Nepal Gen-Z Protest: दो मिलेनियल, जिन्होंने नेपाल के लाखों GenZ को भड़का दिया, पलट गई सत्ता!
बालेन शाह काठमांडू के मेयर हैं और नेपाल के मशहूर रैपर हैं. उनके चाहने वाले लाखों में हैं. उनकी उम्र जेनजी वाली नहीं है. वो खुद आंदोलन में नहीं गए, लेकिन उनकी पोस्ट ने आंदोलन की दशा और दिशा तय कर दी.

नेपाल में सत्ता बदल चुकी है. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इस्तीफा दे चुके हैं और जान बचाकर नेपाल छोड़कर भाग गए हैं. ये सब तब हुआ है, जब नेपाल में लाखों युवाओं की भीड़ ने देश के वित्त मंत्री को पीट दिया है, प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति के घर, मंत्रियों के बंगले और राजनीतिक दलों के दफ्तरों को जला दिया, सेना और पुलिस से खतरनाक हथियार छीन लिए हैं और पूरे काठमांडू में अफरा-तफरी का माहौल है.
इन सबकी वजह है नेपाल का सोशल मीडिया बैन, जिसके खिलाफ जेनजी ने बगावत का बिगूल फूंक दिया, लेकिन क्या सच सिर्फ इतना है, जितना सामने से दिख रहा है. या फिर इस आंदोलन की जड़ में है कोई और कहानी, जिसका नेतृत्व जेनजी नहीं बल्कि उन दो मिलेनियल के हाथ में है, जिनके एक इशारे पर लाखों जेनजी पुलिस और सेना की गोलियों की परवाह किए बिना सड़क पर उतर आए और सरकार का तख्ता पलट कर दिया. आखिर क्या है नेपाल के आंदोलन की पूरी कहानी, बताएंगे विस्तार से.
4 सितंबर 2025 वो तारीख थी, जब नेपाल की केपी शर्मा ओली की सरकार ने पूरे नेपाल में कुल 26 सोशल मीडिया साइट्स को बैन कर दिया. बैन होने वाली साइट्स में कुछ लोकप्रिय साइट्स जैसे यूट्यूब, फेसबुक, एक्स, इंस्टा और वॉट्सऐप भी थे, जो लोगों की रोजमर्रा की जरूरत में शामिल हैं, लेकिन सरकार की जिद ने इन सोशल मीडिया साइट्स को पूरी तरह से बंद कर दिया. इसकी वजह से लाखों युवा आक्रोशित हो गए और उनके आक्रोश को भुनाने की कोशिश की उन दो लोगों ने, जो न तो युवा थे और न ही बुजुर्ग. ये उस उम्र वर्ग के लोग थे, जिन्हें सोशल मीडिया के इस दौर में मिलेनियल कहा जाता है. मिलेनियल यानी कि जिनकी पैदाइश 1981 से 1996 के बीच की है, जबकि ये पूरा आंदोलन चलाया जेनजी ने, जिनकी पैदाइश का साल 1997 से 2012 के बीच का माना जाता है.
तो हुआ ये कि जैसे ही 4 सितंबर को नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने सोशल मीडिया साइट्स बैन किया, 36 साल के एक लड़के को मौका मिल गया युवाओं को आंदोलन के लिए उकसाने का. उसका नाम है सुदन गुरुंग. वो इस सोशल मीडिया साइट बैन से पहले से भी ओली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए था. ओली सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार, परिवारवाद और कुछ खास लोगों की बढ़ती संपत्ति के खिलाफ सुदन आवाज उठा रहे थे, लेकिन उन्हें सही जगह नहीं मिल पा रही थी और न ही लोग सुदन के साथ जुट पा रहे थे. 27 अगस्त 2025 को जब नेपाल में सोशल मीडिया साइट्स बैन नहीं हुई थीं, तो सुदन ने एक पोस्ट लिखी. उसमें उन्होंने लिखा-
'अगर हम खुद को बदलें तो देश खुद बदल जाएगा.'
