एक्सप्लोरर

यमुना नदी से क्यों खत्म हो रहीं देसी मछलियां, जानें इससे क्या होगा नुकसान?

Native Fish Disappearing From Yamuna: यमुना में किस वजह से रोहू-कतला जैसी देसी मछलियां गायब हो रही हैं. जान लीजिए इन मछलियों के न होने से क्या परेशानियां आ सकती हैं.

Native Fish Disappearing From Yamuna: यमुना में किस वजह से रोहू-कतला जैसी देसी मछलियां गायब हो रही हैं. जान लीजिए इन मछलियों के न होने से क्या परेशानियां आ सकती हैं.

यमुना नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है. जिसकी लंबाई लगभग 1376 किलोमीटर है और यह यमुनोत्री से निकलकर प्रयागराज तक का सफर तय करती है. यह नदी उत्तर भारत के एक बहुत बड़े हिस्से की लाइफलाइन है.

1/6
यमुना नदी की पहचान रही रोहू और कतला जैसी देसी मछलियां अब धीरे-धीरे गायब हो रही हैं. जो एक बड़ा चिंता का विषय है. रिसर्च बताती है कि कभी यमुना में देसी मछलियों का बोलबाला था. लेकिन अब इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है. इसके पीछे बढ़ता प्रदूषण और नदी के इकोसिस्टम में होने वाले बदलाव बड़ी वजह माना जा रहा है.
यमुना नदी की पहचान रही रोहू और कतला जैसी देसी मछलियां अब धीरे-धीरे गायब हो रही हैं. जो एक बड़ा चिंता का विषय है. रिसर्च बताती है कि कभी यमुना में देसी मछलियों का बोलबाला था. लेकिन अब इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है. इसके पीछे बढ़ता प्रदूषण और नदी के इकोसिस्टम में होने वाले बदलाव बड़ी वजह माना जा रहा है.
2/6
नदी में बढ़ती गंदगी और टॉक्सिक कचरा देसी मछलियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है. शहरों का गंदा पानी और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल्स ने यमुना के पानी को इतना जहरीला बना दिया है कि उसमें ऑक्सीजन का लेवल गिर गया है. देसी मछलियां साफ पानी और पर्याप्त ऑक्सीजन के बिना सर्वाइव नहीं कर पा रही हैं.
नदी में बढ़ती गंदगी और टॉक्सिक कचरा देसी मछलियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है. शहरों का गंदा पानी और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल्स ने यमुना के पानी को इतना जहरीला बना दिया है कि उसमें ऑक्सीजन का लेवल गिर गया है. देसी मछलियां साफ पानी और पर्याप्त ऑक्सीजन के बिना सर्वाइव नहीं कर पा रही हैं.
3/6
यमुना पर बने बांध और बैराज भी देसी मछलियों की कम होती संख्या के लिए जिम्मेदार हैं. ये मछलियां प्रजनन के लिए नदी के बहाव के साथ लंबी दूरी तय करती हैं, लेकिन बांधों की वजह से इनका रास्ता रुक जाता है. जब मछलियां अपने ब्रीडिंग ग्राउंड तक नहीं पहुंच पातीं तो उनकी अगली पीढ़ी का पैदा होना मुश्किल हो जाता है.
यमुना पर बने बांध और बैराज भी देसी मछलियों की कम होती संख्या के लिए जिम्मेदार हैं. ये मछलियां प्रजनन के लिए नदी के बहाव के साथ लंबी दूरी तय करती हैं, लेकिन बांधों की वजह से इनका रास्ता रुक जाता है. जब मछलियां अपने ब्रीडिंग ग्राउंड तक नहीं पहुंच पातीं तो उनकी अगली पीढ़ी का पैदा होना मुश्किल हो जाता है.
4/6
देसी मछलियों के खत्म होने की एक बड़ी वजह बाहरी प्रजातियां जैसे थाई मांगुर और ग्रास कार्प का बढ़ना है. ये विदेशी मछलियां काफी आक्रामक होती हैं और देसी मछलियों के भोजन और रहने की जगह पर कब्जा कर लेती हैं. कई बार ये विदेशी मछलियां हमारी स्थानीय प्रजातियों को खाकर उन्हें खत्म कर रही हैं.
देसी मछलियों के खत्म होने की एक बड़ी वजह बाहरी प्रजातियां जैसे थाई मांगुर और ग्रास कार्प का बढ़ना है. ये विदेशी मछलियां काफी आक्रामक होती हैं और देसी मछलियों के भोजन और रहने की जगह पर कब्जा कर लेती हैं. कई बार ये विदेशी मछलियां हमारी स्थानीय प्रजातियों को खाकर उन्हें खत्म कर रही हैं.
5/6
मछलियों की इस कमी का सबसे बुरा असर हजारों मछुआरों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है. पहले मछुआरे जाल डालते थे तो उन्हें अच्छी मात्रा में कीमती देसी मछलियां मिल जाती थीं, लेकिन अब उनके हाथ खाली रहते हैं. देसी मछलियों के गायब होने से स्थानीय बाजार और उससे जुड़े परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है.
मछलियों की इस कमी का सबसे बुरा असर हजारों मछुआरों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है. पहले मछुआरे जाल डालते थे तो उन्हें अच्छी मात्रा में कीमती देसी मछलियां मिल जाती थीं, लेकिन अब उनके हाथ खाली रहते हैं. देसी मछलियों के गायब होने से स्थानीय बाजार और उससे जुड़े परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है.
6/6
इकोसिस्टम के नजरिए से देखें तो देसी मछलियां नदी की सेहत बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होती हैं. ये मछलियां पानी में मौजूद काई और गंदगी को खाकर नदी को कुदरती तौर पर साफ रखने में मदद करती हैं. जब ये प्रजातियां खत्म होती हैं. तो नदी की गंदगी साफ करने की क्षमता कम हो जाती है और प्रदूषण बढ़ता है.
इकोसिस्टम के नजरिए से देखें तो देसी मछलियां नदी की सेहत बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होती हैं. ये मछलियां पानी में मौजूद काई और गंदगी को खाकर नदी को कुदरती तौर पर साफ रखने में मदद करती हैं. जब ये प्रजातियां खत्म होती हैं. तो नदी की गंदगी साफ करने की क्षमता कम हो जाती है और प्रदूषण बढ़ता है.

