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हरम की औरतों के लिए क्यों अपने नाम बदलते थे अकबर के दरबारी? जानें इसके पीछे की कहानी

मुल्ला बदायूनी ने लिखा कि कुछ दरबारी हरम की औरतों को खुश करने के लिए अपने नाम बदलने लगे. अकबर ने इसे देखकर समाज में शिक्षा और नई सोच को बढ़ावा दिया.

बहुत साल पहले भारत में महान सम्राट अकबर का शासन था. उनका दरबार ज्ञान और विचारों का केंद्र माना जाता था. अकबर चाहते थे कि लोग सिर्फ पुराने नियमों में न बंधें, बल्कि नई सोच और शिक्षा अपनाएं. उनके दरबार में विद्वान मुल्ला अब्दुल कादिर बदायूनी भी थे. उन्होंने अपनी किताब तवारीख में लिखा कि अकबर ने कुछ इस्लामी नियमों को छोड़ दिया और विधर्मियों की कुछ बातें स्वीकार कर लीं. मुल्ला बदायूनी ने अकबर पर कई गंभीर आरोप लगाए, जिनमें से कुछ का जिक्र सार्वजनिक रूप से नहीं किया जा सकता.

1582 में अकबर ने बनाई ये योजना

1582 में अकबर ने नया धर्म चलाने की योजना बनाई. उन्होंने अपने दरबार के बुद्धिमान लोगों के साथ बैठकें कीं. एक बैठक में राजा भगवानदास कछवाहा ने उनसे पूछा कि यदि हिंदू और मुस्लिम धर्म बुरे हैं, तो उनका नया धर्म क्या होगा. अकबर ने सोचा और राजा को नए धर्म के लिए राजी करना छोड़ दिया, लेकिन अपने विचारों पर काम करना जारी रखा.

इसी दौरान कुछ विरोधियों को दक्षिणी राज्यों में भेजा गया. उन्होंने वहां के शासकों को समझाया कि अकबर ने उन्हें दंडित किया है, जिससे वे सम्मान के साथ अपने राज्यों में शरण पाए. अकबर ने दिल्ली में काजी अब्दुल समी को नियुक्त किया और नए नियम लागू किए.

हरम की औरतों को खुश करने के लिए नाम बदलने लगे दरबारी

मुल्ला बदायूनी ने लिखा कि कुछ दरबारी हरम की औरतों को खुश करने के लिए अपने नाम बदलने लगे. उन्होंने नाम बदलकर मोहम्मद, यार मोहम्मद जैसे नाम रखे. अकबर ने इन कदमों को देख समाज में शिक्षा और सोच बदलने की दिशा में प्रयास किया.

अकबर ने सैयद मीर फतेह उल्ला को बुलाया और उन्हें अमीरों के बच्चों को पढ़ाने का काम सौंपा. बच्चों को गणना, अक्षर और ज्ञान के नए तरीके सिखाए गए. सैयद मीर फतेह उल्ला ने बच्चों को आधुनिक शिक्षा दी और उन्हें नई सोच से परिचित कराया.

मुल्ला बदायूनी ने किया विरोध

मुल्ला बदायूनी ने विरोध किया, लेकिन यह स्पष्ट था कि अकबर का उद्देश्य समाज में ज्ञान और शिक्षा का विस्तार करना था. उनके प्रयासों ने बच्चों को नई सोच दी और दरबार में विचारों का नया वातावरण बनाया.

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