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पूरी कहानी: अखिलेश और मुलायम में क्यों नहीं बनी बात?

नई दिल्ली: आखिर कैसे बिगड़ गयी बात? दिल्ली से जब नेताजी लखनऊ अपने घर लौटे तो लगा अब सब ठीक होने वाला है. अब तक 'नए विधायक ही अपना नया मुख्य मंत्री चुनेंगे' कहने वाले मुलायम सिंह बोले 'अखिलेश ही अगले सीएम होंगे'. मंगलवार की सुबह से ही नेताजी के घर के बाहर मीडिया वाले पहुंच गए. जिस घर में मुलायम सिंह रहते है ठीक उसके बगल में अखिलेश यादव का भी बंगला है. आम तौर पर अखिलेश दस बजे सवेरे अपने घर से निकल कर मुख्य मंत्री वाले बंगले पर चले जाते हैं. लेकिन वे इंतजार करते रहे कब नेताजी घर वापस लौटेंगे? मुलायम सिंह लखनऊ के चौक इलाके में टीले वाले मस्जिद चले गए थे. करीब चालीस मिनट बाद वे वापस लौटे. अखिलेश को जैसे ही पता चला वे तुरंत पिता के पास पहुंच गए. दोनों के घर के बीच कोई दीवार नहीं है. मीडिया से बचने के लिए अखिलेश अंदर के दरवाजे से ही नेताजी से मिलने पहुंच गए. पिता पुत्र के बीच डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई. काफी दिनों बाद साथ नाश्ता भी हुआ. बाहर मीडिया वाले किस्म किस्म की बातें करते रहे. आज सब ठीक हो जाएगा. किसी ने कहा अरे कुछ नहीं होने वाला. इसी बीच अखिलेश यादव अपनी मर्सीडीज गाड़ी में मुलायम सिंह के घर से निकले. बाहर खड़े कार्यकर्ताओं को देख कर हाथ हिलाये और आगे चल दिए. मीटिंग का नतीजा वही ढाक के तीन पात. मुलायम सिंह अखिलेश को सीएम चेहरे के साथ साथ टिकट बांटने का अधिकार देने को तैयार हो थे. वे फॉर्म पर दस्तखत कर ये भी देने को तैयार थे कि चुनाव चिन्ह अखिलेश बांटेंगे. नेताजी की बस दो ही शर्त थी कि मुझे राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहने दो और प्रोफ़ेसर पार्टी से बाहर रहेंगे. लेकिन अखिलेश को ये मंजूर नहीं था और आखिर वे नहीं माने. अखिलेश ने अपने पिता से कहा कि मुझे चुनाव तक अध्यक्ष बने रहने दीजिये, उसके बाद सब आपका है. इससे पहले अखिलेश और मुलायम सिंह के बीच फोन पर कई बार बातचीत हो चुकी थी. नेताजी अपने भाई शिवपाल को लखनऊ की राजनीती से दूर और अपने सखा अमर सिंह को पार्टी से बाहर करने को तैयार थे. बातचीत सिर्फ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर फंसी थी. नेताजी चाहते थे अखिलेश उपाध्यक्ष बन जाएं. अखिलेश की अपने चाचा रामगोपाल यादव से लंबी बातचीत हुई. तय हुआ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष को लेकर कोई समझौता नहीं होगा. प्रोफ़ेसर साहेब ने अखिलेश को समझाया " अगर नेताजी आपको पार्टी से निकाल सकते हैं तो वे आगे भी ऐसा कर सकते हैं. उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. चुनाव चिन्ह कुछ भी मिले. अखिलेश यादव और उनकी टीम अब आगे की तैयारियों में जुट गयी है. कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन लगभग फाइनल है. कुछ छोटी पार्टियों के साथ भी बातचीत हो रही है. टीम अखिलेश अपने उम्मीदवारों की लिस्ट बना रही है. कहां, कब और कितनी चुनावी सभाएं करनी है. प्रचार कैसे होगा इस पर अखिलेश की कोर टीम दिन रात काम कर रही है. आखिर वो कौन है, जो मुलायम सिंह को मुलायम होने से रोकता है. जब भी नेताजी अकेले होते हैं बेटे अखिलेश को लेकर प्यार उमड़ने लगता है. लेकिन अमर सिंह के साथ होने या फिर उनके फोन आते ही मुलायम हर बार कठोर हो जाते हैं. रामगोपाल यादव के दाहिने हाथ माने जाते हैं नरेश अग्रवाल. मुलायम सिंह यादव अपने छोटे भाई शिवपाल यादव के साथ दिल्ली से लखनऊ लौट रहे थे. बात पांच जनवरी की है. खबर आयी कि सीएम अखिलेश यादव उन्हें लेने खुद एयरपोर्ट जाएंगे. आज़म खान ने भी नेताजी की अगवानी करने का मन बना लिया था. ऐसा लग रहा था मुलायम परिवार में मचा घमासान कभी भी खत्म हो सकता है. पिता पुत्र बैठ कर सब कुछ सुलझा लेंगे. अखिलेश अपने मुख्य मंत्री वाले बंगले पर मीटिंग में थे. अचानक उनके मोबाईल पर फोन आया. और उन्होंने एयरपोर्ट जाने का प्रोग्राम कैंसिल कर दिया. पता चला कि अमर सिंह भी मुलायम के साथ लखनऊ आ रहे हैं. आज़म को जब ये खबर लगी तो वे भी अपने घर से नहीं निकले. दिल्ली में मुलायम सिंह के अशोक रोड वाले बंगले पर कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी थी. नेता जी अकेले थे. कार्यकर्ताओं से मुलायम बोले कि पार्टी में कोई झगड़ा नहीं है. लेकिन जैसे ही अमर सिंह उनके घर में आए नेताजी के बोल बदल गए. वे चुनाव आयोग भी पहुंच गए अपनी साइकिल बचाने. बात नौ जनवरी की है. जब शाम में वे दिल्ली लौटे तो मुलायम ने तो कहानी ही बदल दी. सूत्र बताते हैं परदे के पीछे से अमर सिंह ही मुलायम सिंह को चला रहे हैं. जब भी पिता और पुत्र के बीच बात बनने लगती है, अमर सिंह मीडिया में कोई खबर प्लांट करा कर सब ख़त्म करा देते हैं. ऐसा कई बार हुआ. वैसे अखिलेश और मुलायम झगड़े की वजह भी वही हैं. जिस दिन शिवपाल यादव को अखिलेश की जगह पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. अमर सिंह मुलायम के साथ थे. अखिलेश ने तो यहां तक कहा कि चिट्ठी जारी करवाने के लिए के लिए अमर के घर से टाईपरायटर मंगायी गयी थी. वैसे ये भी सच है कि मुलायम परिवार में सब ठीक करने के लिए अमर सिंह हर कुर्बानी देने की बात कहते रहे है. लेकिन अखिलेश के लिए वे इस झगड़े के सबसे बड़े विलेन हैं.
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