एग्रीकल्चर फोटो गैलरी

Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

मिर्च के पौधे में ज्यादा फल चाहिए? न करें ये 5 गलतियां
मिर्च के पौधे में ज्यादा फल चाहिए? न करें ये 5 गलतियां
अगस्त में बोएं ये सब्जी, सितंबर में होगी अच्छी कमाई
अगस्त में बोएं ये सब्जी, सितंबर में होगी अच्छी कमाई
ट्रैक्टर खरीदने पर 2.45 लाख रुपये की सब्सिडी, जानें तरीका
ट्रैक्टर खरीदने पर 2.45 लाख रुपये की सब्सिडी, जानें तरीका
मिर्च के पत्ते मुड़ रहे हैं? कीड़ा है या पानी की कमी
मिर्च के पत्ते मुड़ रहे हैं? कीड़ा है या पानी की कमी

वीडियोज

खाकी वर्दी पर अटैक की LIVE पिक्चर !
कूड़े के ढेर में भीषण आग, चारों तरफ धुएं का घना गुबार
2027 की तैयारी या आरक्षण का दांव? क्यों गरमाई सियासत!
Gen-Z की आधी आबादी पर सबकी नजर! 2029 का बड़ा समीकरण
Gen-Z को लुभाने की सियासत? युवाओं के मुद्दों पर विश्लेषकों का विश्लेषण

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
कब तक बनकर तैयार होगा 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन? ISRO चीफ ने किया खुलासा
कब तक बनकर तैयार होगा 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन? ISRO चीफ ने किया खुलासा
सीतापुर में अनोखी कहानी! पति और प्रेमी के साथ एक ही घर में रह रही महिला, भरती है 2 मांग
सीतापुर में अनोखी कहानी! पति और प्रेमी के साथ एक ही घर में रह रही महिला, भरती है 2 मांग
सबसे कम गेंद में 10 विकेट, मिचेल स्टार्क ने रचा इतिहास; बनाया बड़ा रिकॉर्ड
सबसे कम गेंद में 10 विकेट, मिचेल स्टार्क ने रचा इतिहास; बनाया बड़ा रिकॉर्ड
'टॉक्सिक' बनी 2026 की दूसरी सबसे ज्यादा एडवांस बुकिंग करने वाली फिल्म, 'पेद्दी'-'द राजा साब' का तोड़ा रिकॉर्ड
'टॉक्सिक' बनी 2026 की दूसरी सबसे ज्यादा एडवांस बुकिंग करने वाली फिल्म
PoK में प्रदर्शनकारियों ने कर दिया बड़ा ऐलान, बौखला उठेंगे शहबाज-मुनीर!
PoK में प्रदर्शनकारियों ने कर दिया बड़ा ऐलान, बौखला उठेंगे शहबाज-मुनीर!
राहुल गांधी से फिटनेस की तुलना पर बोले किरेन रिजिजू - 'मैं यहां का...'
राहुल गांधी से फिटनेस की तुलना पर बोले किरेन रिजिजू - 'मैं यहां का...'
शुगर पेशेंट घर के लिए एक महीने में कितनी चाहिए चीनी? नोट कर लें हिसाब किताब
शुगर पेशेंट घर के लिए एक महीने में कितनी चाहिए चीनी? नोट कर लें हिसाब किताब
छतरपुर में चार हाथ-चार पैर वाले बच्चे का जन्म, डॉक्टर भी हैरान
छतरपुर में चार हाथ-चार पैर वाले बच्चे का जन्म, डॉक्टर भी हैरान
Embed widget