ट्रंप के खिलाफ हजारों की संख्या में सड़कों पर क्यों उतरी अमेरिकी जनता, ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के बाद सबसे बड़ा विद्रोह
अब सिविल राइट्स ग्रुप, श्रमिक संघ, एलजीबीटीक्यू और महिला अधिकारों से जुड़े ग्रुप ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उनका विरोध कर रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद से ही पूरी दुनिया में हड़कंप मचा है. न सिर्फ दूसरे देश के लोग बल्कि अब तो अमेरिका के नागरिक और नेता भी ट्रंप के खिलाफ होते दिख रहे हैं. अमेरिका के 50 राज्यों में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. लोग ट्रंप की टैरिफ नीति का विरोध करते हुए- 'ट्रंप-मस्क गो बैक' के नारे लगा रहे हैं.
ट्रंप का विरोध टैरिफ की वजह से हो रही छटनी, अर्थव्यवस्था और मानवाधिकार के मुद्दे पर हो रहा है. जहां कुछ ही वक्त पहले ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर अमेरिकी जनता जश्न मना रही थी वहीं अब सिविल राइट्स ग्रुप, श्रमिक संघ, एलजीबीटीक्यू और महिला अधिकारों से जुड़े ग्रुप ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उनका विरोध कर रहे हैं.
ट्रंप के खिलाफ 1200 से अधिक जगहों पर प्रदर्शन
शनिवार को ट्रंप के खिलाफ 1200 से अधिक जगहों पर प्रदर्शन हुए. इस दौरान हजारों की संख्या में लोगों को सड़कों पर देखा गया. बीते पांच अप्रैल को 'हैंड्स ऑफ' प्रोटेस्ट प्रदर्शन शुरू हुआ था. यह विरोध प्रदर्शन ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ था. प्रदर्शन खासकर ट्रंप के छंटनी और सामूहिक डिपोर्टेशन की नीति के खिलाफ किया गया था. वाशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल से लेकर मैनहैटन और बॉस्टन तक प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को ट्रंप और मस्क के खिलाफ नारे लगाए. वो लगातार नारे लगाते हुए कह रहे थे- “कुलीनतंत्र से लड़ो” (Fight The Ogligarchy).
रविवार को 1400 से अधिक रैली
रविवार को भी ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहा. रविवार को 1400 से अधिक रैलियां प्रदर्शनकारियों ने निकाली. रविवार को होने वाले प्रोटेस्ट को हैंड्स-ऑन नाम दिया गया. इस रैली में शामिल होने के लिए 6 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. हैंड्स-ऑन का मतलब है- हमारे अधिकारों से दूर रहो.
मुंह पर पट्टी बांध कर प्रदर्शन कर रहे लोग
ट्रंप के विरोध में देशभर की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अपने मुंह पर सांकेतिक पट्टी बांध रखी थी. वो सभी न्यूयॉर्क में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के अवतार में दिख रहे थे. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ट्रंप का शासन देश को एक खतरनाक दिशा में ले जा रहा है. कई एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि यह प्रदर्शन 2020 के ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के बाद ट्रंप के खिलाफ सबसे बड़ा प्रदर्शन है.
टैरिफ से अमेरिका को क्या नुकसान?
नाराज अमेरिकी मानते हैं कि ट्रंप जो भी कर रहे हैं उसमें अमेरिका का फायदा कम बल्कि रूस का फायदा ज़्यादा है. उनका कहना है कि हमारे राष्ट्रपति दूसरे लोगों के हितों के लिए काम कर रहे हैं. यह टैरिफ हमारे देश को नष्ट करने का एक औजार है. टैरिफ की गणित की बात करें तो अमेरिका ने दूसरे देशों पर टैरिफ लगाया है इसका मतलब उन देशों को अमेरिका में सामान बेचने के लिए सरकार को टैक्स देना होगा. इसकी भरपाई के लिए अमेरिका में विदेशी कंपनियों के सामान महंगे हो जाएंगे. इसका सीधा असर अमेरिकी मिडिल क्लास पर पड़ेगा. उनके बजट बिगड़ जाएंगे. अमेरिकियों के लिए एक बड़ी चिंता ये भी है कि उनका देश दुनिया में सबसे ज्यादा सामान आयात करता है. यानी वो काफी हद तक अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं. खाने-पीने के सामान से लेकर प्लास्टिक, गाड़ियां, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, मेटल..ये सारी चीजें विदेशों से आते हैं.
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Source: IOCL






















