शीतकालीन सत्र में गूंजेगा व्हाट्सएप जासूसी मामला, राष्ट्रपति से दखल की मांग करेगा विपक्ष
जानकारी देते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा कि विपक्षी दलों के नेता पहले दिन से 'हिट लिस्ट' में हैं. हमने इस मुद्दे पर चर्चा की है. हम जल्द ही इस पर फैसला लेगें. आजाद ने बताया कि जल्द ही राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा जाएगा.

नई दिल्ली: 18 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है, इससे पहले विपक्ष व्हाट्सएप जासूसी मुद्दे को चर्चा में बनाए रखना चाहता है. इसके लिए अब विपक्ष राष्ट्रपति के पास जाने की तैयारी कर रही हैं. विपक्ष राष्ट्रपति से जासूसी मामले में दखल देते हुए मामले की जांच सप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने का की मांग करेगा. इसके साथ ही विपक्ष का कहना है कि सत्र के दौरान मुद्दे को संसद में सभी उठाया जाएगा.
सोमवार को कांग्रेस की ओर से बुलाई गई विपक्षी नेताओं की बैठक में इसे लेकर एक ज्ञापन पर दस्तखत भी किए गए, जिसे राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा. राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने बैठक में बताया कि जल्द ही राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा जाएगा.
जानकारी के मुताबिक अगर विपक्षी नेताओं को राष्ट्रपति से मिलने का समय नहीं मिलता है तो उन्हें ज्ञापन भेजा जाएगा. इस बारे में जानकारी देते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा, ''विपक्षी दलों के नेता पहले दिन से 'हिट लिस्ट' में हैं. हमने इस मुद्दे पर चर्चा की है. हम जल्द ही इस पर फैसला लेगें.
बता दें व्हाट्सएप जासूसी मामले को लेकर पूरा विपक्ष एक साथ सरकार को निशाने पर ले रहा है. कांग्रेस केंद्र सरकार पर विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी का आरोप लगाया है. विपक्ष का कहना है कि इसके लिए इजरायली स्पायवेयर पेगासस का इस्तेमाल किया गया.
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बता दें हाल ही में व्हाट्सएप ने जानकारी दी थी कि इसराइल की साइबर इंटेलिजेंस कंपनी NSO ने अपने स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल भारत में भी किया. इस साल मई के महीने में इसके जरिए भारत के कई पत्रकारों, वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी की गयी. व्हाट्सएप ने इसके लिए एनएसओ पर मुकदमा भी किया है.
























