एक्सप्लोरर

ग्‍लेशियर में मौजूद है काली बर्फ, आखिर क्या होता है इससे नुकसान

ग्‍लेशियरों के पिघलने की रफ्तार से दुनियाभर के वैज्ञानिक काफी चिंतित हैं. वैज्ञानिक ये पता लगाने की कोशिशों में जुटे हैं कि जलवायु परिवर्तन के अलावा दूसरे कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से ऐसा हो रहा है.

ग्‍लेशियरों के पिघलने की रफ्तार से दुनियाभर के वैज्ञानिक काफी चिंतित हैं.  वैज्ञानिक ये पता लगाने की कोशिशों में जुटे हैं कि जलवायु परिवर्तन के अलावा दूसरे कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से ऐसा हो रहा है.

ग्लेशियर

1/5
वैज्ञानिकों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने की रफ्तार तीन दशक पहले के मुकाबले तीन गुना हो गई है. इसकी वजह से समुद्र का जलस्‍तर दोगुना हैं. बता दें कि आर्कटिक महासागर में ग्रीनलैंड काफी बड़ा भूभाग और दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है. वहीं काली बर्फ से इन ग्लेशियर को भी नुकसान पहुंच रहा है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने की रफ्तार तीन दशक पहले के मुकाबले तीन गुना हो गई है. इसकी वजह से समुद्र का जलस्‍तर दोगुना हैं. बता दें कि आर्कटिक महासागर में ग्रीनलैंड काफी बड़ा भूभाग और दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है. वहीं काली बर्फ से इन ग्लेशियर को भी नुकसान पहुंच रहा है.
2/5
एक अध्ययन के मुताबिक, ग्रीनलैंड 1000 साल में पहली बार सबसे ज्यादा गरम होने लगा है. साल 2019 के दौरान दुनिया के 40 फीसदी समुद्रों के जलस्‍तर में बढ़ोतरी के लिए आर्कटिक का पिघलना ही जिम्मेदार था. ग्रीनलैंड का पीटरमान ग्‍लेशियर भी अब दरक रहा है. वैज्ञानिक चिंतित हैं कि महासागर के सबसे नजदीक के इस ग्‍लेशियर के सिकुड़ने से बहुत बड़े क्षेत्र में फैली बर्फ लगातार गर्म होते महासागर के पानी में मिल जाएगी.
एक अध्ययन के मुताबिक, ग्रीनलैंड 1000 साल में पहली बार सबसे ज्यादा गरम होने लगा है. साल 2019 के दौरान दुनिया के 40 फीसदी समुद्रों के जलस्‍तर में बढ़ोतरी के लिए आर्कटिक का पिघलना ही जिम्मेदार था. ग्रीनलैंड का पीटरमान ग्‍लेशियर भी अब दरक रहा है. वैज्ञानिक चिंतित हैं कि महासागर के सबसे नजदीक के इस ग्‍लेशियर के सिकुड़ने से बहुत बड़े क्षेत्र में फैली बर्फ लगातार गर्म होते महासागर के पानी में मिल जाएगी.
3/5
रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्‍लेशियरों में सफेद बर्फ के साथ तेजी से आकार बढ़ा रही काली बर्फ भी ग्‍लेशियरों की तेज रफ्तार से सिकुड़ने के लिए जिम्‍मेदार है. बता दें कि काली बर्फ सफेद बर्फ के मुकाबले ज्यादा तेजी से पिघल रही है. इसलिए ग्‍लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं. अब सवाल ये उठता है कि बर्फ के सफेद रेगिस्‍तानों में ये काली बर्फ बन कैसे रही है. रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन और ग्‍लोबल वार्मिंग के कारण जैसे-जैसे ग्‍लेशियर पिघल रहे हैं, वैसे-वैसे इन इलाकों में चट्टानें और धूलमिट्टी से भरे मैदान भी उभर रहे हैं.
रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्‍लेशियरों में सफेद बर्फ के साथ तेजी से आकार बढ़ा रही काली बर्फ भी ग्‍लेशियरों की तेज रफ्तार से सिकुड़ने के लिए जिम्‍मेदार है. बता दें कि काली बर्फ सफेद बर्फ के मुकाबले ज्यादा तेजी से पिघल रही है. इसलिए ग्‍लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं. अब सवाल ये उठता है कि बर्फ के सफेद रेगिस्‍तानों में ये काली बर्फ बन कैसे रही है. रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन और ग्‍लोबल वार्मिंग के कारण जैसे-जैसे ग्‍लेशियर पिघल रहे हैं, वैसे-वैसे इन इलाकों में चट्टानें और धूलमिट्टी से भरे मैदान भी उभर रहे हैं.
4/5
चट्टानों और धूल मिट्टी के कारण सफेद बर्फ जो हैं, वो काले बर्फ में तब्‍दील हो रहे हैं. ‘द गार्जियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि अब हिमालय से अंटार्कटिका तक ब्‍लैक आइस बढ़ रही है. वहीं ज्‍यादातर जगहों पर मैदानों से उठने वाली धूल, जंगलों की आग से उठे धुएं, उद्योगों व डीजल इंजनों से निकलने वाले ब्‍लैक कार्बन के बहुत ही छोटे कण भी हजारों मील का सफर तय करके ग्‍लशियरों पर जाकर सफेद बर्फ को काली बर्फ में बदल रहे हैं.
चट्टानों और धूल मिट्टी के कारण सफेद बर्फ जो हैं, वो काले बर्फ में तब्‍दील हो रहे हैं. ‘द गार्जियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि अब हिमालय से अंटार्कटिका तक ब्‍लैक आइस बढ़ रही है. वहीं ज्‍यादातर जगहों पर मैदानों से उठने वाली धूल, जंगलों की आग से उठे धुएं, उद्योगों व डीजल इंजनों से निकलने वाले ब्‍लैक कार्बन के बहुत ही छोटे कण भी हजारों मील का सफर तय करके ग्‍लशियरों पर जाकर सफेद बर्फ को काली बर्फ में बदल रहे हैं.
5/5
वैज्ञानिक के मुताबिक कोई भी काला पदार्थ सफेद के मुकाबले सूरज से ज्यादा ऊर्जा सोखता है. वहीं पत्थर और चट्टानें ऊंची जगहों पर 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के बराबर गर्म हो सकती हैं. वहीं अंटार्कटिका में 1970 के दशक से समुद्र की बर्फ हर 10 साल में एक फीसदी बढ़ जाती थी. हालांकि वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले साल ये अब तक के सबसे निचले स्‍तर पर था. वैज्ञानिकों का कहना है कि 1979 से 2021 के बीच आर्कटिक बाकी दुनिया के मुकाबले चार गुना तेजी से गरम हुआ है. इसीलिए दुनिया की एक तिहाई बर्फ का पिघलना ग्रीनलैंड में हो रहा है.
वैज्ञानिक के मुताबिक कोई भी काला पदार्थ सफेद के मुकाबले सूरज से ज्यादा ऊर्जा सोखता है. वहीं पत्थर और चट्टानें ऊंची जगहों पर 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के बराबर गर्म हो सकती हैं. वहीं अंटार्कटिका में 1970 के दशक से समुद्र की बर्फ हर 10 साल में एक फीसदी बढ़ जाती थी. हालांकि वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले साल ये अब तक के सबसे निचले स्‍तर पर था. वैज्ञानिकों का कहना है कि 1979 से 2021 के बीच आर्कटिक बाकी दुनिया के मुकाबले चार गुना तेजी से गरम हुआ है. इसीलिए दुनिया की एक तिहाई बर्फ का पिघलना ग्रीनलैंड में हो रहा है.

