायात में कभी रुकावट नहीं आई.
यह पुल हुगली नदी के दोनों किनारों पर बने सिर्फ दो विशाल पायों पर टिका है. इन पायों की ऊंचाई करीब 280 फीट है, जबकि इनके बीच की दूरी लगभग 1500 फीट है. अपने समय में हावड़ा ब्रिज दुनिया का तीसरा सबसे लंबा कैंटिलीवर ब्रिज था. खास बात यह है कि नदी के बीच में कोई खंभा नहीं है, जिससे जल यातायात में कभी रुकावट नहीं आई.
5/7
हावड़ा ब्रिज के निर्माण में कुल 26,500 टन स्टील का इस्तेमाल हुआ था. इसमें से करीब 23,500 टन स्टील टाटा स्टील ने सप्लाई किया था. उस दौर में यह भारत की औद्योगिक क्षमता का बड़ा उदाहरण था. पुल का निर्माण ब्रेथवेट, बर्न एंड जोसेप कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था, जिसने उस समय की सबसे आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया.
हावड़ा ब्रिज के निर्माण में कुल 26,500 टन स्टील का इस्तेमाल हुआ था. इसमें से करीब 23,500 टन स्टील टाटा स्टील ने सप्लाई किया था. उस दौर में यह भारत की औद्योगिक क्षमता का बड़ा उदाहरण था. पुल का निर्माण ब्रेथवेट, बर्न एंड जोसेप कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था, जिसने उस समय की सबसे आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया.
6/7
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान की बमबारी का खतरा कोलकाता तक पहुंच चुका था. एक जापानी बम हावड़ा ब्रिज के काफी करीब गिरा, लेकिन पुल को कोई नुकसान नहीं हुआ.
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान की बमबारी का खतरा कोलकाता तक पहुंच चुका था. एक जापानी बम हावड़ा ब्रिज के काफी करीब गिरा, लेकिन पुल को कोई नुकसान नहीं हुआ.
7/7
इसके अलावा यह पुल भारत की आजादी की लड़ाई और 1943 के बंगाल अकाल का भी मूक गवाह रहा है, जब लाखों लोग इसी रास्ते से मदद और राहत के लिए गुजरे.
इसके अलावा यह पुल भारत की आजादी की लड़ाई और 1943 के बंगाल अकाल का भी मूक गवाह रहा है, जब लाखों लोग इसी रास्ते से मदद और राहत के लिए गुजरे.

जनरल नॉलेज फोटो गैलरी

Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

CJP Protest: कितनी मजबूत होती है संसद की सुरक्षा, जानें कितने लेयर में तैनात होते हैं जवान
कितनी मजबूत होती है संसद की सुरक्षा, जानें कितने लेयर में तैनात होते हैं जवान
CJP Protest: भारत में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार कहां से मिलता है, संविधान क्या कहता है?
भारत में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार कहां से मिलता है, संविधान क्या कहता है?
CJP Protest: कैसे काम करता है आंसू गैस का गोला, पहली बार कहां हुआ था इसका प्रयोग?
कैसे काम करता है आंसू गैस का गोला, पहली बार कहां हुआ था इसका प्रयोग?
CJP Protest: यह है अब तक का सबसे आक्रामक आंदोलन, जानें कितने आंदोलनकारियों की गई थी जान?
यह है अब तक का सबसे आक्रामक आंदोलन, जानें कितने आंदोलनकारियों की गई थी जान?

वीडियोज

DGP की '​मौत मिस्ट्री'!
BMW F 450 GS Ride Review | The best premium bike ?
Sonam Wangchuk: एक अनशन और हिल गई थी इंदिरा सरकार! कैसे सोनम वांगचुक के पिता बने थे आंदोलन का चेहरा?
Ranbir Kapoor और Yash ने बढ़ाई Ramayana की एक्साइटमेंट
Ramayana ट्रेलर में Yash पड़े भारी, Ranbir Kapoor भी छाए

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'नहीं मनाऊंगा जन्मदिन...', मल्लिकार्जुन खरगे का ऐलान, CJP बवाल के बीच बताया क्यों लिया ये फैसला
'नहीं मनाऊंगा जन्मदिन...', मल्लिकार्जुन खरगे का ऐलान, बताया क्यों लिया ये फैसला
योगी कैबिनेट बैठक में 16 प्रस्तावों पर लगी मुहर, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का भी नाम
योगी कैबिनेट बैठक में 16 प्रस्तावों पर लगी मुहर, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का भी नाम
Explained: CJP का 'चलो संसद' आंदोलन कितना कामयाब? लाठियां, आंसू गैस, पत्थर और हजारों युवा... दोनों तरफ का सच क्या?
CJP का 'चलो संसद' आंदोलन कितना कामयाब? लाठियां, पत्थर और हजारों युवा.. दोनों तरफ का सच क्या?
Dhamaal 4 BO Day 11 Worldwide: 'धमाल 4' ने मचाया तहलका, शाहिद कपूर की फिल्म के उड़ाए परखच्चे, बना दिया इतना बड़ा रिकॉर्ड
धमाल 4' ने वर्ल्डवाइड मचाया तहलका, शाहिद कपूर की फिल्म को मात देकर बना दिया इतना बड़ा रिकॉर्ड
'जैसे आपने संजू और वैभव सूर्यवंशी का करियर खराब किया, वैसे ही अब आप...', पूर्व क्रिकेटर टीम इंडिया में किसपर भड़के
'जैसे आपने संजू और वैभव सूर्यवंशी का करियर खराब किया, वैसे ही अब आप...', पूर्व क्रिकेटर टीम इंडिया में किसपर भड़के
Mahua Moitra Remark: 'हो सकता है शिक्षामंत्री को इस्तीफा लिखना ना आता हो क्योंकि RSS...', महुआ मोइत्रा का धर्मेंद्र प्रधान पर तंज
'हो सकता है शिक्षामंत्री को इस्तीफा लिखना ना आता हो क्योंकि RSS...', महुआ मोइत्रा का धर्मेंद्र प्रधान पर तंज
CJP Protest: दिल्ली लाठीचार्ज पर चिराग पासवान की पहली प्रतिक्रिया, 'मर्यादाएं अगर लांघी…'
दिल्ली लाठीचार्ज पर चिराग पासवान की पहली प्रतिक्रिया, 'मर्यादाएं अगर लांघी…'
Students Protest: लाठीचार्ज के बाद लौट रहे RAF जवानों को देखकर CJP प्रदर्शनकारियों ने बजाईं तालियां, वीडियो वायरल
लाठीचार्ज के बाद लौट रहे RAF जवानों को देखकर CJP प्रदर्शनकारियों ने बजाईं तालियां, वीडियो वायरल
Embed widget