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Grahan 2026: अगस्त में 15 दिन के अंदर दो ग्रहण, क्या है इसका ज्योतिष महत्व और मिल रहे हैं ये संकेत

Grahan 2026: सावन में सूर्य ग्रहण 12 अगस्त और चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को यानी 15 दिन के अंदर लग रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में इसका क्या महत्व है, इसके क्या संकेत हैं जानते हैं.

Grahan 2026: साल 2026 का अगस्त महीना ज्योतिष और खगोलीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण, दोनों पड़ रहे हैं. 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगेगा, जबकि 28 अगस्त 2026 को चंद्र ग्रहण होगा। सावन में लगने वाले इन दोनों ग्रहणों के बीच लगभग 16 दिन का अंतर है.

वैदिक ज्योतिष में जब एक ही पक्ष या लगभग 15-16 दिनों के अंदर सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों पड़ते हैं तो इसे महत्वपूर्ण खगोलीय और ज्योतिषीय घटना माना जाता है. ऐसे ग्रहणों को केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और मानव जीवन में बदलाव के संकेतों के रूप में भी देखा जाता है. अगस्त में दो ग्रहण का होना किस बात का संकेत दे रहा है जानते हैं.

2026 का दूसरा सूर्य और चंद्र ग्रहण

वैदिक पंचांगों के अनुसार 12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा. वहीं रक्षाबंधन पर 28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा. ये दोनों ही ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे.

  • सूर्य ग्रहण समय - भारतीय समयानुसार ये सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 11 बजकर 17 मिनट पर शुरू होगा और अगले दिन यानी 13 अगस्त की सुबह 04 बजकर 25 मिनट तक चलेगा.
  • चंद्र ग्रहण समय - भारतीय समय अनुसार ये ग्रहण सुबह 6.53 से दोपहर 12.31 तक रहेगा.

15 दिन में दो ग्रहण दे रहे ये संकेत

  • जब एक ही पक्ष में दो ग्रहण लगते हैं तो उसे एक्लिप्स सीजन कहा जाता है.  आचार्य वराहमिहिर रचित बृहत्संहिता के राहुचाराध्याय में ग्रहणों के प्रभाव का विस्तार से वर्णन मिलता है.
  • इसके अनुसार जब एक ही ग्रहण पक्ष में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों पड़ते हैं तब तेज आंधी-तूफान, भूकंप जैसी घटनाएं होती है, जनहानि की आशंका बढ़ जाती है.
  • राज्यों और शासन-प्रशासन के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.
  • सीमाओं पर गतिविधियां बढ़ने, राजनीतिक अस्थिरता, जनजीवन में उथल-पुथल के योग बनते है.
  • नोट- ये शास्त्रीय ज्योतिषीय संकेत हैं, ग्रहणों का फल उनके नक्षत्र, राशि, दृश्यता और अन्य ग्रहयोगों के आधार पर बताया जाता है.

पुराणों में ग्रहण क्या है

ग्रहण का सबसे प्राचीन उल्लेख ऋग्वेद के मंडल 5, सूक्त 40 में मिलता है. इसमें बताया गया है कि स्वर्भानु नाम के एक असुर ने सूर्य को अंधकार से ढक दिया था जिससे चारों ओर अंधेरा छा गया. तब महर्षि अत्रि ने अपने तप और वैदिक मंत्रों के प्रभाव से सूर्य के प्रकाश को फिर से प्रकट किया. बाद के पुराणों में इसी घटना को राहु-केतु की कथा से जोड़ा गया है.

भागवत पुराण (स्कंध 8) में समुद्र मंथन, राहु-केतु की उत्पत्ति और सूर्य-चंद्र ग्रहण का कारण बताया गया है. इसी कथा के अनुसार राहु सूर्य और चंद्रमा को ग्रसने का प्रयास करता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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