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Foreign Currency Adoption: क्या कोई देश किसी दूसरे मुल्क की करेंसी अपना सकता है, जानें किस स्थिति में लिया जा सकता है यह फैसला
Foreign Currency Adoption: कभी-कभी कुछ देश दूसरे देशों की करेंसी को अपना लेते हैं. आइए जानते हैं कि यह फैसला कब लिया जाता है और क्या होती है इसके पीछे की वजह.
Foreign Currency Adoption: जब भी किसी देश की अपनी करेंसी भरोसेमंद मीडियम ऑफ एक्सचेंज के तौर पर काम करना बंद कर देती है तो सरकारें कभी कभी एक बड़ा और प्रैक्टिकल कदम उठाती हैं. वे दूसरे देश की करेंसी को लीगल टेंडर के तौर पर अपना लेते हैं. इस आर्थिक कदम को डॉलराइजेशन या फिर यूरोइजेशन के नाम से जाना जाता है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
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विदेशी करेंसी को अपनाने की सबसे आम वजह है बेकाबू महंगाई. जब कीमतें रोज बढ़ती हैं और लोग राष्ट्रीय करेंसी पर से भरोसा खो देते हैं तो पैसा बचत या फिर व्यापार के लिए लगभग बेकार ही हो जाता है. ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर जैसी करेंसी अपनाने से खरीदने की शक्ति और कीमतों में स्थिरता लाने में काफी मदद मिलती है.
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छोटी या फिर संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्थाएं अक्सर विदेशी करेंसी को अपनाती हैं. विश्व स्तर पर भरोसेमंद करेंसी का इस्तेमाल करने से निवेशकों को इस बात का भरोसा होता है कि महंगाई कंट्रोल में रहेगी.
Published at : 30 Dec 2025 06:45 PM (IST)
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