जनरल नॉलेज फोटो गैलरी

Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

क्या पाकिस्तान में भी मिलता है E20, वहां की सरकार एथेनॉल पर क्या कर रही?
क्या पाकिस्तान में भी मिलता है E20, वहां की सरकार एथेनॉल पर क्या कर रही?
मुस्लिम नाटो में सबसे ज्यादा ताकतवर कौन, उसके पास कितनी ताकत?
मुस्लिम नाटो में सबसे ज्यादा ताकतवर कौन, उसके पास कितनी ताकत?
टोल फ्री किया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, इससे सरकार को कितना नुकसान?
टोल फ्री किया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, इससे सरकार को कितना नुकसान?
क्या पाकिस्तान के पास भी है अग्नि-4 जैसी मिसाइल, उसकी कितनी रेंज और ताकत?
क्या पाकिस्तान के पास भी है अग्नि-4 जैसी मिसाइल, उसकी कितनी रेंज और ताकत?

वीडियोज

Ramayana का Global Release! Devendra Fadnavis बोले- Oscar नहीं मिला तो होगी निराशा
Bigg Boss 20 का बड़ा Twist! Salman Khan के ‘Karan Arjun’ Hint से खुला Two Lives का राज
Vasudha: Vasudha-Chandrika को मिलेगा 'Business Women Award', परखने घर पहुंची स्पेशल कमेटी
R. Madhavan बोले- अब उन्हें CM Thalapathy Vijay कहना चाहिए, Politics पर दिया बड़ा जवाब
Kajal Raghwani ने Pawan Singh पर लगाए गंभीर आरोप, Khesari Lal Yadav को भी दिया जवाब

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
रांची प्रोटेस्ट: JPSC-JSSC न्याय गुट की सरकार से बातचीत खत्म, जानें क्या हुई बात?
रांची प्रोटेस्ट: JPSC-JSSC न्याय गुट की सरकार से बातचीत खत्म, जानें क्या हुई बात?
ईरान युद्ध पर पेजेशकियान का बड़ा बयान- 'हमने शुरू नहीं किया, 48 घंटे में...'
ईरान युद्ध पर पेजेशकियान का बड़ा बयान- 'हमने शुरू नहीं किया, 48 घंटे में...'
IPL 2027 में नहीं खेलेंगे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर? कोच का बयान उड़ा देगा सभी 10 टीमों के होश
IPL 2027 में नहीं खेलेंगे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर? कोच का बयान उड़ा देगा सभी 10 टीमों के होश
DC OTT Release: लोकेश कनगराज- वामिका गब्बी की DC ओटीटी पर कब और कहां होगी रिलीज, जानें-डिटेल्स
लोकेश कनगराज- वामिका गब्बी की DC ओटीटी पर कब और कहां होगी रिलीज, जानें-डिटेल्स
'देश को अमेरिका के हाथों...', ट्रंप के टैरिफ बिल पर बोले केजरीवाल
'देश को अमेरिका के हाथों...', ट्रंप के टैरिफ बिल पर बोले केजरीवाल
असम में बाढ़ से 98 की मौत, हिमाचल से बंगाल तक IMD का अलर्ट, UP-बिहार में कैसा मौसम?
असम में बाढ़ से 98 की मौत, हिमाचल से बंगाल तक IMD का अलर्ट, UP-बिहार में कैसा मौसम?
MP ESB Recruitment 2026: 5 महीने में 12 बड़े एग्जाम कराएगा MP ESB, 19000 पदों पर होगी भर्ती
5 महीने में 12 बड़े एग्जाम कराएगा MP ESB, 19000 पदों पर होगी भर्ती
बारिश के बाद मिट्टी में नाइट्रोजन क्यों कम हो जाती है, इससे कितना नुकसान?
बारिश के बाद मिट्टी में नाइट्रोजन क्यों कम हो जाती है, इससे कितना नुकसान?
Embed widget