Rice Farming: धान की खेती में ये गलती पड़ सकती है भारी, एक्सपर्ट ने दी चेतावनी
Rice Farming: धान की नर्सरी से पौधे उखाड़ने से पहले पौधे वाले बेड में एक दिन पहले पर्याप्त पानी देना चाहिए. इससे मिट्टी मुलायम होती है और पौध निकालते समय जड़ों पर दबाव नहीं पड़ता.

Rice Farming: देशभर में मानसून शुरू हो रहा है और इसके साथ ही किसान खेतों में धान की खेती की तैयारी शुरू कर देते हैं. धान की खेती में अच्छी पैदावार केवल सही किस्म चुनने से नहीं, बल्कि नर्सरी तैयार करने से लेकर रोपाई, खाद प्रबंधन और फसल की शुरुआती देखभाल तक हर कदम सही तरीके से करने से होती है. कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसान अक्सर जल्दबाजी या जानकारी की कमी के कारण कई बार धान की खेती में ऐसी गलतियां कर बैठता है, जिनका असर सीधे उत्पादन पर पड़ता है.
धान की जड़ों के टूटने से लेकर गलत समय पर खाद डालने और अपने खेतों में पानी की गलत प्रबंधन तक कई छोटी लापरवाही फसल को कमजोर कर देती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि धान की खेती में कौन सी गलतियां भारी पड़ सकती है और एक्सपर्ट्स इसके लिए कौन सी चेतावनी देते हैं.
नर्सरी से पौधे निकालते समय न करें जल्दबाजी
कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार धान की नर्सरी से पौधे उखाड़ने से पहले पौधे वाले बेड में एक दिन पहले पर्याप्त पानी देना चाहिए. इससे मिट्टी मुलायम हो जाती है और पौध निकालते समय जड़ों पर एक्स्ट्रा दबाव नहीं पड़ता. अगर सूखी मिट्टी के साथ पौध खींच जाती है, तो जड़ टूटने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मुख्य खेत में रोपाई के बाद पौध ठीक से सेट नहीं हो पाते हैं. वहीं पौध निकालते समय उसके तने के निचले हिस्से से पकड़ कर सीधे ऊपर की ओर खींचना चाहिए, ताकि जड़े सुरक्षित रहे और मिट्टी आसानी से अलग हो जाए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि उखाड़ी गई पौध को लंबे समय तक खुले में नहीं रखना चाहिए और 24 घंटे के अंदर इसकी रोपाई पूरी कर लेनी चाहिए, क्योंकि ज्यादा देर होने पर पौधे के जिंदा रहने की संभावना कम हो जाती.
रोपाई से पहले खेत की तैयारी भी जरूरी
धान की सफल खेती के लिए मुख्य खेत की अच्छी तैयारी बहुत जरूरी मानी जाती है. खेत की दो से तीन बार जुताई करने के बाद उसमें पानी भरकर पडलिंग करनी चाहिए. इससे मिट्टी समतल हो जाती है और पानी रोकने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे नई रोपी गई पौध को शुरुआती दिनों में पर्याप्त नमी मिलती रहती है. रोपाई के दौरान पौधों को पास-पास लगाने के बजाय निश्चित दूरी का पालन करना चाहिए. लाइन से लाइन की दूरी करीब 20 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 15 सेंटीमीटर तक रखना सही माना जाता है. एक जगह पर दो से तीन हेल्दी पौधे लगाने के बाद कल्ले अच्छी तरह से निकलते हैं और फसल का विकास बेहतर होता है.
शुरुआती दिनों में पानी और पोषण का रखें ध्यान
रोपाई के बाद पहले सप्ताह तक खेत में लगभग दो से तीन इंच पानी बनाए रखना जरूरी होता है. इससे नई जड़ों को मिट्टी पकड़ने में मदद मिलती है और पौधे गर्मी व तेज धूप के असर से भी सुरक्षित रहते हैं. इस दौरान मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की सही मात्रा का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर खेत में जिंक की कमी हो तो जिंक सल्फेट का प्रयोग भी फायदेमंद माना जाता है. इससे पौधे की बढ़ावार बेहतर होती है और वह कई समस्याओं से सुरक्षित रहते हैं.


























