निठारी हत्याकांड: जेल से बाहर आएगा सुरेंद्र कोली, आखिरी केस में भी सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी
निठारी हत्याकांड में मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली के खिलाफ कुल 19 केस दर्ज हुए. पंढेर को 2 मामलों में सजा हुई, लेकिन कोली को निचली अदालत ने कुल 13 मामलों में फांसी की सजा दी.

2006 के निठारी हत्याकांड में सुरेंद्र कोली के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है. 12 मामलों में बरी हो चुका कोली सिर्फ रिम्पा हलदर मामले में दोषी होने के चलते जेल में था. मंगलवार, 11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव याचिका स्वीकार कर ली है. कोर्ट ने उसकी रिहाई का आदेश दिया है.
7 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के 3 वरिष्ठतम जजों- चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस विक्रम नाथ ने कोली की क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई की थी. तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि बाकी मामलों में बरी होने के बाद एक केस के लिए बंद रहना असामान्य बात है. यह केस 1 मिनट में स्वीकार करने लायक है. मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ ने बेंच की तरफ से फैसला पढ़ा.
क्या है मामला?
29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी में मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे के नाले से 8 बच्चों के कंकाल मिले थे. बाद में घर के आसपास के नालों की तलाशी और खुदाई में कई और कंकाल मिले. मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली के खिलाफ कुल 19 केस दर्ज हुए. पंढेर को 2 मामलों में सजा हुई, लेकिन कोली को निचली अदालत ने कुल 13 मामलों में फांसी की सजा दी.
ज्यादातर मामलों में मिली राहत
16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया. हाई कोर्ट ने 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया. पंढेर को भी उसके खिलाफ चल रहे दोनों मामलों में बरी किया गया. इस साल 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कोली और पंढेर को बरी करने के हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.
सिर्फ 1 केस में मिली सजा
निठारी हत्याकांड से जुड़े रिम्पा हलदर हत्या केस में मुकदमा बाकी मामलों से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ा था. निचली अदालत, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने कोली को इस मामले में मौत की सजा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने उसकी पुनर्विचार याचिका को भी खारिज किया था. हालांकि, 2015 में दया याचिका के निपटारे में हुई देरी के आधार पर फांसी को उम्र कैद में बदल दिया गया था. इसके चलते वह अभी जेल में है.
सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुरेंद्र कोली ने बाकी सभी मामलों में बरी होने का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी. इसे सुनते हुए कोर्ट ने कहा कि बाकी सभी मामलों में याचिकाकर्ता के बरी होने के बाद एक असामान्य स्थिति बन गई है. अगर इस इकलौते मामले को देखा जाए तो इसमें भी कोली की दोषसिद्धि केवल एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी पर आधारित थी. ऐसे में यह मामला स्वीकार करने योग्य लगता है.
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