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CLAT परीक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, जानें स्टूडेंट्स पर क्या होगा असर?

परीक्षा आयोजित करने वाले कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने परीक्षा पैटर्न, सिलेबस और सवाल पूछने के तरीके में बदलाव की सिफारिश की है.

परीक्षा आयोजित करने वाले कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने परीक्षा पैटर्न, सिलेबस और सवाल पूछने के तरीके में बदलाव की सिफारिश की है.

CLAT Pattern: देश की सबसे बड़ी लॉ एंट्रेंस परीक्षा कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट में बड़े बदलावों की तैयारी शुरू हो गई है. परीक्षा आयोजित करने वाले कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने परीक्षा पैटर्न, सिलेबस और सवाल पूछने के तरीके में बदलाव की सिफारिश की है. हालांकि इन बदलावों को लेकर छात्रों के मन में कई तरीके के सवाल उठ रहे हैं, जिसे लेकर कंसोर्टियम ने साफ कर दिया है कि फिलहाल छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि क्लेट 2027 पुराने पैटर्न पर ही आयोजित होगा, जबकि बड़े बदलाव पर विचार 2028 से किया जाएगा.

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दरअसल, पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने क्लेट परीक्षा में पूछे गए कुछ सवालों और आंसर की में हुई गलतियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए परीक्षा संचालन के तरीके पर सवाल उठाए थे. इसके बाद पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड ने पांच सदस्य विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर कंसोर्टियम को सौंप दी है. अब इस रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया गया है और 31 अगस्त 2026 तक छात्रों, शिक्षकों और कानूनी एक्सपर्ट से सुझाव मांगे गए हैं.
दरअसल, पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने क्लेट परीक्षा में पूछे गए कुछ सवालों और आंसर की में हुई गलतियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए परीक्षा संचालन के तरीके पर सवाल उठाए थे. इसके बाद पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड ने पांच सदस्य विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर कंसोर्टियम को सौंप दी है. अब इस रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया गया है और 31 अगस्त 2026 तक छात्रों, शिक्षकों और कानूनी एक्सपर्ट से सुझाव मांगे गए हैं.
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कंसोर्टियम की गवर्निंग बॉडी की 18 जुलाई 2026 को भी बैठक में फैसला लिया गया कि क्लेट यूजी और पीजी 2027 की परीक्षा मौजूद सिलेबस और परीक्षा पैटर्न के अनुसार ही आयोजित होगी. यानी उम्मीदवारों को तैयारी का तरीका बदलने की जरूरत नहीं होगी. हालांकि पेपर तैयार करने वाली टीम एक्सपर्ट समिति की कुछ सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए प्रश्नों की गुणवत्ता और फॉर्मेट में सीमित सुधार कर सकती है, लेकिन परीक्षा की मूल संरचना में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
कंसोर्टियम की गवर्निंग बॉडी की 18 जुलाई 2026 को भी बैठक में फैसला लिया गया कि क्लेट यूजी और पीजी 2027 की परीक्षा मौजूद सिलेबस और परीक्षा पैटर्न के अनुसार ही आयोजित होगी. यानी उम्मीदवारों को तैयारी का तरीका बदलने की जरूरत नहीं होगी. हालांकि पेपर तैयार करने वाली टीम एक्सपर्ट समिति की कुछ सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए प्रश्नों की गुणवत्ता और फॉर्मेट में सीमित सुधार कर सकती है, लेकिन परीक्षा की मूल संरचना में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
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अगले साल होने वाली परीक्षाओं में उम्मीदवारों को वहीं पुराना पैटर्न मिलेगा. परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और इसकी अवधि 2 घंटे रहेगी, प्रश्न पत्र में 120 एमसीक्यू होंगे. वहीं सही उत्तर पर एक अंक मिलेगा, जबकि गलत उत्तर देने पर 0.25 अंक की नेगेटिव मार्किंग होगी. वहीं परीक्षा में सवाल 5 सेक्शन से पूछे जाएंगे, जिनमें अंग्रेजी भाषा, करंट अफेयर्स, लीगल रीजनिंग, लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव टेक्निक्स होंगे. वहीं परीक्षा में सवाल 5 क्षेत्र में पूछे जाएंगे जिनमें अंग्रेजी भाषा करंट अफेयर्स लीगल रीजनिंग लॉजिकल रीजनिंग और क्वानटेटिव टेक्निक्स से होंगे.
