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Super El Nino: भारत पर बरसेगा सुपर एल नीनो का कहर, जानें आखिरी बार कब आया था देश पर यह संकट

Super El Nino: भारत में इस साल सुपर एल नीनो का खतरा बढ़ चुका है. आइए जानते हैं कि आखिरी बार देश को इस परेशानी का कब सामना करना पड़ा था.

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  • वैज्ञानिकों ने सुपर एल नीनो की गंभीर चेतावनी जारी की है।
  • इससे भारत में अत्यधिक गर्मी, कमजोर मानसून का खतरा।
  • 2015-16 में सुपर एल नीनो से फसलें हुई थीं प्रभावित।
  • 2026 में एल नीनो जैसी स्थितियां बनने की प्रबल संभावना।

Super El Nino: वैज्ञानिकों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है. भारत को इस साल सुपर एल नीनो का सामना करना पड़ सकता है. इससे काफी ज्यादा गर्मी, कमजोर मानसून और सूखे जैसी स्थितियों का खतरा बढ़ जाएगा. पिछली बार जब देश में ऐसी शक्तिशाली जलवायु घटना हुई थी तब 2015-16 का समय था. उस दौरान बारिश काफी कम हुई थी, फसलों को नुकसान पहुंचा था और कई इलाकों में तापमान तेजी से बढ़ा था. अब जब विश्व मौसम विज्ञान संगठन जैसी वैश्विक एजेंसियों ने नई चेतावनी जारी की हैं तब उस संकट के दुबारा लौटने की चिंता बढ़ चुकी है.

क्या है सुपर एल नीनो? 

सुपर एल नीनो असल में एल नीनो जलवायु घटना का ही ज्यादा तीव्र रूप है. इसमें प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा बढ़ जाता है. यह 2 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा बढ़ जाता है. यह बढ़ती गर्मी वैश्विक मौसम प्रणालियों को बिगाड़ देती है. सामान्य एल नीनो घटनाओं के उलट सुपर एल नीनो काफी कम होता है और कहीं ज्यादा विनाशकारी होता है.

भारत ने पिछली बार इसका सामना कब किया था?

भारत ने पिछली बार एक बड़े से सुपर एल नीनो का सामना 2015-16 के दौरान किया था. यह आधुनिक इतिहास की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक थी. उस साल बारिश सामान्य से काफी कम हुई थी. इसी के साथ जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा था और कई राज्यों में खेती-बाड़ी पर काफी बुरा असर पड़ा था. 

इससे भी पहले 1997-1998 की घटना ने दुनिया भर में मानसून को प्रभावित किया था. वहीं 1877-78 के सुपर एल नीनो ने भारत में एक भयानक महा अकाल ला दिया था. इससे लाखों लोगों की जान चली गई थी. यह इतिहास की सबसे बुरी जलवायु आपदाओं में से एक बन गया था. 

2026 में क्या हो सकता है? 

ऐसा कहा जा रहा है कि मई से जुलाई के बीच एल नीनो जैसी स्थितियां बनने की 61% से 80% संभावना है. बारिश घटकर सामान्य स्तर के लगभग 92% तक रह सकती है. कागज पर यह कमी भले ही छोटी लगे लेकिन असल दुनिया में इसके काफी बड़े और गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

यह घटना इतनी खतरनाक क्यों है? 

सुपर एल नीनो को खासतौर से चिंताजनक बनाने वाली बात इसका चेन रिएक्शन है. यह सिर्फ गर्मी ही नहीं लाता बल्कि बारिश को भी बाधित करता है. इसी के साथ इस दौरान फसल उत्पादन में कमी आ जाती है और जल संसाधनों पर दबाव पड़ता है. ऐतिहासिक रूप से कुछ गंभीर मामलों में इसने अकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है.

यह भी पढ़ें: दिल्ली के उत्तर प्रदेश भवन में कैसे मिलता है कैंटीन का ठेका, क्या आम आदमी कर सकता है अप्लाई?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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