India Energy Week 2025: EV को लेकर कैसे आएगी तेजी, क्या होने जा रहा बड़ा बदलाव? एनर्जी वीक में एक्सपर्ट्स ने सब समझाया
IEW 2025: EV को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि वर्तमान में कम संख्या में ईवी के साथ इसे प्रबंधित करना संभव है, लेकिन जैसे-जैसे ईकोसिस्टम बढ़ेगा, कई लाख करोड़ के निजी निवेश की आवश्यकता होगी.

India Energy Week 2025 : भारत ऊर्जा सप्ताह 2025 के तीसरे दिन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में परिवर्तनकारी, एकीकृत ई-मोबिलिटी इकोसिस्टम की स्थापना सेशन में चर्चा के लिए उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हुए. विशेषज्ञों ने ई-मोबिलिटी को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए मजबूत नीतिगत समर्थन, रणनीतिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी और कुशल कार्यबल की आवश्यकता पर जोर दिया.
पैनल में शामिल एक्सपर्ट्स में सार्थक बेहरिया, चेयरमैन और निदेशक मंडल के अध्यक्ष, रिलायंस बीपी मोबिलिटी लिमिटेड, डॉ. शैलेंद्र शुक्ला, प्रबंध निदेशक - मोबिलिटी ग्रुप, भारत, ईटन विग्नेश नंदकुमार, सीईओ एशिया, एनफिनिटी ग्लोबल , मिन यिह तान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मोबिलिटी एशिया, शेल , विशाल कपूर, सीईओ, ईईएसएल और सत्र का संचालन: सुवोजॉय सेनगुप्ता, सीईओ, एईकॉम इंडिया शामिल थे.
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में बदलाव में क्या क्या चुनौतियां?
पैनल में चर्चा शुरू होने के सभी एक्सपर्ट ने एक-एक करके अपने क्षेत्र और एक्सपर्टीज को लेकर सभी के सामने जानकारी साझा की, जिसमें विशाल कपूर ने जीवाश्म-ईंधन आधारित प्रणालियों से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में बदलाव के दौरान आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, "वितरण ट्रांसफार्मरों की स्थापना और क्षमता विस्तार एक बड़ी चुनौती है. वर्तमान में कम संख्या में ईवी के साथ इसे प्रबंधित करना संभव है, लेकिन जैसे-जैसे ईकोसिस्टम बढ़ेगा, कई लाख करोड़ के निजी निवेश की आवश्यकता होगी."
अलग-अलग होती हैं वाहन श्रेणियों की ऊर्जा आवश्यकताएं
डॉ. शैलेंद्र शुक्ला ने बताया कि विभिन्न वाहन श्रेणियों की ऊर्जा आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं, जिसके लिए मानकीकरण जरूरी है. उन्होंने कहा, "सार्वजनिक-निजी भागीदारी एक सहज बदलाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. ऊर्जा संक्रमण में सबसे बड़ा खर्च नवाचार पर होगा, इसलिए हमें अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए." उन्होंने यह भी बताया कि भारत ऊर्जा सप्ताह प्रदर्शनी में एलएनजी और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों की विशेष उपस्थिति भविष्य की मोबिलिटी का संकेत देती है.
किफायती समाधान महत्वपूर्ण
पैनल में पाखी एक्सपर्ट्स ने तकनीक पर जोडर देते हुए अपनी राय रखी, जबकि विग्नेश नंदकुमार ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने ई-मोबिलिटी बदलाव के शुरुआती अवरोधों को पार कर लिया है, लेकिन अब तकनीक, डेटा और एआई-चालित मॉडलों को एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि ऊर्जा आवश्यकताओं की सटीक भविष्यवाणी की जा सके. उन्होंने कहा, "भारत में मजबूत इंटरनेट पहुंच दक्षता बढ़ा सकती है, लेकिन व्यापक अपनाने के लिए किफायती समाधान महत्वपूर्ण हैं."
जीवाश्म ईंधन आयात बढ़ी
सार्थक बेहरिया ने भारत में ऊर्जा सुरक्षा के बदलते परिदृश्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, "पचास साल पहले हमारा जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता 50% से कम थी, लेकिन आज यह काफी बढ़ गई है, जबकि हमने पेट्रोलियम की सुलभता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा बनाया है. अब हमें ऊर्जा सुरक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा संक्रमण की दिशा में काम करना होगा." उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती खपत के कारण जीवाश्म ईंधन मुख्यधारा में बना रहेगा, लेकिन सीएनजी से बायोगैस और अन्य विकल्पों की ओर बदलाव आवश्यक है.
कौशल विकास और कुशल मानव संसाधनों के निर्माण पर हुई चर्चा
मिन यिह तान ने ई-मोबिलिटी की सफलता के लिए तीन महत्वपूर्ण कारकों को रेखांकित किया: उपलब्धता, विश्वसनीयता और निवेश की व्यवहार्यता. उन्होंने कहा, "मांग और खपत में तेजी लाने से आपूर्ति एक महत्वपूर्ण कारक बन जाएगी. इसके साथ ही हमें कौशल विकास और कुशल मानव संसाधनों के निर्माण पर भी ध्यान देना होगा." जानकारी के मुताबिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में ई-मोबिलिटी के तेजी से अपनाने के लिए इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर निजी निवेश की जरूरत है. इसके लिए न केवल नीतिगत सुधार और रणनीतिक साझेदारी की आवश्यकता होगी, बल्कि तकनीकी नवाचार, अनुसंधान एवं विकास और कुशल कार्यबल के निर्माण पर भी ध्यान देना होगा.
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Source: IOCL



