अगले साल होने वाली परीक्षाओं में उम्मीदवारों को वहीं पुराना पैटर्न मिलेगा. परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और इसकी अवधि 2 घंटे रहेगी, प्रश्न पत्र में 120 एमसीक्यू होंगे. वहीं सही उत्तर पर एक अंक मिलेगा, जबकि गलत उत्तर देने पर 0.25 अंक की नेगेटिव मार्किंग होगी. वहीं परीक्षा में सवाल 5 सेक्शन से पूछे जाएंगे, जिनमें अंग्रेजी भाषा, करंट अफेयर्स, लीगल रीजनिंग, लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव टेक्निक्स होंगे. वहीं परीक्षा में सवाल 5 क्षेत्र में पूछे जाएंगे जिनमें अंग्रेजी भाषा करंट अफेयर्स लीगल रीजनिंग लॉजिकल रीजनिंग और क्वानटेटिव टेक्निक्स से होंगे.
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समिति का कहना है कि मौजूदा क्लेट परीक्षा में कई सवाल ऐसे होते हैं, जिनके उत्तर सीधे पैसेज में दिए होते हैं. इससे छात्रों की विश्लेषण क्षमता की बजाय केवल जानकारी खोजने की क्षमता की जांच होती है. वहीं सामान्य ज्ञान का सेक्शन कई बार बहुत सामान्य तथ्यों और कई बार ज्यादा कठिन तथ्यों पर आधारित होता है, जिससे परीक्षा का उद्देश्य प्रभावित होता है.इसी वजह से समिति ने क्लेट यूजी के लिए परीक्षा का नया ढांचा सुझाया है.
समिति का कहना है कि मौजूदा क्लेट परीक्षा में कई सवाल ऐसे होते हैं, जिनके उत्तर सीधे पैसेज में दिए होते हैं. इससे छात्रों की विश्लेषण क्षमता की बजाय केवल जानकारी खोजने की क्षमता की जांच होती है. वहीं सामान्य ज्ञान का सेक्शन कई बार बहुत सामान्य तथ्यों और कई बार ज्यादा कठिन तथ्यों पर आधारित होता है, जिससे परीक्षा का उद्देश्य प्रभावित होता है.इसी वजह से समिति ने क्लेट यूजी के लिए परीक्षा का नया ढांचा सुझाया है.
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समिति ने सबसे बड़ा बदलाव जनरल नॉलेज और करंट अफेयर्स सेक्शन को पूरी तरह हटाने का सुझाव दिया है. वहीं अंग्रेजी भाषा के मौजूदा सेक्शन को बदलकर लैंग्वेज एंड कंप्रीहेंशन सेक्शन बनाने की सिफारिश की गई, ताकि उम्मीदवारों की भाषा समझने और प्रभावी संचार क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके.
समिति ने सबसे बड़ा बदलाव जनरल नॉलेज और करंट अफेयर्स सेक्शन को पूरी तरह हटाने का सुझाव दिया है. वहीं अंग्रेजी भाषा के मौजूदा सेक्शन को बदलकर लैंग्वेज एंड कंप्रीहेंशन सेक्शन बनाने की सिफारिश की गई, ताकि उम्मीदवारों की भाषा समझने और प्रभावी संचार क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके.
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इसके अलावा रिपोर्ट में लीगल रीजनिंग और लॉजिकल रीजनिंग को मिलाकर एक नया एप्टीट्यूड सेक्शन बनाने की सिफारिश की गई है. समिति का सुझाव है कि हर सेक्शन में केवल 10 से 15 प्रश्न ही रखे जाएं. इससे छात्रों पर कम समय में ज्यादा सवाल हल करने का दबाव घटेगा और उनकी विश्लेषण क्षमता का बेहतर मूल्यांकन हो सकेगा.
इसके अलावा रिपोर्ट में लीगल रीजनिंग और लॉजिकल रीजनिंग को मिलाकर एक नया एप्टीट्यूड सेक्शन बनाने की सिफारिश की गई है. समिति का सुझाव है कि हर सेक्शन में केवल 10 से 15 प्रश्न ही रखे जाएं. इससे छात्रों पर कम समय में ज्यादा सवाल हल करने का दबाव घटेगा और उनकी विश्लेषण क्षमता का बेहतर मूल्यांकन हो सकेगा.
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रिपोर्ट में पहली बार परीक्षा में एक सब्जेक्टिव निबंध जोड़ने का भी सुझाव दिया गया है, जिससे उम्मीदवारों की लेखन क्षमता, तर्कशक्ति और अभिव्यक्ति का मूल्यांकन किया जा सके.
रिपोर्ट में पहली बार परीक्षा में एक सब्जेक्टिव निबंध जोड़ने का भी सुझाव दिया गया है, जिससे उम्मीदवारों की लेखन क्षमता, तर्कशक्ति और अभिव्यक्ति का मूल्यांकन किया जा सके.

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