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जानिए कैसा रहा है मायावती की पार्टी के नए उपाध्यक्ष रामजी गौतम का अब तक का सियासी सफर
39 साल के गौतम केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं. वे एमबीए भी कर चुके हैं. बुंदेलखंड में वे पार्टी के कोऑर्डिनेटर रहे. तेलंगाना में भी गौतम बीएसपी का काम काज देख चुके हैं.

लखनऊ:मायावती ने रामजी गौतम को बीएसपी का नया उपाध्यक्ष बनाया है. वे कभी एमपी या एमएलए नहीं रहे. लेकिन पार्टी के लिए लगातार काम करते रहे हैं. बीएसपी में अध्यक्ष के बाद उपाध्यक्ष को ही सबसे ताक़तवर नेता माना जाता है. मायावती ख़ुद पार्टी की अध्यक्ष हैं. 39 साल के गौतम केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं. वे एमबीए भी कर चुके हैं. बुंदेलखंड में वे पार्टी के कोऑर्डिनेटर रहे. तेलंगाना में भी गौतम बीएसपी का काम काज देख चुके हैं. बीएसपी में उपाध्यक्ष का पद हमेशा विवादों में रहा है. मायावती के बाद जो भी इस कुर्सी पर बैठा, उसके साथ कभी अच्छा नहीं हुआ. कुछ दिनों पहले तक जयप्रकाश सिंह बीएसपी के उपाध्यक्ष थे. फिर राहुल गांधी पर बयान देने के बाद मायावती ने उनकी छुट्टी कर दी थी.लखनऊ में बीएसपी के कार्यकर्ता सम्मेलन में जयप्रकाश ने राहुल को पीएम के लिए नाकाबिल बताया था. उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को गब्बर सिंह कहा था. इस पर नाराज़ हो कर बहन जी ने जयप्रकाश को पहले पद से हटाया. फिर बाद में पार्टी से भी बाहर कर दिया था. जयप्रकाश बस दो ही महीने उपाध्यक्ष रह पाए थे. उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर भी बनाया गया था. पहली बार बीएसपी में ये पद बनाया गया था. बीएसपी में जो भी उपाध्यक्ष बना, उनका कभी भला नहीं हुआ बीएसपी में जो भी उपाध्यक्ष बना, उनका कभी भला नहीं हुआ. कांशीराम के रहते मायावती के पास ये ज़िम्मेदारी थी. फिर साल 2001 में वे पार्टी की अध्यक्ष बन गईं. उनके बाद जो भी उपाध्यक्ष बना, वो राजनीति में हाशिए पर चले गए. रामाराम कभी मायावती के उत्तराधिकारी माने जाते थे. आज़मगढ़ के दलित नेता राजाराम को बहिनजी ने उपाध्यक्ष बनाया था. वे राज्य सभा के सांसद भी बने. लेकिन मायावती किसी बात पर नाराज़ हुईं और राजाराम फिर गयाराम बन गए. बहनजी ने उन्हें दुबारा सांसद नहीं बनाया. अब वे जम्मू कश्मीर और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रभारी भर हैं. बीच में कुछ समय के लिए आलोक वर्मा तो बीएसपी का उपाध्यक्ष बनाया गया. मायावती ने चुनाव आयोग को जब इस बारे में चिट्ठी भेजी. तो सब हैरान रह गए. पार्टी में किसी को भी आलोक वर्मा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. न तो किसी ने उन्हें देखा था और न ही उनके बारे में सुना था. चुनाव आयोग को दिए काग़ज़ में आलोक का जो पता दिया हुआ था. उस पर कोई और रहता था. सब थक हार गए. लेकिन आलोक को नहीं ढूंढ पाए. मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार को भी बीएसपी का उपाध्यक्ष बनाया. कहते हैं कि बहनजी अपने भाई को बहुत मानती हैं. लेकिन आनंद कुछ ही महीनों तक ही अपनी कुर्सी बचा पाए. उनकी जगह मायावती ने जयप्रकाश सिंह को उपाध्यक्ष बना दिया था. दो ही महीनों में वे पार्टी से भी बाहर हो गए. अब रामजी गौतम को ये ज़िम्मेदारी मिली है. न जाने कब तक उनके अच्छे दिन बने रहेंगे ? पार्टी के कई नेता तो अभी से उनके दिन गिनने लगे हैं.
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