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Space Snow: क्या अंतरिक्ष में भी गिरती है बर्फ, जानें पृथ्वी की बर्फ से कितनी होती है यह अलग

Space Snow: अक्सर लोगों को ऐसा लगता है की बर्फ सिर्फ पृथ्वी पर ही गिरती है. लेकिन ऐसा नहीं है. आइए जानते हैं कि अंतरिक्ष में गिरने वाली बर्फ पृथ्वी की बर्फ से कितनी अलग होती है.

Space Snow: अक्सर लोगों को ऐसा लगता है की बर्फ सिर्फ पृथ्वी पर ही गिरती है. लेकिन ऐसा नहीं है. आइए जानते हैं कि अंतरिक्ष में गिरने वाली बर्फ पृथ्वी की बर्फ से कितनी अलग होती है.

Space Snow: आपने आसमान से बर्फ गिरते हुए तो जरूर देखी होगी. लेकिन यह बर्फ सिर्फ पृथ्वी तक ही सीमित नहीं है. असल में बर्फ पूरे ब्रह्मांड में मौजूद है. लेकिन यह वैसी बिल्कुल नहीं दिखती जैसे हम यहां देखते हैं. आइए जानते हैं कि अंतरिक्ष में गिरने वाली बर्फ पृथ्वी की बर्फ से कितनी अलग होती है.

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पृथ्वी पर बर्फ जमे हुए पानी की बूंदों से बनती है. लेकिन अंतरिक्ष में बर्फ पूरी तरह से अलग रसायनों से बन सकती है. जैसे मंगल ग्रह पर बर्फ कार्बन डाइऑक्साइड से बनी होती है. इसी तरह टाइटन जैसे चंद्रमाओं पर मीथेन की बर्फबारी होती है.
पृथ्वी पर बर्फ जमे हुए पानी की बूंदों से बनती है. लेकिन अंतरिक्ष में बर्फ पूरी तरह से अलग रसायनों से बन सकती है. जैसे मंगल ग्रह पर बर्फ कार्बन डाइऑक्साइड से बनी होती है. इसी तरह टाइटन जैसे चंद्रमाओं पर मीथेन की बर्फबारी होती है.
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पृथ्वी की बर्फ के उलट जो पिघल कर पानी बन जाती है अंतरिक्ष की बर्फ अक्सर तरल  अवस्था को पूरी तरह से छोड़ देती है. काफी कम दबाव की वजह से यह सीधे ठोस से गैस में बदल जाती है. इस प्रक्रिया को सब्लिमेशन कहते हैं.
पृथ्वी की बर्फ के उलट जो पिघल कर पानी बन जाती है अंतरिक्ष की बर्फ अक्सर तरल अवस्था को पूरी तरह से छोड़ देती है. काफी कम दबाव की वजह से यह सीधे ठोस से गैस में बदल जाती है. इस प्रक्रिया को सब्लिमेशन कहते हैं.
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पृथ्वी पर बर्फ बादलों में बनती है और गुरुत्वाकर्षण की वजह से नीचे गिरती है. अंतरिक्ष में हमारे जैसे वायुमंडलीय बादल नहीं होते. धीरे-धीरे गिरने वाले कणों के बजाय बर्फ तैरते हुए बर्फ के कणों या यहां तक कि धूमकेतु जैसे बड़े बर्फीले पिंडों के रूप में मौजूद हो सकती है. यह अंतरिक्ष में घूमते रहते हैं.
पृथ्वी पर बर्फ बादलों में बनती है और गुरुत्वाकर्षण की वजह से नीचे गिरती है. अंतरिक्ष में हमारे जैसे वायुमंडलीय बादल नहीं होते. धीरे-धीरे गिरने वाले कणों के बजाय बर्फ तैरते हुए बर्फ के कणों या यहां तक कि धूमकेतु जैसे बड़े बर्फीले पिंडों के रूप में मौजूद हो सकती है. यह अंतरिक्ष में घूमते रहते हैं.
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हर ग्रह पर बर्फबारी का अपना एक अलग रूप होता है. मंगल ग्रह पर पानी की बर्फ और ड्राई आइस दोनों तरह की बर्फ होती है. वहीं  टाइटन पर मीथेन की बर्फ देखने को मिलती है. इसी के साथ नेप्चून और यूरेनस पर बर्फबारी में मीथेन के क्रिस्टल या हीरों की बारिश हो सकती है.
हर ग्रह पर बर्फबारी का अपना एक अलग रूप होता है. मंगल ग्रह पर पानी की बर्फ और ड्राई आइस दोनों तरह की बर्फ होती है. वहीं टाइटन पर मीथेन की बर्फ देखने को मिलती है. इसी के साथ नेप्चून और यूरेनस पर बर्फबारी में मीथेन के क्रिस्टल या हीरों की बारिश हो सकती है.
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पृथ्वी के बर्फ के कण नरम और नाजुक होते हैं. ये पानी के क्रिस्टलीकरण से बनते हैं. अंतरिक्ष में बर्फ के कण तापमान और रासायनिक बनावट के आधार पर ज्यादा व्यवस्थित, घने या बहुत छोटे भी हो सकते हैं.
पृथ्वी के बर्फ के कण नरम और नाजुक होते हैं. ये पानी के क्रिस्टलीकरण से बनते हैं. अंतरिक्ष में बर्फ के कण तापमान और रासायनिक बनावट के आधार पर ज्यादा व्यवस्थित, घने या बहुत छोटे भी हो सकते हैं.
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कुछ खगोलीय पिंडों पर बर्फ बादलों से नहीं बल्कि ज्वालामुखी की गतिविधियों से बनती है. उदाहरण के लिए आयो पर ज्वालामुखियों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड जम जाती है और बर्फ की तरह सतह पर वापस गिरती है. इससे यह सौरमंडल की सबसे अजीब बर्फबारियों में से एक बन जाती है.
कुछ खगोलीय पिंडों पर बर्फ बादलों से नहीं बल्कि ज्वालामुखी की गतिविधियों से बनती है. उदाहरण के लिए आयो पर ज्वालामुखियों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड जम जाती है और बर्फ की तरह सतह पर वापस गिरती है. इससे यह सौरमंडल की सबसे अजीब बर्फबारियों में से एक बन जाती है.

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