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नया लेबर कोड हुआ लागू, सात दशकों की जटिल व्यवस्था का अंत, जानें क्या-क्या बदलाव

New Labour Code: मजदूरी संहिता, 2019 के तहत पूरे देश में वेतन की एक समान परिभाषा लागू हो गई है. न्यूनतम वेतन अब हर सेक्टर के सभी कर्मचारियों पर लागू होगा और ओवरटाइम के लिए दो गुना वेतन अनिवार्य होगा.

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  • चार नई श्रम संहिताएं लागू, सात दशक पुराने श्रम कानून समाप्त।
  • वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा में हुए महत्वपूर्ण बदलाव।
  • गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिली औपचारिक सामाजिक सुरक्षा।
  • रोजगार, निवेश और विकास में वृद्धि के संकेत मिले।

भारत ने शुक्रवार (21 नवंबर, 2025) को श्रम सुधारों के इतिहास में एक निर्णायक छलांग लगाई. औपनिवेशिक काल में बने 29 बिखरे और जटिल श्रम कानूनों को हटाते हुए केंद्र सरकार ने चार नई श्रम संहिताएं लागू कर दी. इससे देश में पहली बार एकीकृत, सरल और आधुनिक श्रम ढांचा अस्तित्व में आया है, जो बदलती अर्थव्यवस्था, नई कार्यशैली और भविष्य के रोजगार ढांचे के अनुरूप है.

श्रम संहिताओं में एकीकृत वेतन ढांचा

चारों संहिताओं में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वेतन ढांचे में आया है. मजदूरी संहिता, 2019 के तहत पूरे देश में वेतन की एक समान परिभाषा लागू हो गई है. न्यूनतम वेतन अब हर सेक्टर के सभी कर्मचारियों पर लागू होगा और ओवरटाइम के लिए दो गुना वेतन अनिवार्य होगा. कानून में लिंग आधारित भेदभाव को स्पष्ट रूप से गैरकानूनी घोषित किया गया है, जबकि ट्रांसजेंडर श्रमिकों को भी पहली बार पूर्ण कानूनी सुरक्षा मिली है. इससे वेतन प्रणाली में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित होगा.

औद्योगिक संबंधों में पारदर्शिता, शिकायत निवारण को मजबूती

औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के लागू होने से नियोक्ता–कर्मचारी संबंध अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी हो गए हैं. शिकायत समितियों में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी से कार्यस्थलों पर प्रतिनिधित्व बढ़ेगा. फिक्स्ड टर्म रोजगार को कानूनी मान्यता मिलने से कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभ मिलेंगे. इसके साथ ही वर्क फ्रॉम होम को विधिक मान्यता मिलने से बदलती कार्यशैली को औपचारिक संरक्षण मिला है. वहीं, पूरी प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से विवादों के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है.

गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा

नई सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 भारतीय श्रम कानूनों में सबसे क्रांतिकारी बदलावों में से एक मानी जा रही है. भारत अब उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है, जिसने डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवरों और अन्य गिग वर्कर्स को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा दायरे में लाया है. इसके तहत एक विशेष सामाजिक सुरक्षा कोष बनाया गया है, जिसमें एग्रीगेटर कंपनियों से योगदान अनिवार्य होगा. सोशल सिक्योरिटी की राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी और महिला कर्मचारियों के लिए परिवार की विस्तृत परिभाषा इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाती है.

जिन राज्यों ने लागू किया, वहां नतीजे सकारात्मक

जिन राज्यों ने पहले चरण में इन सुधारों को अपनाया, वहां इसके परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दिए हैं.

  • गुजरात में 2022-23 से 2023-24 के बीच GSDP में 13.36% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र का योगदान औसत से कहीं अधिक रहा.
  • आंध्र प्रदेश में सुधारों के बाद 5.7 लाख नई संगठित विनिर्माण नौकरियां जुड़ीं.
  • उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में संगठित विनिर्माण श्रमिकों की संख्या 7.4 लाख बढ़ी.
  • राजस्थान में नाइट शिफ्ट में अनुमति मिलने के बाद महिला श्रमिकों की संख्या 13% बढ़ी.
  • हरियाणा में बेरोजगारी 9.3% से घटकर 3.4% पर आ गई.

ये आंकड़े साबित करते हैं कि श्रम सुधार रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास के सीधे चालक हैं.

सुरक्षा और गरिमा अब कानून का मूल आधार

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता, 2020 ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा को केंद्र में ला दिया है. 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी प्रतिष्ठानों के लिए आधुनिक सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है. प्रवासी श्रमिकों को औपचारिक सुरक्षा मिली है और महिलाएं अब नाइट शिफ्ट में भी आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों के साथ काम कर सकती हैं. अनिवार्य नियुक्ति पत्र, स्वास्थ्य जांच और जोखिमपूर्ण कार्यों के लिए विशेष सुरक्षा नियम इस ढांचे को और सुदृढ़ बनाते हैं.

श्रमिक-केंद्रित शासन का संकेत

इन संहिताओं से यह भी स्पष्ट होता है कि लंबे समय से अटके श्रम सुधारों को लागू करने में मोदी सरकार ने निर्णायक और साहसिक कदम उठाया है. पिछली सरकारें इन सुधारों पर चर्चा करती रहीं, लेकिन उन्हें लागू नहीं कर पाईं. नई व्यवस्था फैक्टरी मजदूरों, गिग वर्कर्स, महिलाओं, MSME सेक्टर के कर्मचारियों और प्रवासी श्रमिकों, सभी के लिए समान रूप से लाभकारी मानी जा रही है. इससे सरकार की छवि श्रमिक-केंद्रित शासन के रूप में और मजबूत हुई है.

नया श्रम ढांचा - अधिकार, उत्पादकता और प्रगति की दिशा में कदम

चारों श्रम संहिताएं केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की संरचना का आधार हैं. श्रमिकों को बाधारहित अधिकार, उद्योगों को सरल अनुपालन और देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में गति देना, इन्हीं तीन स्तंभों पर नया श्रम ढांचा तैयार किया गया है. यह सुधार बताता है कि भारत अब केवल बदलाव नहीं कर रहा, बल्कि अपने श्रम बाजार को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप पुनर्गठित कर रहा है. नई संहिताओं के साथ भारत एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान, दोनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और यही भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बनेगा.

यह भी पढ़ेंः दिल्ली पुलिस और NCB ने जब्त की 262 करोड़ की ड्रग्स, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की तारीफ

अभिषेक नयन का पत्रकारिता में लंबा अनुभव है. साल 2011 से ABP News से जुड़े हैं. दिल्ली-NCR की राजनीतिक, सामाजिक और नागरिक समस्याओं की जमीनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करते हैं.

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