दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, PM CARES फंड को RTI के तहत मिला है निजता का अधिकार
Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए अहम संकेत दिया कि कोई संस्था अगर सरकारी भी हो, तब भी उसकी कुछ जानकारी निजता के दायरे में रह सकती है.

दिल्ली हाई कोर्ट में पीएम केयर्स फंड को लेकर चल रहे एक अहम मामले ने देश में पारदर्शिता और निजता की बहस को फिर से तेज कर दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी, 2023) को मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पीएम केयर्स फंड भले ही एक सरकारी या सार्वजनिक संस्था क्यों न हो, उसे भी सूचना के अधिकार कानून के तहत निजता का अधिकार मिलता है. कोर्ट ने साफ किया कि किसी संस्था का पब्लिक अथॉरिटी होना यह मतलब नहीं कि उसकी हर जानकारी जनता के सामने खोल दी जाए.
सामाजिक कार्यकर्ता गिरिश मित्तल ने दायर की थी दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी
यह मामला मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ता गिरिश मित्तल की ओर से दायर अपील से जुड़ा है. गिरिश मित्तल ने RTI कानून के तहत आयकर विभाग से पीएम केयर्स फंड को दी गई टैक्स छूट से जुड़े दस्तावेज मांगे थे. उन्होंने जानना चाहा था कि पीएम केयर्स फंड ने टैक्स छूट के लिए कौन-कौन से कागजात दिए, किन अधिकारियों ने उस पर क्या टिप्पणियां कीं और 2019 से 2020 के बीच किन संस्थाओं को टैक्स छूट मिली या किसे मना किया गया. केंद्रीय सूचना आयोग यानी CIC ने आयकर विभाग को यह जानकारी देने का आदेश दिया था, लेकिन आयकर विभाग ने इसे चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल जज की बेंच ने खारिज की थी याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज की बेंच ने CIC के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि आयकर कानून की धारा 138 के तहत करदाताओं से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, इसलिए CIC इस तरह की जानकारी देने का आदेश नहीं दे सकता. अब इस फैसले के खिलाफ गिरिश मित्तल ने अपील की है. उनके वकील ने कोर्ट में दलील दी कि RTI कानून की धारा 8(1) केवल किसी व्यक्ति की निजता की रक्षा के लिए है, न कि पीएम केयर्स जैसे सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए. उनका कहना था कि यह फंड देशवासियों के दान से बना है, इसलिए इसकी कार्यप्रणाली पारदर्शी होनी चाहिए.
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए दिए अहम संकेत
दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए अहम संकेत दिया कि कोई संस्था अगर सरकारी भी हो, तब भी उसकी कुछ जानकारी निजता के दायरे में रह सकती है. कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक कार्य करने से कोई संस्था अपनी सारी गोपनीयता नहीं खो देती. अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी, 2026 को होगी. तब यह तय होगा कि पारदर्शिता और निजता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए और क्या पीएम केयर्स फंड से जुड़ी टैक्स छूट की जानकारी आम जनता तक पहुंचेगी या नहीं.
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