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Motivational Quotes: स्वामी विवेकानंद का संदेश, सभी धर्म एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं

Motivational Quotes: स्वामी विवेकानंद का 1893 का शिकागो भाषण भारत की संस्कृति और सहिष्णुता का प्रतीक है. उन्होंने सच्चा धर्म कर्म, प्रेम और भक्ति में बताया, मार्ग भिन्न पर सत्य एक है.

Swami Vivekananda: स्वामी विवेकानंद का 1893 में शिकागो की धर्म महासभा में दिया गया भाषण पूरी दुनिया के लिए मिसाल है. उस भाषण ने भारत के प्राचीन गौरव और संस्कृति से दुनिया को परिचित कराया.

विवेकानंद का संदेश

उन्होंने न केवल भारत का गौरव बढ़ाया, बल्कि पूरी मानवता को एक महान संदेश दिया था जिसे आज भी याद किया जाता है. धर्म सम्मेलन में उन्होंने गर्व से कहा कि मैं उस धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है. भारत की यही भावना उसकी आत्मा है. वसुधैव कुटुंबकम्, अर्थात पूरी दुनिया एक परिवार है.

विवेकानंद ने बताया कि भारत वह भूमि है, जिसने सदियों से हर धर्म, हर जाति और हर मत के लोगों को अपनाया है. उन्होंने यहूदियों और पारसियों जैसे सताए गए समुदायों को शरण देने की परंपरा को भारत का गर्व बताया. उनका संदेश स्पष्ट था कि सच्चा धर्म वह है जो दूसरों के सत्य को स्वीकार करे, न कि केवल सहन करे.

सत्य एक है, मार्ग अनेक हैं 

विवेकानंद का शिकागो भाषण केवल धार्मिक सहिष्णुता की बात नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि सत्य एक है, मार्ग अनेक हैं. उन्होंने कहा कि जैसे अनेक नदियाँ अलग-अलग मार्गों से समुद्र में मिलती हैं, वैसे ही सभी धर्म ईश्वर तक पहुंचते हैं.

उनके अनुसार, ईश्वर किसी एक धर्म या ग्रंथ में सीमित नहीं है. वेद कोई एक पुस्तक नहीं, बल्कि वह शाश्वत ज्ञान है जो युगों-युगों से मानवता को सत्य की ओर ले जाता है. अर्थात धर्म का सार बाहरी कर्मकांड में नहीं, बल्कि अंतरात्मा की शुद्धता में है.

कर्म, प्रेम और भक्ति ही सच्चा धर्म है 

विवेकानंद कहते हैं कि सच्चा धर्म वही है जो कर्म, प्रेम और भक्ति से जुड़ा हो. उन्होंने श्रीकृष्ण के उदाहरण से समझाया कि मनुष्य को संसार में रहकर भी उससे आसक्त नहीं होना चाहिए. जैसे कमल का पत्ता जल में रहकर भी जल से नहीं भीगता, वैसे ही साधक को कर्म करते हुए भी मोह से दूर रहना चाहिए.

विवेकानंद ने कहा कि सहायता करो, लड़ो मत. आत्मसात करो, विनाश नहीं. शांति रखो, मतभेद नहीं. आज जब दुनिया में हिंसा और भेदभाव बढ़ रहा है, विवेकानंद का यह उपदेश हमें फिर याद दिलाता है कि सभी मार्ग ईश्वर तक ही जाते हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में छोटा-सा गांव है तिलबिहता, जहां 22 साल की कहकशां परवीन रहती हैं. पढ़ाई की शौक कहकशां अपने सपने पूरे करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं. 25 मार्च 2003 के दिन तिलबिहता गांव में अपनी जिंदगी का सफर शुरू करने वाली कहकशां के पिता मोहम्मद जिकरुल्लाह बिजनेसमैन हैं तो मां नजदा खातून हाउसवाइफ हैं. भाई आमिर आजम, बहन उजमा परवीन, जेबा परवीन, सदफ परवीन और दरख्शां परवीन को वह अपनी ताकत मानती हैं. वहीं, उनकी सबसे अच्छी दोस्त सान्या कुमारी हैं. 

तिलबिहता के ओरेकल पब्लिश स्कूल से स्कूलिंग करने के बाद कहकशां ने हरदी के आरकेएसपी अकैडमी हाई स्कूल से मैट्रिक किया तो जैतपुर स्थित एसआरपीएस कॉलेज से इंटर पास किया. मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन (BMC) करने वाली कहकशां को अब अपने फाइनल रिजल्ट का इंतजार है. 

कहकशां की जिंदगी में पढ़ाई के साथ-साथ कई शौक हैं, जो उनकी दिनचर्या को रोचक बनाते हैं. अपने आसपास की खूबसूरत चीजों को कैमरे में कैद करने में माहिर कहकशां को खबरें पढ़ना और पेंटिंग बनाना बेहद पसंद है. इसके अलावा वह खाना बनाना, नमाज पढ़ना, रील्स देखना, गाना सुनना और कॉमेडी वीडियो देखना भी पसंद करती हैं. 

फिल्म संजू का 'कर हर मैदान फतेह' गाना हर मुश्किल वक्त में उन्हें हिम्मत देता है तो आमिर खान, शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय बच्चन उनके पसंदीदा सेलेब्स हैं. वहीं, फिल्म चक दे इंडिया से उन्हें कुछ कर दिखाने की प्रेरणा मिलती है. एमएस धोनी, विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर उनके फेवरेट क्रिकेटर्स हैं. वहीं, सुबह का वक्त और सर्दी का मौसम उन्हें बेहद पसंद है. कहकशां फोटोग्राफी के जरिए लोगों की कहानियां बयां करना चाहती हैं, जिसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं.

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