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स्ट्रॉबेरी की खेती से किसानों की कमाई दोगुनी, अब मैदानी इलाकों में भी खुला रास्ता
स्ट्रॉबेरी की खेती अब पहाड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार जैसे मैदानी राज्यों में भी किसानों को लाखों की कमाई का मौका दे रही है.
स्ट्रॉबेरी, जिसका नाम सुनते ही रसीला स्वाद और लाल चमकदार रंग मन को भा जाता है, अब सिर्फ पहाड़ों की शोभा नहीं रही. पहले लोग मानते थे कि यह फल केवल ठंडी वादियों में ही पनप सकता है, लेकिन अब हालात बदल गए हैं. आज उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार जैसे मैदानी राज्यों में भी स्ट्रॉबेरी की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है. इस बदलाव ने किसानों के लिए कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने के नए अवसर खोल दिए हैं.
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कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि स्ट्रॉबेरी की खेती थोड़ी मेहनत और सही तकनीक के साथ बेहद लाभदायक साबित हो सकती है. किसानों को बस यह समझने की जरूरत है कि कब, कहां और कैसे इसकी खेती करनी चाहिए. स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सितंबर से नवंबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इस दौरान मौसम ठंडा होना शुरू हो जाता है, जिससे पौधों की जड़ें तेजी से जमती हैं और उनकी बढ़त अच्छी होती है.
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स्ट्रॉबेरी को रेतीली दोमट मिट्टी सबसे ज्यादा पसंद आती है. मिट्टी का pH स्तर अगर 5.7 से 6.5 के बीच हो तो पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फल भी बेहतर होते हैं. भारत में स्ट्रॉबेरी की कई किस्में लोकप्रिय हैं. इनमें कैमारोसा, चार्ली चांडलर और विंटर डॉन सबसे ज्यादा उगाई जाती हैं. इन किस्मों की खासियत है कि ये ज्यादा उत्पादन देती हैं और बाजार में आसानी से बिक जाती हैं.
Published at : 04 Sep 2025 08:04 AM (IST)
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