तब सुदन की इस पोस्ट पर नेपाल में कोई खास प्रतिक्रिया नहीं हुई. इस बीच जब 4 सितंबर को सोशल मीडिया बैन हुआ तो एक और मिलेनियल ने 7 सितंबर को वीपीएन का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया एक्सेस किया और लिखा-
'कल की रैली जेनजी की रैली है. इस रैली में कोई भी पार्टी, नेता, कार्यकर्ता या सांसद अपने निजी फायदों के लिए शामिल नहीं होना चाहिए. उम्र के कारण मैं जा नहीं सकता, लेकिन मेरा पूरा सपोर्ट है.'
इस पोस्ट को लिखने वाले थे बालेन शाह. बालेन शाह नेपाल की राजधानी काठमांडू के मेयर हैं और नेपाल के मशहूर रैपर हैं. उनके चाहने वाले लाखों में हैं. उनकी उम्र जेनजी वाली नहीं है. वो 35 साल के हैं, तो वो खुद आंदोलन में नहीं गए, लेकिन उनकी पोस्ट ने आंदोलन की दशा और दिशा तय कर दी. उनकी पोस्ट को 20 हजार से ज्यादा शेयर किया गया, करीब चार लाख लोगों ने उस पोस्ट पर रिएक्ट किया और 40 हजार से ज्यादा लोगों ने इसपर कॉमेंट किया, लेकिन इस बार ये मामला सोशल मीडिया पर लाइक, शेयर, कॉमेंट से आगे बढ़ गया और लाखों युवा आंदोलन के लिए काठमांडू की सड़क पर उतरने को तैयार हो गए.
इस आग में घी का काम किया सुदन गुरुंग की इंस्टाग्राम पोस्ट ने, जिन्होंने 8 तारीख की सुबह लिखा-
'आज वो दिन है जब नेपाल के युवा उठेंगे और कहेंगे कि अब बहुत हुआ. ये हमारा समय है, ये हमारी लड़ाई है, और ये हमसे, हम युवाओं से शुरू होती है.'
सोशल मीडिया पर बैन से भड़के लाखों नेपाली युवाओं को पहले तो बालेन शाह की पोस्ट ने उकसाया और फिर बची-खुची कसर सुदन गुरुंग के इंस्टाग्राम पोस्ट ने पूरी कर दी, जिसके बाद 8 सितंबर को लाखों युवा काठमांडू की सड़क पर उतर आए, राष्ट्रपति भवन पर कब्जा किया, प्रधानमंत्री आवास पर पत्थरबाजी की और पूरे शहर में ऐसा उत्पात मचाया कि सेना और पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें कम से कम 20 लोग मारे गए. 9 सितंबर की सुबह ये आंदोलन और भी हिंसक हो गया. युवाओं ने पूरे शहर में आगजनी कर दी, जिसमें प्रधानमंत्री आवास, राष्ट्रपति आवास, नेपाल की संसद, मंत्रियों के बंगले, राजनीतिक दलों के दफ्तर कुछ भी नहीं बचे और सबको जलाकर खाक कर दिया गया.
जब नेपाल के आर्मी चीफ ने भी युवाओं के आंदोलन के आगे हाथ खड़े कर दिए और कह दिया कि बिना प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे के हालात नहीं संभलेंगे तो मजबूरी में केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद नेपाल की सेना ने उनको सुरक्षित रखने के लिए अपने घेरे में ले लिया. आशंका जताई जा रही है कि ओली देश छोड़कर जा सकते हैं, लेकिन सवाल अब भी है कि आगे क्या. क्या ओली के इस्तीफे के बाद युवाओं का गुस्सा ठंडा पड़ जाएगा. आखिर अब कौन है, जो नेपाल का नेतृत्व करेगा? क्या काठमांडू के मेयर बालेन शाह को नेपाल की कमान दी जाएगी, जिनकी फिलवक्त काठमांडू की सड़कों पर जयकार हो रही है? या फिर नेपाल में अब भी इस आंदोलन का आखिरी नतीजा बाकी है. आखिर क्या होगा नेपाल का भविष्य, इसको जानने-समझने के लिए अभी करना होगा थोड़ा इंतजार?
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Source: IOCL























